आज की महिलाएं हर मोर्चे पर जिम्मेदारी निभा रही हैं। नौकरी, घर-परिवार, बच्चों की परवरिश और सामाजिक दायित्व, इन सबके बीच अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को सबसे पीछे छोड़ देती हैं। छोटी-मोटी परेशानी हो तो उसे नजरअंदाज कर देना आम बात हो गई है। लेकिन डॉक्टरों की मानें तो यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों, खासकर कैंसर, का कारण बन सकती है। खासतौर पर 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर जांच यानी स्क्रीनिंग ही सबसे बड़ा बचाव है।
क्यों जरूरी है 40 के बाद स्क्रीनिंग?
40 की उम्र के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आता है। कई बीमारियां बिना किसी खास लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती रहती हैं। जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी गंभीर हो चुकी होती है। कैंसर भी ऐसी ही बीमारी है। अगर इसकी पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इलाज आसान और सफल हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिलाओं को लक्षण दिखने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि नियमित जांच करानी चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर
नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित एक्शन कैंसर हॉस्पिटल की गायनी एंड ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सारिका गुप्ता के अनुसार, महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है। 40 साल के बाद हर महिला को साल में एक बार मैमोग्राफी जरूर करानी चाहिए। यह जांच ब्रेस्ट में गांठ बनने से पहले ही होने वाले बदलावों को पकड़ लेती है। अगर परिवार में किसी महिला को पहले ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, तो यह जांच और भी जरूरी हो जाती है। इसके साथ ही डॉक्टर द्वारा क्लीनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन और खुद से ब्रेस्ट की जांच (सेल्फ एग्जामिनेशन) भी करनी चाहिए। ब्रेस्ट में गांठ, दर्द, आकार में बदलाव या निप्पल से किसी तरह का डिस्चार्ज दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में पाया जाने वाला एक आम कैंसर है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे समय पर जांच से पूरी तरह रोका जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, 40 की उम्र के बाद महिलाओं को हर 3 से 5 साल में पैप स्मीयर टेस्ट और HPV टेस्ट जरूर कराना चाहिए। ये दोनों जांच गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती बदलावों को पहचान लेती हैं। अगर समय रहते इन बदलावों का इलाज हो जाए, तो कैंसर बनने से पहले ही बीमारी को रोका जा सकता है। यह जांच ज्यादा समय नहीं लेती और बिल्कुल सुरक्षित होती है।
आंत का कैंसर भी है खतरे में
40 की उम्र के बाद कोलोरेक्टल यानी आंत के कैंसर का खतरा भी बढ़ने लगता है। इसके लिए डॉक्टर स्टूल टेस्ट, कोलोनोस्कोपी या अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। आंत के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते, लेकिन समय पर जांच से इस बीमारी को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।
हड्डियों और दिल की सेहत भी उतनी ही जरूरी
कैंसर के साथ-साथ 40 के बाद महिलाओं को हड्डियों और दिल की सेहत पर भी खास ध्यान देना चाहिए। बोन डेंसिटी टेस्ट से यह पता चलता है कि कहीं हड्डियां कमजोर तो नहीं हो रही हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या महिलाओं में इस उम्र के बाद तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच से दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा समय रहते पता चल सकता है। ये बीमारियां न सिर्फ खुद खतरनाक हैं, बल्कि कैंसर के इलाज को भी जटिल बना सकती हैं।
कैंसर स्पेशलिस्ट का कहना है कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि सही जीवनशैली भी बेहद जरूरी है। संतुलित आहार लें, हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं, नियमित व्यायाम करें और वजन कंट्रोल में रखें। तंबाकू और शराब से दूरी बनाना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।
निष्कर्ष
अक्सर महिलाएं जांच कराने से डरती हैं या टालती रहती हैं। लेकिन याद रखें, स्क्रीनिंग डरने की नहीं बल्कि खुद को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है। समय पर जांच से न सिर्फ कैंसर, बल्कि कई दूसरी गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
