आजकल पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ रहा है। पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, अपच, कब्ज, दस्त या बार-बार पेट भारी लगना जैसी दिक्कतें अब आम हो गई हैं। अक्सर लोग इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या खुद से दवाइयां लेने लगते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर पेट की परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। ऐसे में समय पर सही जांच कराना बहुत जरूरी हो जाता है।

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा के मुताबिक, पेट से जुड़ी किसी भी बीमारी में सबसे पहले मरीज के लक्षणों को समझा जाता है। हर व्यक्ति की परेशानी अलग होती है, इसलिए सभी के लिए एक जैसा टेस्ट जरूरी नहीं होता। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही जांच की सलाह देते हैं, ताकि बीमारी की सही वजह सामने आ सके।

बार-बार गैस और एसिडिटी हो तो एंडोस्कोपी

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, खट्टी डकारें या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द रहता है, तो डॉक्टर एंडोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं। एंडोस्कोपी में एक पतली और लचीली नली के जरिए पेट के अंदर की सतह को देखा जाता है। इससे पेट में अल्सर, सूजन, एसिड रिफ्लक्स या किसी इंफेक्शन का पता आसानी से चल जाता है। यह जांच डॉक्टर को सही इलाज तय करने में मदद करती है।

दस्त, कब्ज या खून आने पर कोलोनोस्कोपी जरूरी

डॉ. अरोड़ा बताते हैं कि अगर किसी मरीज को लंबे समय से दस्त या कब्ज की शिकायत हो, मल के साथ खून आता हो या अचानक वजन कम हो रहा हो, तो ऐसे मामलों में कोलोनोस्कोपी कराई जाती है। कोलोनोस्कोपी के जरिए बड़ी आंत यानी कोलन की जांच की जाती है। इससे आंतों में सूजन, घाव, पॉलीप्स या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान हो सकती है। खासतौर पर 40 साल की उम्र के बाद या अगर परिवार में किसी को आंतों से जुड़ी बीमारी रही हो, तो यह जांच और भी जरूरी हो जाती है।

ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट

कई बार पेट दर्द के साथ बुखार, उल्टी, कमजोरी या इंफेक्शन के लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में डॉक्टर ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। ब्लड टेस्ट से शरीर में इंफेक्शन, खून की कमी (एनीमिया) या लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत मिलता है। वहीं स्टूल टेस्ट से पेट में कीड़े, बैक्टीरियल इंफेक्शन या आंतों से खून जाने जैसी दिक्कतों का पता लगाया जा सकता है। ये जांच पेट की शुरुआती समस्याओं को समय रहते पकड़ने में बहुत मददगार होती है।

अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कब कराना चाहिए

अगर पेट दर्द के साथ सूजन, गांठ या लिवर, पित्ताशय (गॉलब्लैडर) और अग्न्याशय से जुड़ी परेशानी का शक हो, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन कराने की सलाह देते हैं। अल्ट्रासाउंड एक आसान, सुरक्षित और दर्द रहित जांच है, जिससे पेट के अंदरूनी अंगों की स्थिति देखी जाती है। वहीं सीटी स्कैन ज्यादा विस्तृत जानकारी देता है और जटिल मामलों में बीमारी की गहराई तक पहुंचने में मदद करता है।

खुद से टेस्ट या दवा लेने से बचें

डॉक्टर अरोड़ा का साफ कहना है कि पेट की किसी भी समस्या में खुद से टेस्ट कराने या दवाइयां लेने से बचना चाहिए। गलत जांच या गलत दवा से परेशानी बढ़ भी सकती है। हर मरीज के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी कदम उठाना सही नहीं है।

निष्कर्ष

पेट की समस्याओं को अगर शुरुआत में ही पहचान लिया जाए, तो उनका इलाज आसान हो जाता है। सही समय पर की गई जांच न सिर्फ दर्द और तकलीफ से राहत दिलाती है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को भी शुरुआती स्टेज में पकड़ने में मदद करती है। इसलिए अगर पेट से जुड़ी परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, तो उसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से सलाह लें, सही जांच कराएं और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।