ताज़ा खबर
 

बच्चों को क्यों निकलते हैं टेढ़े-मेढ़े दांत? जानिये कारण और बचाव के उपाय

कुछ बच्चों को पढ़ाई करते वक्त मुंह में पेंसिल डालने की आदत होती है। हालांकि, इसके कारण भी बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं।

children teeth, dentist, crooked teeth in kidsबच्चों के क्यों निकलते हैं टेढ़े-मेढ़े दांत (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

दांत सुंदरता की निशानी होते हैं। अगर दांत सुंदर हों तो, तो इससे मुस्कान भी काफी खूबसूरत लगती हैं। हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चों के दांत सीधे और सफेद हों, लेकिन अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े होना शुरू हो जाते हैं। बच्चों में दांत छह महीने की उम्र से निकलना शुरू हो जाते हैं। यह दांत 6 साल की उम्र तक निकलते हैं, जिन्हें दूध के दांत कहा जाता है। इस दौरान ज्यादातर बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े होते हैं। वहीं, 13 साल की उम्र तक बच्चों के दूध के दांत टूटकर स्थायी दांत आने लगते हैं।

क्यों निकलते हैं बच्चों के टेढ़े-मेढ़े दांत: कुछ बच्चों को अंगूठा चूसने की आदत होती है। इस कारण उनके जबड़े में परिवर्तन आ जाता है, जिसके बाद उनके दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं। इस स्थिति को ओवरबाइट भी कहा जाता है।

सही समय पर दूध के दांतों का ना गिरना: अगर दूध के दांत ठीक समय पर ना टूटें, तो इसके कारण भी बच्चों के स्थायी दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं। इसके अलावा जो बच्चे लंबे समय तक बोतल से दूध पीते हैं, उनके दातों के आकार में भी परिवर्तन आ सकता है।

कुछ बच्चे अपने नाखूनों को चबाते हैं, जिसके कारण भी उनके जब स्थायी दांत निकलते हैं, तो वह टेढ़े-मेढ़े होते हैं। वहीं, कभी-कभी अनुवांशिकता के कारण भी बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं।

मुंह में पेंसिल डालना: कुछ बच्चों को पढ़ाई करते वक्त मुंह में पेंसिल डालने की आदत होती है। हालांकि, इसके कारण भी बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं। क्योंकि, जब उनके दांत निकल रहे होते हैं, तब दांत की हड्डी भी बन रही होती है।

बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े निकलने से बचाने के उपाय: बचपन में शिशुओं का अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। क्योंकि, इसी दौरान बच्चे के शरीर के साथ ही उसका दिमाग भी विकसित होता है। ऐसे में उनका ध्यान रखना काफी महत्वपूर्ण होता है। बच्चों के टेढ़े-मेढ़े दांत निकलने से बचाने के लिए उन्हें अंगूठा पीने से रोकना चाहिए। साथ ही उनको अच्छी तरह से ब्रश करवाना चाहिए।

माताओं को ध्यान रखना चाहिए की वह लंबे समय तक बच्चे को बोतल से दूध ना पिलाएं। इसके अलावा 3 साल की उम्र से बड़े बच्चों को पेसिफायर नहीं देना चाहिए। साथ ही समय-समय पर डेनटिस्ट से भी चेकअप करवाते रहना चाहिए।

 

 

Next Stories
1 Uric Acid के मरीजों के लिए कौन सी दाल बेहतर? जानिये- कौन-कौन से फूड्स करते हैं यूरिक एसिड कंट्रोल
2 बढ़ा हुआ है ब्लड शुगर तो कैसा हो खानपान? ये फूड्स Blood Sugar कंट्रोल करने में हैं मददगार
3 तेज गति से फैल रहा कोरोना, चार सप्ताह अहम : सरकार
क्लब हाउस चैट लीक:
X