बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका एक बड़ा असर हमारे पेट की सेहत पर भी पड़ता है? हालिया वैज्ञानिक शोध और मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 45 की उम्र पार करते ही हमारे पाचन तंत्र में मौजूद ‘गुड बैक्टीरिया’ (गट माइक्रोबायोम) की संख्या तेजी से कम होने लगती है। यही कारण है कि इस उम्र के बाद गैस, अपच, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी समस्याएं अचानक बढ़ने लगती हैं। पेट को हमारे शरीर का दूसरा दिमाग कहा जाता है, इसलिए बढ़ती उम्र में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है। उम्र बढ़ने पर खराब खानपान की आदतें, शारीरिक गतिविधि, तनाव, दवाइयों का इस्तेमाल, सोने का तरीका और लंबे समय से चली आ रही बीमारियां भी पेट में मौजूद सूक्ष्मजीवों (माइक्रो ऑर्गेनिज्म) के संतुलन पर असर डाल सकती हैं।

कंसल्टेंट डायटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने बताया, 45 साल की उम्र के बाद आंतों में खासतौर पर बदलाव आने लगते हैं। इस उम्र में सूक्ष्मजीवों की विविधता कम हो जाती है, फेकली बैक्टीरियम और अकरमेंसिया जैसे गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और खराब बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आंतों में गुड बैक्टीरिया कम होने से पाचन पर कैसा असर होता है और इस परेशानी से कैसे निजात पाई जा सकती है।

आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया कैसे हेल्थ के लिए जरूरी है?

एक्सपर्ट के मुताबिक आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव शरीर में पोषक तत्वों को अवशोषित करने, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनाने, जो बड़ी आंत को ऊर्जा देते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक्सपर्ट ने बताया जब आंतों में गुड बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ जाता है तो पाचन क्रिया स्लो हो जाती है जिससे पाचन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। पाचन क्रिया धीमी होने पर पेट फूलने की समस्या, संक्रमणों से लड़ने की शरीर की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इतना ही नहीं गट माइक्रोबायोम का बैलेंस बिगड़ने पर मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है। इससे वजन कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, मल त्याग की आदतों और शरीर की ऊर्जा के स्तर में भी बदलाव महसूस हो सकता है।

एक्सपर्ट ने बताया ऐसी स्थिति में आंतों की सुरक्षा परत यानी गट बैरियर भी कमजोर होने लगता है, जिससे बैक्टीरिया द्वारा बनने वाले हानिकारक तत्व ब्लड में पहुंच सकते हैं जिसे लीकी गट कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में लगातार हल्की सूजन हो सकती है जिससे जोड़ों में दर्द, ब्रेन फॉग और मेटाबॉलिज्म स्लों होने जैसी दिक्कते होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ पेट में बनने वाले हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और पाचक एंजाइम का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे भोजन को टूटने में समय लगता है।

गट माइक्रोबायोम में बदलाव के कारण होने वाली समस्याएं

  • पाचन धीमा होना
  • पेट फूलना (ब्लोटिंग)
  • बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ना
  • वजन कंट्रोल करने में मुश्किल होना
  • मल त्याग की आदतों में बदलाव
  • ऊर्जा की कमी महसूस होना शामिल है।

गट माइक्रोबायोम के असंतुलन के लिए उम्र जिम्मेदार है या डाइट

कनिका मल्होत्रा ने बताया गट माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों में लगभग 30 प्रतिशत भूमिका उम्र बढ़ने की होती है, जबकि करीब 70 प्रतिशत बदलाव लाइफस्टाइल से जुड़े होते हैं। डाइट में  प्रोसेस्ड फूड, कम फाइबर वाला खाना और अधिक चीनी का सेवन गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकता हैं। आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए आप डाइट में सुधार करें। डाइट में साबुत अनाज, फल और सब्जियों का सेवन करें। संतुलित डाइट इस स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम कुछ ही हफ्तों में गुड बैक्टीरिया की संख्या बढ़ा सकता है। वहीं नींद की कमी, लगातार तनाव, एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल डायबिटीज या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी बीमारियां भी गट माइक्रोबायोम को प्रभावित करती हैं।

45 के बाद गट हेल्थ को कैसे रखें दुरुस्त ?

डॉक्टर कनिका ने बताया अगर आप बढ़ती उम्र में अपनी गट हेल्थ में सुधार करना चाहते हैं तो आप

  • रोजाना डाइट में 30-35 ग्राम फाइबर को शामिल करें।
  • भोजन में सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और सीड्स का सेवन करें।
  • डाइट में दही, इडली, डोसा और किमची जैसे फर्मेंटेड फूड का सेवन करें।
  • बेरीज, ग्रीन टी और हल्दी जैसे पॉलीफेनॉल से भरपूर फूड्स का सेवन करें।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड आंतों की सेहत के लिए खतरा है उन्हें डाइट से निकाल दें।  
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। वॉक एक कम पावर की बेहद असरदार एक्सरसाइज है इसे रोज करें।
  • योग और मेडिटेशन से तनाव कम करें।
  • रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें।
  • एंटीबायोटिक लेने की जरूरत पड़े तो डॉक्टर से प्रोबायोटिक के बारे में सलाह लें।
  • लहसुन, प्याज और केला जैसे प्रीबायोटिक फूड को डाइट में शामिल करें।
  • डॉक्टर कनिका के मुताबिक अगर आप बढ़ती उम्र में ही डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी इन आदतों को अपनाते हैं तो आपके गट माइक्रोबायोम में संतुलन बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी योग्य डॉक्टर, चिकित्सा विशेषज्ञ या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के व्यक्तिगत परामर्श, रोग-निदान (Diagnosis) या सटीक इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप पेट, पाचन या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं, तो किसी भी घरेलू उपाय या डाइट प्लान को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।