सर्दियों के मौसम में खट्टे-मीठे फलों की बहार होती है और किन्नू (Kinnow) इनमें सबसे लोकप्रिय है। लेकिन जब बात डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों की आती है, तो उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इस फल का सेवन ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है? अपोलो हॉस्पिटल्स में प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका मलिक ने बताया कि डायबिटीज मरीज किन्नू का सेवन कर सकते हैं। हालिया रिसर्च बताती हैं कि किसी भी फल का प्रभाव उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) पर निर्भर करता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स ये बताता है कि कोई भी फूड खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को कितनी तेजी से बढ़ाता है। कम GI वाले फूड्स ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं, जबकि हाई GI वाले फूड्स शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकते हैं। किन्नू, संतरे और मंदारिन का एक Hybrid रूप है, जो विटामिन-C और फाइबर से भरपूर होता है। अब सवाल ये उठता है कि स्वाद में खट्टा-मीठा ये फल क्या डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित है? आइए विस्तार से समझते हैं कि किन्नू का ग्लाइसेमिक स्कोर क्या है और शुगर के मरीजों को इसे खाते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।

 किन्नू का ग्लाइकेमिक इंडेक्स (Glycemic Index)

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार डायबिटीज के मरीज किन्नू खा सकते हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। डायबिटीज में किसी भी फल की सुरक्षा उसके GI स्कोर से तय होती है। किन्नू का ग्लाइकेमिक इंडेक्स 40 से 50 के बीच होता है जिसे लो ग्लाइकेमिक (Low GI) की श्रेणी में रखा जाता है। इस फल को खाने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल एकदम से नहीं बढ़ता बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए ये फल डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित माना जाता है। आपको बता दें कि किसी भी फूड का 55 से कम GI को सुरक्षित माना जाता है।

किन्नू में मौजूद फाइबर और विटामिन सी है असरदार

किन्नू में फाइबर (Pectin) की मात्रा काफी अच्छी होती है। फाइबर पाचन की गति को धीमा कर देता है, जिससे शुगर खून में धीरे-धीरे रिलीज होती है। ये इंसुलिन रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने में मदद करता है। Diabetes Care जर्नल में छपी रिसर्च बताती है कि किन्नू में मौजूद सॉल्युबल फाइबर कार्बोहाइड्रेट के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा कर देता है। इससे खाने के बाद शुगर लेवल में होने वाली अचानक वृद्धि रुक जाती है।

 इस फल में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो डायबिटीज मरीजों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।  किन्नू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। Journal of Agricultural and Food Chemistry में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक ये फल फ्लेवोनोइड्स इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता हैं। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का उपयोग बेहतर तरीके से कर पाती हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है।

डायबिटीज मरीज कैसे करें किन्नू का सेवन?

डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने के लिए एक दिन में एक मध्यम आकार का किन्नू खा  सकते हैं। एक किन्नू का सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित है। डायबिटीज मरीज इसे मिड-मॉर्निंग स्नैक के रूप में खा सकते हैं। रात के समय या भारी भोजन के तुरंत बाद किन्नू न खाएं।

किन्नू के जूस से करें परहेज

पैकेट बंद जूस या घर पर निकला हुआ साफ जूस न पिएं, क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है जो ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ा सकती है। डायबिटीज के मरीजों को हमेशा किन्नू का जूस पीने के बजाय उसे खाना चाहिए, क्योंकि जूस निकालने से फाइबर खत्म हो जाता है और शुगर तेजी से बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमर

डायबिटीज की स्थिति हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है, इसलिए डाइट में किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।