एम्स ऑनलाइन के सहारे और मरीज भगवान भरोसे

कोरोना के मामले कम होने के बाद भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों को इलाज के लिए भारी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।

AIIMS में प्रतिदिन देशभर से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। (सांकेतिक फोटाे।)

प्रतिभा शुक्ल


कोरोना के मामले कम होने के बाद भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों को इलाज के लिए भारी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। यहां आॅनलाइन की अनिवार्यता का खामियाजा उन मरीजों को उठाना पड़ रहा है जो दूर इलाकों और गांवों से आते हैं और तकनीक की समझ नहीं रखते।

एम्स में आॅनलाइन पंजीकरण की अनिवार्यता और दो महीने के बाद समय मिलने से लेकर इलाज पाने तक लंबी यातना मरीजों को झेलनी पड़ रही है। आॅनलाइन की समझ या क्षमता न रखने वाले मरीजों को इलाज मिल पाना मुश्किल हो रहा है।कोरोना के बाद जिंदगी बदली तो मानवता के आधार पर इलाज मिलना कठिन हो गया है। तकनीकी नियम के हिसाब से सब तय हो रहा है। एम्स में हर बार आने पर आॅनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है और समय मिलने में कम से कम एक महीना लग रहा है। मरीजों को समय लेने के लिए भी साइबर कैफे या ऐसे ही दूसरे केंद्र पाने के लिए भटकना पड़ रहा है। एक फोन नंबर भी इंतजार करने के बाद कट जाता है। अगर समय नहीं मिलता है तो मरीज को कार्ड नहीं मिलेगा और ओपीडी में दिखा नहीं सकता।

एम्स में आए मरीज के परिजन सौरभ ने बताया कि उनकी मां को ब्रेन में ट्यूमर है लेकिन यहां दिखाने का समय नहीं मिल पा रहा। आॅनलाइन कोशिश कि लेकिन महीने भर कोई समय नहीं उपलब्ध है। यहां मरीजों की कोई सुनवाई नहीं हैं। वहीं पेट में पानी भरने की शिकायत लेकर आई मरीज रोहन के बेटे ने बताया कि वे करीब तीन घंटे पीआरसी के सामन लाइन में लगे रहे लेकिन काउंटर पर आने के बाद उन्हें कहा गया कि पहले जाकर आॅनलाइन समय लो। आॅनलाइन के बारे में पूछने पर वहां एक नंबर दिया गया जिस पर काफी देर बात करने की कोशिश करते रहे। संभव नहीं हुआ हार कर इमरजंसी के सामने पडेÞ हैं कि क्या पता यहां देख लिया जाए। कुछ डॉक्टर ऐसे मरीजों की मदद के लिए मानवता के आधार पर बिना कंप्यूटर पंजीकरण के ही देख लेते ते। वे इनके कार्ड बनाने के लिए पर्ची दस्तखत करके दे देते थे।

इसी अस्पताल के फुटपाथ पर लेटे मरीज दिनेश ने बताया कि उनसे चला नहीं जा रहा लेकिन गार्ड ने अंदर घुसने नहीं दिया। कहा कि समय नहीं लिए हो, नहीं दिखा सकते। यहीं पर आंख के इलाज के लिए भटक रहे मरीज की परिजन सावित्री ने बताया कि कई दिन पहले आई थी। वे सुबह से लाइन में लगी थीं लेकिन पहले समय नहीं लिया था तो फाइल नहीं बन पाई। आरपी सेंटर चीफ के दफ्तर में कर्मचारियों ने यह कह कर भगा दिया कि बिना आॅनलाइन पंजाकरण के यहां से पर्ची नहीं मिलेगी।अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस अस्पताल मरीजों की सुविधा के लिए पहले से समय लेने की व्यवस्था की गई है। कोरोना काल में यह जरूरी भी है ताकि भीड़ के सही से नियंत्रित किया जा सके।

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