राहुल एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। उसकी कंपनी की वर्क पॉलिसी के मुताबिक, हफ्ते में पांच दिन काम और दो दिन आराम का समय मिलता है। राहुल हर हफ्ते अपने दोनों वीकली ऑफ लेता है और कई बार दो-तीन दिन की अतिरिक्त छुट्टी लेकर एक हफ्ते के लिए घूमने भी चला जाता है। लेकिन छह दिन की छुट्टी के बाद जब वह ऑफिस लौटता है, तो कुछ ही देर में उसे फिर थकान महसूस होने लगती है। काम से उसका मन उचटने लगता है, काम बोझिल लगने लगता है और कई बार तो उसके मन में नौकरी छोड़ने तक का ख्याल आने लगता है। सवाल यह है कि आखिर छुट्टी लेने और घूमने-फिरने के बाद भी राहुल खुद को फ्रेश क्यों महसूस नहीं कर पाता? क्या इसकी वजह सिर्फ दिमागी थकान है या यह बर्नआउट का संकेत हो सकता है? आखिर छुट्टी के बाद भी माइंड रिचार्ज क्यों नहीं होता और इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है? आइए साइकोलॉजिस्ट और रिसर्च से जानते हैं।
छुट्टी से लौटने के बाद भी दिमाग रिचार्ज क्यों नहीं होता?
अक्सर देखा जाता है कि हम लोग 10-12 दिन की छुट्टी बिताकर जब ऑफिस लौटते हैं, तो इसके बावजूद थकान महसूस होती है। इसके लिए सिर्फ ऑफिस का तनाव जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि मानसिक थकावट, काम और निजी जीवन के बीच सीमाएं स्पष्ट न होना, छुट्टी लेने पर भी काम को लेकर अपराधबोध महसूस करना, लगातार काम के बारे में सोचते रहना और शरीर-दिमाग को पर्याप्त आराम या रिकवरी का समय न मिल पाना भी कारण हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, बर्नआउट को लंबे समय तक बने रहने वाले वर्क प्लेस के तनाव से जुड़ी एक व्यावसायिक स्थिति माना जाता है,न कि कोई मेडिकल कंडीशन। इसके तीन प्रमुख आयाम बताए गए हैं-अत्यधिक थकावट, काम से मानसिक दूरी या नकारात्मकता और काम करने की क्षमता में कमी।
बर्नआउट के तीन प्रमुख लक्षणों को समझें
अत्यधिक थकावट (Exhaustion)pubmed में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कराती है। पर्याप्त नींद या छुट्टी लेने के बाद भी ऊर्जा वापस नहीं आती और रोजमर्रा के काम भी बोझिल लगने लगते हैं।
काम से मानसिक दूरी या नकारात्मकता (Mental Distance/Cynicism)
व्यक्ति धीरे-धीरे अपने काम से भावनात्मक रूप से दूर होने लगता है। उसे काम में रुचि नहीं रहती, ऑफिस या सहकर्मियों को लेकर चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है और काम के प्रति नकारात्मक रवैया बढ़ने लगता है। कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह बस किसी तरह काम पूरा कर रहा है।
काम करने की क्षमता में कमी (Reduced Professional Efficacy)
इस स्थिति में व्यक्ति को लगने लगता है कि वह पहले की तरह अच्छा काम नहीं कर पा रहा है। काम पूरा करने में ज्यादा समय लग सकता है, आत्मविश्वास कम हो सकता है और अपनी उपलब्धियों के बावजूद उसे लग सकता है कि वह पर्याप्त अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा। यानी, सिर्फ थका हुआ महसूस करना बर्नआउट नहीं है। बर्नआउट में लगातार थकावट के साथ काम से दूरी या नकारात्मकता और अपनी कार्यक्षमता को लेकर कमी का एहसास भी शामिल हो सकता है।
vacation के बाद भी थकान क्यों?National library of medicine के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से तनाव में है, तो दो-चार दिन या कुछ दिनों की छुट्टी लेने के बाद भी उसकी मानसिक थकावट तुरंत खत्म हो, यह जरूरी नहीं है। लगातार काम का दबाव, डेडलाइन, ऑफिस से जुड़ी चिंताएं और हर समय काम के बारे में सोचते रहने से शरीर और दिमाग लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रह सकते हैं। इसे क्रॉनिक स्ट्रेस यानी लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव कहा जाता है। ऐसे में छुट्टी के दौरान ऑफिस से शारीरिक दूरी तो बन जाती है, लेकिन अगर व्यक्ति मानसिक रूप से काम से जुड़ा रहता है जैसे लगातार ईमेल और मैसेज चेक करना या लौटकर आने वाले काम की चिंता करना तो दिमाग को वास्तविक आराम नहीं मिल पाता।
छुट्टी का मतलब सिर्फ ऑफिस से दूर रहना नहीं है, बल्कि दिमाग को भी काम से थोड़ा अलग करना जरूरी है। कई बार लोग छुट्टी में भी लगातार फोन देखते हैं, ईमेल चेक करते हैं या अगले सप्ताह के काम और डेडलाइन के बारे में सोचते रहते हैं। इससे मानसिक रूप से व्यक्ति काम से जुड़ा रहता है। इसके अलावा नई जगह घूमना, लगातार कई जगहों पर जाना और कम समय में ज्यादा गतिविधियां करना भी शरीर और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
Recovery क्यों जरूरी है?
