World Heart Day: जब भी हार्ट अटैक का जिक्र होता है, सबसे पहले सीने में तेज दर्द का ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हार्ट अटैक के दौरान हर व्यक्ति को सीने में तेज दर्द हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार जबड़े में दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, मितली या शरीर में असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अक्सर लोग इन संकेतों को सामान्य थकान, गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज मिलने में देरी हो सकती है। वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर सी.के. बिड़ला अस्पताल, पंजाबी बाग, नई दिल्ली के निदेशक एवं कार्डियक साइंसेज विभाग के डॉक्टर अंशुल कुमार जैन ने बताया कि खराब लाइफस्टाइल, धूम्रपान, बढ़ता तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर खान-पान, बढ़ता वजन, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे कई कारक कम उम्र में हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। वायु प्रदूषण भी हृदय स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है।

कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में लोगों की लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव आया है। शहरीकरण, नौकरी का तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, बाहर का खाना और पैकेज्ड फूड के बढ़ते सेवन के साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। पहले हार्ट डिजीज को मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, इसलिए इसके संभावित लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। सिर्फ सीने में दर्द को ही हार्ट अटैक का संकेत मानना सही नहीं है। कुछ लोगों में इसके लक्षण शरीर के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि हार्ट अटैक के दौरान शरीर में कौन-कौन से संकेत दिखाई दे सकते हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हार्ट अटैक के कौन से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?

सीने में दबाव, भारीपन या दर्द ये हार्ट अटैक के क्लासिक लक्षण हो सकते हैं, खासकर जब यह चलने या मेहनत करने पर बढ़े और आराम करने पर कम हो। इसके अलावा सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, असामान्य कमजोरी या दर्द का हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक पहुंचना भी हार्ट अटैक के वार्निंग साइन हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण बहुत हल्के या अलग तरह के भी हो सकते हैं।

कई बार दिल से जुड़ी समस्याओं के लक्षण बहुत गंभीर या स्पष्ट नहीं होते, इसलिए लोग उन्हें आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं या रोजमर्रा की परेशानियों से जोड़कर देखते हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, असामान्य थकान, रोज के काम करने की क्षमता कम होना, सीने में बेचैनी या कभी-कभी बेहोशी जैसी समस्या को लोग उम्र बढ़ने, अपच, सीने में जलन, फिटनेस की कमी या रोजमर्रा के तनाव का असर मान सकते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण पहली बार दिखाई दें, बार-बार हों या धीरे-धीरे बढ़ रहे हों, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गैस या एसिडिटी समझ कर सीने के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

सीने में जलन या अपच जैसी परेशानी हमेशा गैस की वजह से ही हो, यह जरूरी नहीं है। खासकर अगर किसी व्यक्ति को पहली बार ऐसी परेशानी हो, साथ में सांस फूलना, पसीना, कमजोरी, दबाव या बेचैनी महसूस हो रही हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे लक्षणों में खुद से कारण तय करने के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

अचानक तेज या धीमी धड़कन कब चिंता की बात है?

दिल की धड़कन तनाव, डर, व्यायाम या उत्साह में कुछ समय के लिए धड़कन तेज हो सकती है, अगर ये स्थिति नियमित रूप से आराम की स्थिति में भी बनी रहे तो आप इसे नजरअंदाज नहीं करें तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाएं। चिंता तब बढ़ती है जब धड़कन अचानक बहुत तेज या बहुत धीमी हो, अनियमित महसूस हो या इसके साथ चक्कर, बेहोशी, सीने में भारीपन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण भी दिखाई दें।ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

हार्ट अटैक आ जाएं तो क्या करें?

अगर आपको बॉडी में इस तरह के कोई लक्षण दिखाई दे और हार्ट अटैक जैसी स्थिति नजर आए तो आपको तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेना चाहिए है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचना चाहिए। इस स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती उपचार से हृदय की मांसपेशी को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। अस्पताल में ECG, ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार करके मरीज की जान को बचाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। सीने में दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना या जबड़े और हाथ में अचानक दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें और न ही इलाज में देरी करें।