अक्सर लोग थायराइड (Thyroid) को सिर्फ वजन के घटने या बढ़ने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन जब यह हार्मोनल असंतुलन हद से ज्यादा बढ़ने लगता है, तो इसके लक्षण और भी परेशान करने वाले हो जाते हैं। क्या आप भी अक्सर उठते-बैठते हड्डियों और जोड़ों में बेतहाशा दर्द महसूस कर रहे हैं? या फिर अचानक आपके बाल इतनी तेजी से झड़ने लगे हैं कि कंघी करने में भी डर लगने लगा है? अगर हां, तो यह संकेत है कि आपके शरीर को दवाओं के साथ-साथ सही लाइफस्टाइल सपोर्ट की भी जरूरत है। थायराइड एक ऐसी क्रॉनिक स्थिति है, जिसका प्राथमिक समाधान केवल डॉक्टरों द्वारा निर्धारित मेडिकल ट्रीटमेंट ही है। लेकिन मेडिकल साइंस भी मानता है कि सही दवाओं के साथ अगर रूटीन में सही योगाभ्यास और कुछ पारंपरिक देसी चीजों को शामिल कर लिया जाए, तो रिकवरी की रफ्तार तेज हो सकती है।

भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) ने बताया गर्दन में मौजूद एक छोटी-सी थायराइड ग्रंथि शरीर के कई जरूरी कामों को कंट्रोल करती है। यह हमारी ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, नींद, मूड, पाचन और यहां तक कि उम्र बढ़ने की गति को भी प्रभावित करती है। जब थायराइड असंतुलित हो जाता है तो शरीर कई संकेत देने लगता है, जिनमें थकान, बाल झड़ना, पेट फूलना, चिंता, ब्रेन फॉग, वजन में बदलाव और मानसिक थकावट शामिल हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक थायरॉइड और नर्वस सिस्टम आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। लंबे समय तक रहने वाला तनाव हार्मोन संतुलन को प्रभावित करता है और मस्तिष्क तथा थायराइड के बीच होने वाले संचार में बाधा डाल सकता है। तनाव के कारण शरीर लगातार फाइट या फ्लाइट मोड में बना रहता है, जबकि थायराइड बेहतर तरीके से तब काम करता है जब शरीर शांत और रिलैक्स अवस्था में हो। योग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान यौगिक अभ्यासों और सही खानपान की मदद से थायराइड की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि थायराइड कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन से देसी उपाय असरदार हो सकते हैं।

थायराइड कंट्रोल करने के लिए गहरी सांस लेने का अभ्यास करें

सुबह सिर्फ 5 मिनट तक गहरी और धीमी डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग (पेट से सांस लेने की प्रक्रिया) करने से शरीर तनाव की स्थिति से बाहर आने लगता है। इससे हृदय गति कंट्रोल होती है, मन शांत होता है और मांसपेशियों का तनाव कम होता है।

थायराइड के लिए फायदेमंद योगासन

थायरॉइड ग्रंथि गर्दन के क्षेत्र में स्थित होती है। कुछ योगासन इस क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाने और मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकते हैं। इन योगासनों में शामिल हैं

  • भुजंगासन (Cobra Pose)
  • सर्वांगासन (Shoulder Stand)
  • अर्ध सर्वांगासन
  • उष्ट्रासन (Camel Pose)
  • सूर्य नमस्कार
  • नौकासन
  • वक्रासन
  • सुप्त वक्रासन
  • एक्सपर्ट के मुताबिक इन योगासन को नियामित करने से पाचन, रक्त संचार और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।  हालांकि सर्वांगासन जैसे आसन प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करने चाहिए।

खाने पर दें ध्यान

थायराइड को स्वस्थ रखने के लिए सही पोषण बेहद जरूरी है। शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, हेल्दी फैट और सेलेनियम, जिंक, आयरन तथा आयोडीन जैसे मिनरल्स की जरूरत होती है, ऐसे में डाइट में मेवे और सीड्स को शामिल करें। डाइट में हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल करें। दालें,नारियल, करी पत्ता और हेल्दी फैट का सेवन असरदार साबित होता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और नियमित समय पर भोजन करना भी जरूरी है।

धनिया के बीज का पानी पिएं

योगा एक्सपर्ट के मुताबिक थायराइड की सेहत के लिए धनिया के बीज का पानी एक पारंपरिक और लाभकारी ड्रिंक माना जाता है। इसे बनाने के लिए एक चम्मच धनिया के बीज रातभर पानी में भिगो दें और सुबह इसे उबालकर छान लें। गुनगुना होने पर इसका सेवन करें। धनिया में आयोडीन, मैग्नीशियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो थायराइड के सामान्य कार्यों को सपोर्ट कर सकते हैं।

शरीर के संकेतों को समझना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि शरीर को संतुलन में लाने का माध्यम है। जब हम अपने शरीर की जरूरतों को समझते हैं और उसे पर्याप्त आराम, पोषण और देखभाल देते हैं, तभी वास्तविक सुधार की शुरुआत होती है। हालांकि अगर आपको थायरॉइड की समस्या है या उसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो किसी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (Hormone Specialist) से परामर्श जरूर लें और केवल योग या घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता, शैक्षणिक उद्देश्यों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (Hormone Specialist) की चिकित्सा सलाह, निदान या सटीक इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। थायराइड एक संवेदनशील हार्मोनल स्थिति है, जिसके लिए नियमित मेडिकल चेकअप और निर्धारित दवाएं ही प्राथमिक उपचार हैं। लेख में बताए गए योगासन और घरेलू उपाय केवल आपके रूटीन को बेहतर बनाने के सहायक माध्यम (Supportive Care) हैं। अपनी डाइट, लाइफस्टाइल या एक्सरसाइज रूटीन में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या किसी प्रमाणित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।