मानसिक थकान से बाहर निकलने के लिए सिर्फ काम से छुट्टी लेना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि रिकवरी यानी शरीर और दिमाग को दोबारा ऊर्जा हासिल करने का समय देना भी जरूरी है। अगर व्यक्ति छुट्टी में भी लगातार घूमने-फिरने, स्क्रीन देखने या काम से जुड़ी चीजों में व्यस्त रहता है, तो दिमाग को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिल पाती। इसलिए लंबे समय से तनाव में रहने वाले व्यक्ति को छुट्टी के दौरान पर्याप्त नींद, आराम, काम से दूरी और बिना किसी दबाव के अपने लिए समय देना जरूरी है। कई बार कुछ दिनों की छुट्टी के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में नियमित आराम और काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी मानसिक थकावट कम करने में मदद कर सकता है।
छुट्टी के बाद थकान क्यों बढ़ सकती है?
- ऑफिस से घर आने के बाद भी दिमाग में ऑफिस ही चलता रहता है।
- आज बॉस ने ऐसा क्यों कहा?
- कल presentation कैसे होगी?
- मेरी deadline पूरी होगी या नहीं?
ये ऐसे सवाल हैं, जो इंसान के दिमाग में लगातार चलते रहते हैं। यानी व्यक्ति शारीरिक रूप से घर पर है, लेकिन उसका दिमाग अब भी ऑफिस और काम में उलझा हुआ है। मानसिक थकान से उबरने के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति कुछ समय के लिए खुद को काम से पूरी तरह अलग कर पाए। शोध के मुताबिक, काम से मानसिक दूरी बनाना शरीर और दिमाग को आराम देने और दोबारा ऊर्जा हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्या यह बर्नआउट हो सकता है? साइकोलोजिस्ट का नजरिया
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग, दिल्ली में डायरेक्टर ऑफ एकेडमिक, अदायु माइंडफुलनेस में हेड ऑफ डिपार्टमेंट और वरिष्ठ कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. विशाल छाबड़ा ने जनसत्ता को बताया लगातार काम का दबाव, आराम की कमी और मानसिक थकान बर्नआउट का कारण बन सकते हैं। बर्नआउट में व्यक्ति को काम के प्रति चिड़चिड़ापन, निराशा, भावनात्मक दूरी और किसी काम से खुशी न मिलने जैसी भावनाएं महसूस हो सकती हैं। हालांकि, बर्नआउट को सीधे डिप्रेशन नहीं कहा जा सकता।
अगर लंबे समय तक इसकी अनदेखी की जाए, तो यह चिंता या अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। लगातार बना रहने वाला तनाव यानी क्रॉनिक स्ट्रेस भी मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ा सकता है। अनियमित नींद, खराब खान-पान, लगातार स्क्रीन या डिवाइस का इस्तेमाल और काम से जुड़े तनाव के कारण दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। यहां तक कि मनोरंजन के लिए कंटेंट देखते समय भी हमारा दिमाग सक्रिय रहता है, इसलिए हर तरह की स्क्रीन एक्टिविटी को वास्तविक मानसिक आराम नहीं माना जा सकता।
बर्नआउट से बचने के लिए क्या करें?
डॉ. विशाल छाबड़ा ने बताया बर्नआउट और मानसिक थकान को कम करने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव जरूरी हैं। समय पर सोना और जागना, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज करना, काम के बीच छोटे ब्रेक लेना और लंच को काम करते-करते करने के बजाय आराम से करना मददगार हो सकता है। रात में सोने से पहले फोन और दूसरे डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाना भी जरूरी है।
छुट्टी को आराम देने वाली कैसे बनाएं?
छुट्टी के दौरान हर दिन कई जगहों पर घूमने और ज्यादा से ज्यादा गतिविधियां करने के बजाय कुछ समय आराम के लिए भी रखना चाहिए। यात्रा के दौरान पर्याप्त नींद लेना, हल्का खाना खाना और लौटने के बाद कम से कम आधा से एक दिन अपने सामान्य कामकाजी रूटीन में लौटने से पहले आराम करना मददगार हो सकता है। इससे ऑफिस लौटते समय शरीर और दिमाग को अचानक काम के दबाव में आने से बचाया जा सकता है।
काम और निजी जिंदगी में बैलेंस जरूरी
मानसिक थकान से बचने के लिए नौकरी छोड़ना समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाया जाए। ओवरवर्क से बचना, काम के दौरान छोटे ब्रेक लेना और ऑफिस के बाहर अपने दिमाग को काम से अलग करने का समय देना लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक काम के दबाव और मानसिक थकान को नजरअंदाज करता रहता है, तो वह अचानक इतना एग्जॉस्ट महसूस कर सकता है कि उसे नौकरी छोड़ देना ही सबसे आसान रास्ता लगने लगता है। इसलिए मानसिक थकान के शुरुआती संकेतों को पहचानना और रोजमर्रा की जिंदगी में नींद, आराम, शारीरिक गतिविधि और काम के बीच संतुलन पर ध्यान देना जरूरी
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, शैक्षणिक जानकारी और मनोचिकित्सक की राय पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical) या साइकियाट्रिक डायग्नोसिस का विकल्प न मानें। यदि आप लंबे समय से अत्यधिक मानसिक थकान, एंग्जायटी या अवसाद महसूस कर रहे हैं, तो किसी योग्य मनोचिकित्सक से परामर्श लें।
