आजकल महिलाओं में कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह दिक्कत उम्रदराज महिलाओं में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब युवा महिलाएं भी इससे परेशान हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियां, ऑफिस का काम, घंटों बैठकर काम करना और खुद की सेहत को नजरअंदाज करना, ये सभी कारण कमर दर्द को आम बना रहे हैं। कई बार महिलाएं दर्द को मामूली समझकर टाल देती हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या गंभीर भी हो सकती है। हालांकि अगर इसके कारण समझ लिए जाएं और सही उपाय अपनाए जाएं, तो कमर दर्द से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट से कि महिलाओं में कमर दर्द के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार होते हैं और इस समस्या से राहत पाने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।

हार्मोनल बदलाव

ग्रेटर नोएडा के Bliss आईवीएफ एंड गायनी केयर सेंटर की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सोनाली गुप्ता के मुताबिक, महिलाओं में कमर दर्द की एक बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव होते हैं। पीरियड्स के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बदलता रहता है। इस उतार-चढ़ाव की वजह से मांसपेशियों और लिगामेंट्स में खिंचाव आ सकता है। यही कारण है कि कई महिलाओं को पीरियड्स के समय कमर और पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है। कुछ महिलाओं में यह दर्द इतना ज्यादा होता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है।

प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद क्यों बढ़ता है दर्द?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई बदलाव होते हैं। बढ़ता हुआ वजन और शरीर का संतुलन बदलने से कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस दौरान ‘रिलैक्सिन’ नाम का एक हार्मोन निकलता है, जो जोड़ों को ढीला कर देता है ताकि डिलीवरी आसान हो सके। लेकिन इसी वजह से कमर दर्द की संभावना भी बढ़ जाती है। डिलीवरी के बाद अगर महिला को सही आराम और एक्सरसाइज न मिले, तो यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है। कई महिलाएं बच्चे की देखभाल में खुद की सेहत को पीछे छोड़ देती हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

गलत पोस्चर और भारी काम भी जिम्मेदार

डॉ. सोनाली गुप्ता बताती हैं कि रोजमर्रा की गलत आदतें भी कमर दर्द को बढ़ाती हैं। लंबे समय तक झुककर काम करना, गलत तरीके से बैठना, या भारी सामान उठाना रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डालता है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने वाली महिलाओं में कमर दर्द की शिकायत ज्यादा देखने को मिलती है। वहीं घर के कामों में बार-बार झाड़ू-पोंछा करना, कपड़े धोते समय झुकना और किचन में लगातार खड़े रहना भी कमर पर दबाव डालता है।

हड्डियों की कमजोरी से बढ़ती परेशानी

महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों की कमजोरी का खतरा ज्यादा होता है। खासकर मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होने लगती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। अगर शरीर में कैल्शियम और विटामिन D की कमी हो, तो यह समस्या और गंभीर हो जाती है। कमजोर हड्डियों की वजह से कमर दर्द लगातार बना रह सकता है और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

कमर दर्द से बचने के आसान उपाय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि महिलाएं कमर दर्द को हल्के में न लें। इससे बचाव के लिए रोजाना योग और हल्की एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है। भुजंगासन, ताड़ासन और पेल्विक एक्सरसाइज कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं। ऑफिस में काम करते समय सही पोस्चर में बैठें, कुर्सी और टेबल की ऊंचाई सही रखें और हर एक-दो घंटे में थोड़ा चल-फिर लें। घर के काम करते समय भी ज्यादा झुकने से बचें।

डाइट और आराम भी है जरूरी

हेल्दी डाइट कमर दर्द से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। खाने में दूध, दही, हरी सब्जियां, फल और नट्स शामिल करें ताकि शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और पोषण मिल सके। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कैल्शियम और विटामिन D की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स ले सकती हैं। इसके साथ ही पर्याप्त नींद और आराम भी बेहद जरूरी है, क्योंकि थका हुआ शरीर दर्द को और बढ़ा देता है।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है

अगर कमर दर्द लंबे समय तक बना रहे, दर्द बहुत ज्यादा हो या पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय रहते जांच कराने से किसी गंभीर बीमारी का पता लगाया जा सकता है और सही इलाज मिल सकता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, थोड़ी सी सावधानी, सही लाइफस्टाइल और समय पर इलाज से महिलाएं कमर दर्द की समस्या से काफी हद तक राहत पा सकती है। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें, क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही जीवन की हर जिम्मेदारी अच्छे से निभाई जा सकती है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

गुहेरी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। शुरुआत में आंख की पलक पर हल्की लालिमा और सूजन दिखाई देती है। इसके बाद दर्द, जलन, आंखों में भारीपन और कभी-कभी पानी आने की शिकायत हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।