हेल्दी नाश्ते का नाम आते ही सबसे पहले ओट्स का ख्याल आता है। मेडिकल साइंस भी इसे नाश्ते के लिए एक पौष्टिक विकल्प मानती है। ओट्स एक साबुत अनाज है, जिसका सेवन लोग आमतौर पर दूध, दही या उबालकर करते हैं। इसमें फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। ओट्स का सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व और ऊर्जा देने में भी मदद करता है।
ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रो साइंसेज के डायरेक्टर और डिपार्टमेंट हेड, डॉ. शुभम वत्स्या के अनुसार रात भर भिगोए हुए ओट्स हेल्दी ब्रेकफास्ट का अहम हिस्सा है। इन्हें पहले से तैयार करना आसान होता है, ये लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और अपनी पसंद के अनुसार इनमें कई पौष्टिक चीजें मिलाई जा सकती हैं। अब सवाल ये उठता है कि अगर रोजाना एक महीने तक ओट्स को भिगोकर उसका सेवन किया जाए तो सेहत पर कैसा असर होता है।
एक महीने तक रोज़ भीगे हुए ओट्स खाने से सेहत पर कैसा होता है असर?
डॉ. वात्स्य बताते हैं कि अगर आप रोज़ाना पूरी रात भीगे हुए ओट्स खाते हैं, तो कुछ ही हफ्तों में पाचन बेहतर हो सकता है, पेट लंबे समय तक भरा रह सकता है और बार-बार कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा कम हो सकती है। ओट्स में फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं जो हमारी बॉडी को धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं और सुबह लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखने में मदद करते हैं। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि हर दिन बिल्कुल एक ही तरह का नाश्ता करना ठीक नहीं है। एक जैसा नाश्ता रोज खाने से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसलिए भोजन में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है।
क्या भीगे हुए ओट्स वजन और शुगर को कंट्रोल करते हैं?
डॉ. वात्स्य के अनुसार ओट्स का सेवन भिगोकर खाने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है। ओट्स में मौजूद घुलनशील फाइबर (बीटा-ग्लूकॉन) पाचन की गति को धीमा करता है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती और वजन कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। धीमी पाचन प्रक्रिया के कारण ग्लूकोज भी धीरे-धीरे ब्लड में पहुंचता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। डॉक्टर ने बताया अगर ओट्स के साथ ग्रीक योगर्ट, बिना नमक वाले मेवे या बीज जैसे प्रोटीन और हेल्दी फैट का सेवन किया जाए तो इसके फायदे और बढ़ सकते हैं।
क्या भिगोए हुए ओट्स, पके हुए ओट्स से ज्यादा हेल्दी होते हैं?
डॉ. वात्स्य के मुताबिक पोषण के लिहाज से दूध या दही में भिगोए हुए ओट्स सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं। भिगोने से ओट्स मुलायम हो जाते हैं, जिससे उन्हें पचाना आसान लगता है। इससे फाइटिक एसिड की मात्रा में भी हल्की कमी आ सकती है, जो कुछ मिनरल्स के अवशोषण को प्रभावित करता है। एक्सपर्ट ने बताया आप ओट्स को पका कर और भिगोकर दोनों तरह खा सकते हैं, दोनों तरह खाने से सेहत को फायदा होता है।
भिगोकर ओट्स खाने से आंतों की सेहत पर कैसा होता है असर?
ओवरनाइट ओट्स में भरपूर फाइबर होता है, जो आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और मल त्याग नियमित रहने में मदद मिलती है। कुछ मामलों में भिगोए हुए ओट्स में रेसिस्टेंट स्टार्च भी बन सकता है, जो आंतों के माइक्रोबायोम के लिए फायदेमंद माना जाता है। हालांकि फाइबर का पूरा लाभ तभी मिलता है जब दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी भी पिया जाए।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
- डॉ. वात्स्य के अनुसार ओवरनाइट ओट्स अधिकांश लोगों के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ परेशानियों जैसे डायबिटीज मरीज ओट्स का सेवन करते हैं तो उसमें अतिरिक्त चीनी, शहद या मीठे टॉपिंग्स मिलाने से बचें।
- इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में अधिक फाइबर गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ा सकता है, इसलिए उन्हें कम मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।
सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोगों को केवल सर्टिफाइड ग्लूटेन-फ्री ओट्स ही चुनने चाहिए, क्योंकि सामान्य ओट्स प्रोसेसिंग के दौरान ग्लूटेन से दूषित हो सकते हैं।
ओवरनाइट ओट्स बनाने का सबसे हेल्दी तरीका
डॉ. शुभम वात्स्य के मुताबिक ओट्स को रातभर दूध या बिना चीनी वाले दही में भिगोकर रखें। सुबह इसमें ताजे फल, बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या फ्लेक्स सीड और थोड़ी-सी दालचीनी मिलाकर खाएं। वहीं चीनी, शहद, फ्लेवर वाले सिरप, चॉकलेट स्प्रेड, मीठा दही या बहुत ज्यादा ड्राई फ्रूट्स मिलाने से बचें, क्योंकि इससे यह हेल्दी नाश्ता अधिक कैलोरी और शुगर वाला बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया अगर ओट्स को ठीक तरीके से तैयार किया जाए तो ओवरनाइट ओट्स रोज़ाना के नाश्ते का एक पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं। ये पाचन, वजन कंट्रोल और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। किसी भी नए डाइट प्लान या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
