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लॉकडाउन हटाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी, जानिये WHO ने क्या कहा…

WHO on Coronavirus: जब तक कोरोना वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन नहीं बन जाती है तब तक इससे बचने के अलग-अलग उपायों को अपनाना जरूरी है

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेडरोस अदनहोम।

WHO on Coronavirus: कोरोना वायरस का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है, इसके प्रकोप को कम करने के लिए दुनिया भर के कई देशों ने लॉकडाउन घोषित किया था। भारत में भी लगभग पिछले डेढ़ महीने से कंप्लीट लॉकडाउन चल रहा है। हालांकि, अब धीरे-धीरे एमरजेंसी सर्विसेज को दोबारा खोला जाने लगा है। वहीं, कई अन्य देशों ने भी इस घातक वायरस के कारण लगाई गई पाबंदियों को हटाना शुरू कर दिया है। जर्मनी और साउथ कोरिया जैसे देश जहां इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में कमी देखने को मिली थी, वहां लॉकडाउन खुलने के बाद कई नये मामले सामने आने लगे। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ऐसे देशों को अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी है जो इस समय लॉकडाउन हटाने पर विचार कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है WHO का कहना-

अत्यधिक सतर्कता की है जरूरत: WHO के आपात कार्यक्रम के प्रमुख डॉ. माइक रयान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कई देश अब इस लॉकडाउन खत्म करने या इसमें छूट देने का विचार कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए अत्यधिक सतर्कता की आवश्यकता है। उनका कहना है कि अगर बीमारी छोटे स्तर पर भी हो और इस वायरस के क्लस्टर्स को आइडेंटिफाई करने की क्षमता नहीं होने पर दोबारा इस वायरस के फैलने की आशंका अधिक हो जाती है। वैसे देश जो इस घातक वायरस के प्रकोप को रोकने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए लॉकडाउन हटाने का फैसला खतरनाक हो सकता है।

लॉकडाउन खोलना मुश्किल और कॉम्प्लेक्स: माइक रयान के अलावा, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रयेसस ने कहा कि अभी लॉकडाउन को पूरी तरह से हटाना मुश्किल और कठिन है। हालांकि, इसे धीरे-धीरे और लगातार हटाना कारगर साबित होगा। उनके अनुसार ऐसा करने से जान और रोजगार दोनों बचाए जा सकते हैं। पाबंदियां हटाने के बाद संक्रमण की दूसरी लहर देख रहे जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के पास कोरोना वायरस से निपटने के उपाय मौजूद हैं जिस कारण वो वायरस के दूसरे क्लसटर्स को रोकने में कारगर होंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठने के अधिकारियों ने इन दोनों ही देशों द्वारा किए गए सर्विलांस की सराहना की।

टीका बनने से पहले लापरवाही हो सकती है घातक: उनके अनुसार जब तक कोरोना वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन नहीं बन जाती है तब तक इससे बचने के अलग-अलग उपायों को अपनाने से ही इस वायरस को फैलने से कम किया जा सकता है। ऐसे में दुनिया के सामने उन देशों का उदाहरण सामने रखना जरूरी है जो सतर्क रह कर पाबंदियां हटाना चाह रहे हैं। इससे कई ऐसे देशों को सीख मिलेगी जो आंखें बंद करके इस बीमारी से बचने की कोशिश में हैं।

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