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क्यों बंद हो जाती हैं छींकते वक्त पलकें? यहां जानिए जवाब

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक एक महिला आंखें खोलकर छींक रही थी और उसकी आंखें बाहर आ गई थीं।

छींक रोकने की वजह से जान जाने तक का खतरा रहता है।

बचपन में बड़े-बुजुर्गों से आपने कई बार यह कहते सुना होगा कि छींकते समय आंखें बंद रखा करो, नहीं तो आंखें बाहर आ जाएंगी। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक एक महिला आंखें खोलकर छींक रही थी और उसकी आंखें बाहर आ गई थीं। अब आपको लग रहा होगा कि सच में आंखें खोलकर छींकने से आपकी आंख बाहर आ सकती है। लेकिन यह सच नहीं है। दरअसल, उस महिला की नेत्र कोशिकाओं में कुछ समस्या थी, जिस वजह से ऐसा हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि छींकते समय हमारे फेफड़ों द्वारा लगाया गया दबाव इतना ज्यादा नहीं होता कि आंखें बाहर निकल आएं। और अगर आंखें बाहर आती भी हों तो उन्हें रोकने के लिए पलकों का बंद होना ही काफी ही है। मतलब पलकों के बंद होने और आंखों के बाहर निकल आने के बीच कोई तार्किक संबंध नहीं है। ऐसे में, छींकते समय पलकों के बंद होने के पीछे क्या कारण हो सकता है? आइए, आज इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

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क्यों आती है छींक – सबसे पहले यह जान लेते हैं कि छींक आती क्यों है। दरअसल, छींक हमारे श्वसन मार्ग को साफ बनाए रखने की एक प्रक्रिया होती है। जब भी किसी तरह का अवरोध जैसे- धूल, महीने रेशे आदि सांस नली में अटक जाते हैं तब दिमाग की ट्राइजेमिनल तंत्रिका मस्तिष्क को संदेश भेजती है। इसकी प्रतिक्रिया में फेफड़े ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन इकट्ठा करते हैं और उसे जोर से बाहर निकालते हैं। इसी हवा के साथ अवरोध सांस नली से बाहर चला जाता है।

क्यों बंद हो जाती हैं पलकें – छींक आने से पहले हमारा शरीर खुद को इसके लिए तैयार कर लेता है। इस दौरान छाती की मसल्स टाइट हो जाती हैं। दरअसल, छींक के लिए जिम्मेदार ट्राइजेमिनल तंत्रिका का नियंत्रण आंखों, नाक, मुंह और जबड़े पर भी होता है। इसी वजह से छींक आने के दौरान इन सभी अंगों के मसल्स पर प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप हमारी पलकें बंद हो जाती हैं। इसके अलावा आंखों को जर्म्स के संपर्क में आने से बचाव को भी छींकते वक्त पलकों के बंद हो जाने का कारण माना जाता है। ऐसे में यह तो स्पष्ट है कि आंखों को बाहर आने से बचाने के लिए पलकें बंद नहीं होती हैं। इसलिए, आप इससे डरना बंद कर दें।

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