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Random ब्लड शुगर क्या होता है? जानें कैसे पाएं इस पर कंट्रोल

Random Blood Glucose Test: डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को शरीर में आने वाले बदलावों पर ध्यान देते रहना चाहिए

डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में बार-बार यूरिनेशन और प्यास शामिल है

Random Blood Sugar Level: जब शरीर में इंसुलिन हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता है या फिर उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस स्थिति को हाइपरग्लाइसेमिया यानी हाई ब्लड शुगर कहते हैं। शुगर लेवल बढ़ने से डायबिटीज का खतरा भी अधिक होता है। खराब खानपान, स्ट्रेस, शारीरिक सक्रियता की कमी और अनियमित दिनचर्या के कारण भी रक्त शर्करा का स्तर घट-बढ़ सकता है।

डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में बार-बार यूरिनेशन और प्यास शामिल है। इसके अलावा, वजन में गिरावट, धुंधलापन, अत्यधिक थकान, हाथ-पैर में झनझनाहट और घाव भरने में समय लगना भी शुगर लेवल बढ़ने का संकेत हो सकता है।

क्या है रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट: शरीर में रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रहे इसलिए नियमित रूप से हर कुछ दिनों के अंतराल पर ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहना चाहिए। ग्लूकोज टेस्टिंग के अंतर्गत रैंडम ब्लड टेस्ट आता है।

इसमें शुगर लेवल चेक करने के लिए उंगली में हल्की सी सुई चुभोएं और जब कुछ मात्रा में ब्लड निकले तो उसे ग्लूकोज रीडिंग करने वाले टेस्ट स्ट्रिप पर डालें। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रैंडम ग्लूकोज टेस्टिंग के जरिये डायबिटीज के मरीजों के शुगर लेवल पर निगरानी रहेगी।

रैंडम टेस्ट करने का समय नॉर्मल टेस्ट शेड्यूल से अलग होता है। डायबिटीज मनेजमेंट के लिए ये टेस्ट बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर रैंडम ग्लूकोज लेवल नियंत्रण में है तो इसका अर्थ है कि मधुमेह रोग को काबू में रखने के लिए लोग जो प्रयास कर रहे हैं वो सफल हो रहे हैं। वहीं, यदि इसका स्तर अधिक है तो आपको जीवन शैली में बदलाव लाने की जरूरत है।

कब टेस्ट कराएं: डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को शरीर में आने वाले बदलावों पर ध्यान देते रहना चाहिए। रैंडम शुगर टेस्ट हाइपरग्लाइसेमिया और लो रक्त शर्करा का स्तर पता करता है। इससे क्रॉनिक कॉम्प्लिकेशन का खतरा कम होता है। इसे दिन के किसी वक्त जांच करते रहना चाहिए।

रैंडम ग्लूकोज और एक्सरसाइज: हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रैंडम ग्लूकोज टेस्ट रिजल्ट को व्यायाम प्रभावित करते हैं। आमतौर पर एक्सरसाइज करने से ग्लूकोज का स्तर शरीर में कम होता है। ये बॉडी को इंसुलिन के प्रति सेंसेटिव बनाता है।

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