हाल के वर्षों में कम उम्र और फिट दिखने वाले युवाओं में अचानक हार्ट अटैक आने के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। जिसे पहले बढ़ती उम्र या बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वो अब 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। क्या यह सिर्फ खराब लाइफस्टाइल का नतीजा है या इसके पीछे जेनेटिक्स और मानसिक तनाव जैसे बड़े कारण भी छिपे हैं? गंगा राम हॉस्पिटल से जुड़े हृदय रोग विशेषज्ञ Dr. M Wali (Cardiologist) ने बताया युवाओं में दिल का दौरा पड़ने के बढ़ते जोखिम के पीछे तीन सबसे बड़े कारक हाई ब्लड प्रेशर, लगातार तनाव (Chronic Stress) और प्रसंस्कृत (Processed) डाइट हैं।
आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक जागना, शारीरिक गतिविधि की कमी और जंक फूड का अत्यधिक सेवन शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ा देता है, जिससे धमनियों (Arteries) में रुकावट आने लगती है। इसके साथ ही, लंबे समय तक काम का मानसिक दबाव या तनाव शरीर में ‘कोर्टिसोल’ और ‘एड्रेनालाईन’ जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है, जो सीधे ब्लड प्रेशर को ट्रिगर करते हैं। जब अनियंत्रित बीपी और मानसिक तनाव एक साथ मिलते हैं, तो धमनियों पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे सडन कार्डिएक अरेस्ट या हार्ट अटैक की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि युवाओं में कम उम्र में ही क्यों बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा।
कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है हार्ट डिजीज का खतरा
डॉक्टर के मुताबिक अब हार्ट से जुड़ी समस्याएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। कम उम्र के लोगों में भी हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। कम उम्र में हार्ट अटैक के पीछे कई जोखिम कारक एक साथ काम कर सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर लगातार रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव डालता है, जबकि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में ऐसे हार्मोनल बदलाव कर सकता है जो ब्लड प्रेशर और दिल पर असर डालते हैं। दूसरी ओर, ज्यादा नमक, शुगर, ट्रांस फैट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड वाली अनहेल्दी डाइट मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर बढ़ने जैसे जोखिमों को बढ़ा सकती है।
जब हाई BP, लगातार तनाव, खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान या अन्य जोखिम कारक एक साथ मौजूद हों, तो कम उम्र में भी दिल के रोग और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। अच्छा खान-पान, नियमित व्यायाम और अपनी सेहत को लेकर जागरूक रहना अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए केवल वजन कम करना पर्याप्त नहीं है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक गतिविधि, तनाव और खान-पान जैसे कई कारकों पर एक साथ ध्यान देना जरूरी है।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए कैसे रहें अलर्ट
अचानक कार्डियक अरेस्ट में CPR की जानकारी जरूरी
डॉक्टर वली ने बताया सडन कार्डियक अरेस्ट में हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी है। डॉक्टर ने बताया हर इंसान को CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन की ट्रेनिंग स्कूलों, कॉलेजों और पुलिसकर्मियों समेत आम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। क्योंकि आपात स्थिति में आसपास मौजूद व्यक्ति की शुरुआती मदद जीवन बचाने में जरूरी हो सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
दिल के रोगों और हार्ट अटैक से बचाव करना है तो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।डॉक्टर ने बताया कि बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें ब्लड प्रेशर की समस्या है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है और हार्ट अटैक समेत कई गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है।
तनाव भी हार्ट हेल्थ के लिए बन सकता है खतरा
डॉक्टर ने मानसिक तनाव और हृदय स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध बताया। लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और हृदय संबंधी जोखिमों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन लंबे समय तक रहने वाले तनाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खानपान में संतुलन रखना जरूरी
हार्ट हेल्थ के लिए डॉक्टर ने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने नमक की मात्रा को लेकर सावधानी बरतने और अत्यधिक नमक के सेवन से बचने की सलाह दी। साथ ही रिफाइंड ऑयल और भोजन में इस्तेमाल होने वाली चीजों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की बात कही। वहीं देसी घी को पूरी तरह ‘विलेन’ मानने के बजाय उन्होंने इसे सीमित मात्रा में लेने की बात कही।
नॉन-स्टिक बर्तनों को रखें सावधानी
डॉक्टर ने बताया नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग खराब या स्क्रैच होने पर उन्हें इस्तेमाल नहीं करें। भोजन तैयार करने और स्टोर करने के लिए सुरक्षित बर्तनों का इस्तेमाल तथा माइक्रोप्लास्टिक के संभावित स्रोतों को कम करना दिल की सेहत के लिए जरूरी है।
प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह
आजकल जिम जाने वाले कई लोग अपनी तरफ से प्रोटीन पाउडर या दूसरे सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। डॉक्टर ने बताया केवल जिम ट्रेनर के कहने पर सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी सप्लीमेंट को नियमित रूप से शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।
पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज
डॉक्टर ने बताया पैरों में सूजन यानी एडेमा (Edema) को हृदय संबंधी बीमारी का संभावित संकेत बताया गया है। हालांकि पैरों में सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसे देखकर खुद से हार्ट डिजीज का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। अगर पैरों में लगातार या बार-बार सूजन हो, साथ में सांस फूलना, सीने में परेशानी या असामान्य थकान जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। हार्ट अटैक या किसी भी हृदय संबंधी समस्या के जोखिम का आकलन व्यक्ति की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर किया जाता है। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
