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जानिए कब एक्‍सपायरी डेट खत्‍म होने से पहले भी भी बेकार हो जाती है दवा

कोई भी दवा जब बनकर तैयार होती है तो उसी समय से उसका असर कम होने लगता है। इसे ड्रग डिके कहा जाता है।

प्रतीकात्मक चित्र

दवाओं के इस्तेमाल को लेकर हम काफी सतर्क होते हैं। सवाल हमारी जिंदगी से जो जुड़ा होता है। दवाओं को लेकर जो सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं वो उसके एक्सपायरी डेट को लेकर होती हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि एक्सपायरी डेट के बाद दवाएं न सिर्फ असरदार नहीं रह जातीं बल्कि वह जहर बन जाती हैं और उसे खाने के बाद रोगी की जान तक जा सकती है। इस बात में सच्चाई बिल्कुल भी नहीं है। हमारे देश में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के मुताबिक हर दवा पर उसका असर खत्म होने की एक तारीख लिखी होनी चाहिए, जिसका मतलब होगा कि इस अवधि के अंतर्गत दवा निर्माता दवा के पूरे असर और उसके सुरक्षित होने की गारंटी लेता है। लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि इस अवधि के बाद दवा अचानक से अपना असर खोकर जहर बन जाती है। तो इसके पीछे क्या सच्चाई है, आइए जानने की कोशिश करते हैं।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कोई भी दवा जब बनकर तैयार होती है तो उसी समय से उसका असर कम होने लगता है। इसे ड्रग डिके कहा जाता है। अमेरिकी मानकों के मुताबिक अगर दवा को सही तरीके से स्टोर किया गया है तो एक्सपायरी डेट के बाद भी उसका 90 प्रतिशत असर उसमें बचा रहता है। एक अध्ययन में शामिल 100 दवाओं में तकरीबन 90 प्रतिशत दवाएं अपनी एक्सपायरी की तारीख से 15 साल के बाद भी बिल्कुल दुरुस्त थीं और उनमें असली असर का अधिकांश हिस्सा कायम था। कोई भी दवा जब हम खरीदते हैं तो उस पर एक सील लगी होती है। इस सील के खुलने के बाद सिरप, टैबलेट्स या मलहम आदि दवाओं का संपर्क वाह्य वातावरण से हो जाने के बाद उसके असर में क्षरण आना शुरू हो जाता है। ऐसे में अगर दवाओं को सही तरीके से स्टोर किया जाए तो उसके असर को काफी समय तक बरकरार रखा जा सकता है, नहीं तो एक्सपायरी डेट से पहले ही दवा खराब होने की संभावना होती है।

एक्सपायरी डेट वाली दवाओं के इस्तेमाल के समय बरतें ये सावधानियां –

1. दवाओं का रख-रखाव ठीक तरीके से नहीं करते तो उसका असर खत्म हो जाने में ज्यादा देर नहीं लगती। दवाओं को सही तरीके से बताए गए तापमान और जगह पर ही स्टोर करें।

2. संदिग्ध दवाओं का सेवन न ही करें तो अच्छा है।

3. दवा का इस्तेमाल तभी करें जब वह मूल रंग-रूप में हो। मतलब कि उसका रंग न बदला हो।

4. टूटे टैबलेट्स, बेरंग इंजेक्शन्स और नर्म हो चुके कैप्सूल्स का सेवन बिल्कुल न करें।

5. एक्सपायरी डेट के बाद दवाएं जहर बन जाती हैं इस बात का कोई सबूत नहीं है। इस दिशा में अध्ययन भी बहुत कम ही हुए हैं।

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