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भूरे हो चुके केले में होता है सबसे ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट, मैच्योरिटी के हिसाब से अलग-अलग होते हैं केलों के फायदे

केले में तकरीबन 100 कैलोरी पाई जाती है। सेहत दुरुस्त रखने के लिए इसका सेवन तो किया ही जाता है, साथ ही यह कई तरह की बीमारियों का इलाज भी होता है।

स्वस्थ रहने के लिए रोजाना 2 केले जरुर खाएं।

केले में तकरीबन 100 कैलोरी पाई जाती है। सेहत दुरुस्त रखने के लिए इसका सेवन तो किया ही जाता है, साथ ही यह कई तरह की बीमारियों का इलाज भी होता है। वजन कम करने, कब्ज से राहत पाने, पाचन तंत्र दुरुस्त रखने, शुगर के उपचार में आदि कई बीमारियों में केला बेहद लाभदायक होता है। ‘परफेक्ट’ केले को लेकर लोगों में अलग-अलग तरह के कॉन्सेप्ट होते हैं। पीले रंग के केले, काले-काले दाग वाले केले या हरे-पीले केले अलग अलग तरह से फलदायी होते हैं। केले की परिपक्वता के हिसाब से उसके अलग-अलग सेहत संबंधी फायदे होते हैं। चलिए, रंगों के हिसाब से केले के फायदे और नुकसान से संबंधित आपके भ्रम को दूर करने की कोशिश करते हैं।

1. हरा केला – हरे रंग का केला हाई रेजिस्टैंट स्टार्च से भरपूर होता है। अगर आप हाई शुगर कंटेंट वाले फूड्स से परहेज करना चाहते हैं तो हरा केला आपके लिए सबसे बेहतर ऑप्शन है। इसमें बहुत कम मात्रा में शुगर होता है। ऐसे में यह स्वादिष्ट तो नहीं हो सकता लेकिन कई सेहत संबंधी फायदों का भंडार होता है। यह पाचन प्रक्रिया के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

2. पीला केला – बहुत से लोग पूरी तरह से पीले केले को ही परफेक्ट केला मानते हैं। यह मीठा और मुलायम होता है। इसे पचाने में भी आसानी होती है। हरे केले का रेजिस्टैंट स्टॉर्च पीले केले में शुगर में बदल जाता है। इसमें हरे केले से ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। ग्लाइकेमिक इंडेक्स की मात्रा ज्यादा होने की वजह से टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों को पके पीले केले से परहेज करना चाहिए।

3. काले दाग वाले केले – पके केले पर काले दाग का मतलब है कि केले में मौजूद सभी स्टॉर्च शुगर में बदल गए हैं। ये दाग जितने अधिक होंगे केला उतना ही मीठा होगा। ऐसे केले इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करते हैं। इसमें भी एंटी-ऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं। ये केले आपको कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी बचाने में मददगार होते हैं।

4. भूरे केले – भूरे या काले हो चुके केलों को हम अक्सर खराब समझकर फेंक देते हैं। ये केले एंटी-ऑक्सीडेंट्स के पावरहाउस कहे जाते हैं। इसमें सभी केलों के मुकाबले सबसे ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। चूंकि, भूरे केलों में सभी स्टॉर्च टूटकर शुगर में बदल चुके होते हैं। ऐसे में डायबिटीज के रोगियों को इनसे परहेज करना चाहिए।

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