दुनिया भर में गैर-संचारी बीमारियां (non communicable diseases) लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब ये मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं। World Health Organization (WHO) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में हर चार में से तीन मौतें इन्हीं गैर संचारी बीमारियों की वजह से हो रही हैं। हर साल लगभग 4.3 करोड़ लोगों की जान इन बीमारियों की वजह से जाती है, जो कुल मौतों का 71–75% है। भारत में यह आंकड़ा 60% से भी अधिक है।

WHO के मुताबिक चार बीमारियां सबसे ज्यादा घातक

WHO के अनुसार इन मौतों के पीछे मुख्य रूप से चार बीमारियां जिम्मेदार हैं जिसमें दिल से जुड़ी बीमारियां यानी हार्ट अटैक और स्ट्रोक, कैंसर, क्रॉनिक सांस संबंधी बीमारियां और डायबिटीज है। एक्सपर्ट का मानना है कि अब ये बीमारियां सिर्फ अमीर देशों तक सीमित नहीं रहीं, समय से पहले होने वाली 80% से ज्यादा मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हो रही हैं।

WHO ने कहा शहरी लोगों को निभानी होगी बड़ी जिम्मेदारी

WHO के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एटियेन क्रुग का कहना है कि नॉन कम्युनिकेबल डिजीज से बचाव संभव है, लेकिन इसके लिए शहरी लोगों को जरूरी बदलाव करना होगा। रियो डी जेनेरियो में आयोजित वर्ल्ड हेल्दी सिटीज समिट के दौरान उन्होंने कहा कि हर शहर के पब्लिक हेल्थ सिस्टम में बीमारी की  रोकथाम को अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी अब शहरों में रहती है और 2050 तक यह 70% तक पहुंच जाएगी। ऐसे में मेयर और स्थानीय प्रशासन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

लाइफस्टाइल से बढ़ रहा है नॉन कम्युनिकेबल बीमारियों का खतरा

डॉ. क्रुग के मुताबिक, पहले बीमारियों का बोझ संक्रामक रोगों पर था, लेकिन अब तेजी से  नॉन कम्युनिकेबल बीमारियों की ओर शिफ्ट हो रहा है। तंबाकू, शराब का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता इसके सबसे बड़े कारण हैं। तंबाकू आज भी हर साल करीब 70 लाख लोगों की जान लेता है। शहरी क्षेत्रों में लोग प्रदूषण, अस्वस्थ खानपान और असुरक्षित सड़कों जैसे जोखिम कारकों के ज्यादा संपर्क में रहते हैं।

खराब खान-पान और प्रोडक्ट मार्केटिंग भी जिम्मेदार

WHO एक्सपर्ट के मुताबिक लोग बीमारियों के जोखिम को समझते नहीं है साथ ही प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने वाली कंपनियां भी बीमारियों को फैला रही हैं। प्राइवेट कंपनियां युवाओं को तंबाकू, जंक फूड और शराब की ओर आकर्षित करती हैं जिससे युवाओं में इन हार्मफुल प्रोडक्ट की खपत ज्यादा हो रही है।  इसलिए जरूरी है कि सरकारें फूड पॉलिसी को सख्ती से लागू करें और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोडक्ट पर पाबंदी लगाई जाए।

भारत के लिए क्या है चुनौती?

डॉ. क्रुग ने कहा भारत में लोग सही समय पर सही कदम उठाकर इन बीमारियों को काफी हद तक रोक सकते हैं। उन्होंने स्कूलों में शुगर बोर्ड जैसे कदमों और न्यूट्रिशन पॉलिसी की सराहना की। क्रुग ने दूसरे देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि लंदन में जंक फूड विज्ञापनों पर रोक और ब्राजील-अर्जेंटीना में स्कूलों से जंक फूड हटाने जैसे कदमों से बच्चों की सेहत में सुधार देखा गया है।

सुरक्षित सड़कें और एक्टिव लाइफस्टाइल जरूरी

WHO ने कहा भारत में क्रॉनिक बीमारियों से बचाव के लिए सड़कों पर ध्यान देना भी जरूरी है। सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या हैं, जो न सिर्फ जान लेती हैं बल्कि लोगों की फिजिकल एक्टिविटी को भी कम करती हैं। इसलिए शहरों में वॉकिंग स्पेस, साइक्लिंग ट्रैक और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट जरूरी हैं। WHO अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के साथ तंबाकू कंट्रोल और फिजिकल एक्टिविटी को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने सुझाव दिया कि तंबाकू, शराब और शुगर ड्रिंक्स पर टैक्स बढ़ाया जाए और रोकथाम को सिस्टम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का कहना है कि गैर-संचारी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सही नीतियों, जागरूकता और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार, शहर प्रशासन और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट या जीवनशैली में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या किसी प्रमाणित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।