महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई ऐसे विषय हैं, जिन पर आज भी समाज में खुलकर बात नहीं होती और इसी वजह से कई तरह की भ्रांतियां (Myths) फैल जाती हैं। ऐसा ही एक संवेदनशील विषय है D&C (Dilation and Curettage), जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘बच्चेदानी की सफाई’ कहा जाता है। अक्सर गर्भपात (Miscarriage), अनचाहे गर्भ को हटाने या हैवी ब्लीडिंग जैसी स्थितियों में डॉक्टर इस प्रक्रिया को कराने की सलाह देते हैं। लेकिन महिलाओं के मन में इसे लेकर सबसे बड़ा डर यह होता है कि क्या डीएनसी कराने से भविष्य में मां बनने या फर्टिलिटी पर कोई बुरा असर पड़ता है?
Birla Fertility and IVF सेंटर में स्पेशलिस्ट और सेंटर हेड डॉक्टर मुस्कान छाबरा ने बताया बच्चेदानी की सफाई यानी D&C महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया है। मिसकैरेज , अबॉर्शन या गर्भाशय से जुड़ी दूसरी समस्याओं के बाद संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टर अक्सर D&C कराने की सलाह देते हैं। डॉक्टर मुस्कान ने बताया मिसकैरेज या अबॉर्शन को D&C नहीं कहा जाता। डॉक्टर ने बताया मिसकैरेज के बाद गर्भाशय में कुछ ऊतक रह जाएं, तो उन्हें निकालने के लिए D&C की जा सकती है।
किन बीमारियों की जांच के लिए D&C की जाती है?
D&C का उपयोग कई स्त्री रोग संबंधी समस्याओं की जांच के लिए किया जाता है। यदि महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही हो, मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव हो रहा हो या डॉक्टर को गर्भाशय की अंदरूनी परत का सैंपल (Biopsy) लेना हो, तब यह प्रक्रिया की जाती है। इससे गर्भाशय की लाइनिंग में किसी बीमारी, पॉलीप, असामान्य बदलाव या कैंसर जैसी गंभीर स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है।
क्या D&C केवल जांच है या इलाज भी?
D&C केवल जांच नहीं बल्कि कई स्थितियों में इलाज का भी हिस्सा है। उदाहरण के लिए, जिन महिलाओं में गर्भाशय की अंदरूनी परत जरूरत से ज्यादा मोटी हो जाती है और उसी वजह से अत्यधिक ब्लीडिंग होती है, उनमें अतिरिक्त लाइनिंग को हटाकर ब्लीडिंग को कंट्रोल किया जा सकता है। यानी यह प्रक्रिया डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट दोनों के लिए उपयोगी है।
D&C कैसे की जाती है?
यह प्रक्रिया आमतौर पर शॉर्ट जनरल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, इसलिए मरीज को दर्द महसूस नहीं होता। पहले सर्विक्स को धीरे-धीरे फैलाया जाता है, फिर “क्यूरेट” नामक उपकरण की मदद से गर्भाशय की अंदरूनी परत को निकालकर साफ किया जाता है। ये एक डे-केयर प्रोसीजर है। इसे पूरा होने में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं। अधिकतर मामलों में मरीज को उसी दिन छुट्टी दे दी जाती है और अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती।
क्या D&C महिलाओं के लिए जोखिम भरी प्रक्रिया है?
डॉक्टर का कहना है कि D&C आमतौर पर एक सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन किसी भी मेडिकल प्रोसीजर की तरह इसमें कुछ जोखिम हो सकते हैं। यदि यह किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा सही तकनीक से किया जाए तो जटिलताओं की संभावना काफी कम रहती है।
डीएनसी कराने से महिलाओं की फर्टिलिटी पर भी पड़ता है असर?
डॉक्टर मुस्कान छाबरा ने बताया अगर डीएनसी सामान्य परिस्थितियों में सही तकनीक और अनुभवी डॉक्टर द्वारा की जाए तो इससे फर्टिलिटी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। हालांकि अगर इस प्रक्रिया के दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम को गंभीर नुकसान पहुंच जाए, तो भविष्य में गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए यह प्रक्रिया केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही करानी चाहिए।
फर्टिलिटी किन चीजों पर निर्भर करती है?
विशेषज्ञ बताती हैं कि फर्टिलिटी मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है। पहली, पुरुष के स्पर्म और महिला के अंडाणु (Egg) की गुणवत्ता, जिनसे भ्रूण (Embryo) बनता है। दूसरी, गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम, जहां निषेचित अंडा जाकर चिपकता है और वहीं से गर्भ का विकास शुरू होता है। इसलिए एंडोमेट्रियम का स्वस्थ होना सफल गर्भधारण के लिए बेहद जरूरी है। D&C प्रक्रिया में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम की ऊपरी परत को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है। यह प्रक्रिया कुछ खास मेडिकल कंडीशन जैसे असामान्य ब्लीडिंग, गर्भपात के बाद बचे हुए ऊतकों को निकालने या जांच के लिए की जाती है।
क्या एंडोमेट्रियम दोबारा बन जाता है?
डॉक्टर के अनुसार एंडोमेट्रियम की खासियत यह है कि यह हर महीने हार्मोनल बदलावों के साथ दोबारा विकसित (Regenerate) होता है और पीरियड के दौरान इसकी ऊपरी परत निकल जाती है। यही वजह है कि सामान्य और सही तरीके से की गई D&C के बाद अधिकांश महिलाओं में यह परत फिर से सामान्य रूप से बन जाती है।
कब बढ़ सकता है फर्टिलिटी पर असर?
