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World Lung Cancer Day: सिगरेट ना पीने वालों को भी हो जाता है लंग कैंसर, कहीं आप भी तो नहीं हो रहे शिकार

World Lung Cancer Day: वायु प्रदूषण भी लंग की बड़ी वजह है। ताजा रिपोर्ट्स से यह सामने आया है कि पिछले 15 से 20 सालों में लगातार बढ़ते ट्रैफिक से होने वाले वायु प्रदूषण ने लंग कैंसर के खतरे को 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिया है।

Author Updated: August 1, 2018 12:20 PM
अब 30 साल से कम उम्र वाले लोग और महिलाओं में भी लंग्स कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।(file photo)

World Lung Cancer Day: बुधवार (1 अगस्त, 2018) को वर्ल्ड कैंसर डे है। लंग कैंसर आज पूरी दुनिया में फैलने वाली खतरनाक बीमारी है। धूम्रपान करना फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारणों में से एक है। धूम्रपान करने वाले और इसके सम्पर्क में रहने वालों दोनों को फेफड़ों के कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। डॉक्टरों का मानना है कि धूम्रपान करने से फेफड़ों के कोशिकाओं को हानि पहुंचती है, जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है। लेकिन हाल में सामने आई एक रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। दरअसल, दिल्ली के मशहूर सर गंगाराम हॉस्पिटल द्वारा जारी की गई ताजा रिपोर्ट में सिगरेट ना पीने वाले लोग यानी नॉन स्मोकर्स भी लंग कैंसर का शिकार हो रहे हैं।

दरअसल, गंगाराम हॉस्पिटल में फेफड़ों का कैंसर का इलाज कराने आए करीब 150 मरीजों पर की गई एक स्टडी में पाया गया है कि इनमें से आधी लोगों में कभी धूम्रपान नहीं किया था। पिछले दशक तक, किसी के भी लंग कैंसर से ग्रस्‍त होने की औसत उम्र 70 साल थी। इनमें वो लोग शामिल होते थे जो धूम्रपान का सेवन करते थे या उनके संपर्क में रहते थे। लेकिन अब 30 साल से कम उम्र वाले लोग और महिलाओं में भी लंग्स कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो 10 से 15% तक हेल्थी और जिन्होंने कभी भी सिगरेट का सेवन नहीं किया। इससे साफ है कि लंग कैंसर का एक बड़ा कारण प्रदूषण भी है।

पूर्व लंदन ओन्कोलॉजी कैंसरकेयर सेंटर के क्लीनिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. चार्लीन मुलर के मुताबिक वायु प्रदूषण भी लंग की बड़ी वजह है। उनका कहना है कि ताजा रिपोर्ट्स से यह सामने आया है कि पिछले 15 से 20 सालों में लगातार बढ़ते ट्रैफिक से होने वाले वायु प्रदूषण ने लंग कैंसर के खतरे को करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिया है। ट्रैफिक के अलावा थीनर, पेंट्स, घर बनाने में इस्तेमाल किए गए मैटेरियल, एस्बेस्टोस, क्रोमियम, आर्सेनिक तत्वों के संपर्क में आने से भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

हमारे आस पास के वातावरण में मौजूद प्रदूषित कणों में उतने ही केमिकल्स होते हैं, जितने एक सिगरेट में होते हैं। पीएम 2.5 का लेवल 250 से ऊपर होने का मतलब है कि हर इंसान रोजाना 10 सिगरेट के बराबर स्मोक कर रहा है। इस वजह से नॉन स्मोकर भी लंग कैंसर का शिकार हो रहे हैं।

लंग कैंसर के लक्षण

– खांसी जो आसानी से नहीं जा रहा है
– कफ के साथ खून का आना
– सांस लेने में तकलीफ
– छाती में दर्द
– आवाज बैठना
– वजन का कम होना
– हड्डी में दर्द
– सिरदर्द की शिकायत

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