अगर D&C बहुत आक्रामक तरीके से की जाए या प्रक्रिया के दौरान एंडोमेट्रियम को गंभीर चोट पहुंच जाए, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत पूरी तरह ठीक नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में भ्रूण के गर्भाशय में सही तरीके से चिपकने और विकसित होने में कठिनाई हो सकती है, जिससे गर्भधारण प्रभावित हो सकता है। इस तरह महिला के लिए मां बनना मुश्किल हो सकता है।
क्या D&C के बाद दोबारा मां बनने में परेशानी हो सकती है?
डॉक्टर का कहना है कि यदि D&C के दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत को गंभीर नुकसान पहुंच जाए और एशरमैन सिंड्रोम जैसी जटिलता विकसित हो जाए, तो भविष्य में दोबारा गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, यह स्थिति सामान्य नहीं होती। सही तकनीक और उचित चिकित्सकीय देखरेख में की गई D&C से अधिकांश महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित नहीं होती।
D&C कराने के बाद क्या बॉडी में इसका कोई साइड इफेक्ट भी होते हैं?
इस प्रक्रिया के दौरान या बाद में कुछ मामलों में ब्लीडिंग, संक्रमण (Infection), गर्भाशय में छेद (Uterine Perforation) या आसपास के अंगों जैसे आंत (Gut) को चोट लगने का खतरा हो सकता है। यदि गर्भाशय की अंदरूनी परत को बहुत अधिक आक्रामक तरीके से हटाया जाए, तो भविष्य में गर्भधारण में दिक्कत भी हो सकती है।
D&C के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?
अधिकांश महिलाओं को D&C के बाद सामान्य होने में 4 से 5 दिन का समय लगता है। हालांकि, पूरी रिकवरी महिला की स्वास्थ्य स्थिति और प्रक्रिया के कारण पर निर्भर करती है।
डीएनसी के बाद किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि D&C के बाद बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, तेज पेट दर्द हो, तेज बुखार आए, चक्कर आने लगे या हाथ-पैर ठंडे पड़ जाएं, तो इसे सामान्य नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
D&C के बाद शारीरिक संबंध कब बनाने चाहिए?
डॉक्टर की सलाह है कि D&C के बाद जब तक सामान्य पीरियड दोबारा शुरू न हो जाए, तब तक शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और गर्भाशय को ठीक होने का समय मिलता है।
क्या D&C बहुत आम प्रक्रिया है?
डॉक्टर के अनुसार, D&C एक कॉमन और सुरक्षित प्रक्रिया है। इसे केवल जरूरत पड़ने पर किया जाता है और सही कारण तथा सही तकनीक के साथ कराने पर इसके फायदे जोखिमों से कहीं अधिक होते हैं। आजकल कई मामलों में D&C को हिस्टेरोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड गाइडेंस के साथ किया जाता है। इससे डॉक्टर गर्भाशय के अंदर की स्थिति को सीधे देख सकते हैं और प्रक्रिया अधिक सुरक्षित एवं सटीक तरीके से पूरी कर सकते हैं।
D&C से जुड़ी सबसे आम गलतफहमियां
क्या D&C के बाद पीरियड्स हमेशा अनियमित हो जाते हैं?
डॉक्टर का कहना है कि यह भी एक गलत धारणा है। पीरियड का नियमित या अनियमित होना मुख्य रूप से हार्मोन पर निर्भर करता है। यदि D&C सही तरीके से की गई है और गर्भाशय को नुकसान नहीं पहुंचा है, तो पीरियड्स सामान्य रहते हैं।
क्या D&C बहुत दर्दनाक प्रक्रिया है?
चूंकि यह प्रक्रिया एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, इसलिए मरीज को प्रक्रिया के दौरान दर्द महसूस नहीं होता। बाद में कुछ दिनों तक हल्का दर्द या असहजता हो सकती है, जिसे सामान्य माना जाता है।
क्या D&C के बाद पेट बढ़ जाता है?
डॉक्टर ने इसे पूरी तरह मिथक बताया। उनके अनुसार, गर्भाशय एक छोटा अंग है और D&C केवल उसकी अंदरूनी परत तक सीमित प्रक्रिया है। इसका पेट की चर्बी या शरीर के वजन बढ़ने से कोई संबंध नहीं है। पेट बढ़ने का कारण शरीर में फैट का बढ़ना होता है, D&C नहीं।
क्या D&C के बाद शरीर में सूजन आ जाती है?
डॉक्टर के अनुसार, D&C के कारण शरीर के अंदरूनी अंगों में सूजन आने या शरीर फूलने जैसी बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह भी एक आम गलतफहमी है।
D&C से जुड़ी सबसे जरूरी सलाह
विशेषज्ञ का कहना है कि D&C एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, लेकिन इसे केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही कराया जाना चाहिए। बार-बार D&C कराने से बचना चाहिए। यदि प्रक्रिया किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा सही तकनीक, आवश्यकता पड़ने पर हिस्टेरोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड की सहायता से की जाए, तो जटिलताओं का जोखिम काफी कम हो जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी को किसी भी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बच्चेदानी से जुड़ी किसी भी समस्या या D&C प्रक्रिया से पहले हमेशा अपनी गाइनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से व्यक्तिगत परामर्श और जांच अवश्य करवाएं।
