गर्मियों के मौसम में जब पारा 42 डिगी से 47 डिगी को पार करने लगता है, तो हमें सिर्फ पसीना, डिहाइड्रेशन या शारीरिक थकान ही महसूस नहीं होती, बल्कि चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित न कर पाना और अत्यधिक गुस्सा आने जैसी मानसिक परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं। देश के कई हिस्सों में सूरज की तपिश और हीटवेव (लू) का कहर जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बढ़ती गर्मी न सिर्फ आपके शरीर को झुलसा रही है, बल्कि आपके स्वभाव को भी आक्रामक बना रही है? अक्सर देखा जाता है कि तापमान बढ़ने के साथ ही लोगों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव अचानक बढ़ जाता है। आखिर चिलचिलाती धूप और हमारे दिमाग का आपस में क्या वैज्ञानिक कनेक्शन है?
हाल ही में इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में गुंजन तनेजा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी लोगों को भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील और प्रतिक्रियाशील बना सकती है। उन्होंने इसके पीछे टेम्परेचर अग्रसेन थ्योरी (Temperature Aggression Theory) का जिक्र किया। लेकिन क्या इस दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार भी है? आइए एक्सपर्ट से जानते है गर्मी और ब्रेन का क्या है कनेक्शन।
क्या है टेंपरेचर अग्रसेन थ्योरी?
शारदा केयर-हेल्थ सिटी में मनोचिकित्सा विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अभिनीत कुमार के अनुसार टेम्परेचर अग्रसेन थ्योरी एक मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, जो बताती है कि अत्यधिक गर्म मौसम लोगों में असहजता, निराशा और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है। डॉ. कुमार के मुताबिक, जब तापमान व्यक्ति के आरामदायक स्तर से ऊपर चला जाता है, तो यह शारीरिक और मानसिक तनाव पैदा करता है। इसका असर मूड, भावनाओं को कंट्रोल करने की क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। हालांकि एक्सपर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि केवल गर्मी ही किसी व्यक्ति को आक्रामक नहीं बनाती। किसी व्यक्ति का स्वभाव, जीवन की परिस्थितियां, तनाव का स्तर और आसपास का वातावरण भी यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं कि वह गर्म मौसम पर कैसी प्रतिक्रिया देगा।
गर्मी का असर इंसान के बर्ताव पर कैसा पड़ता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तापमान का असर व्यक्ति के व्यवहार और मनोदशा पर पड़ सकता है। डॉ. कुमार के अनुसार, अधिक गर्मी शारीरिक असुविधा, डिहाइड्रेशन, थकान, खराब नींद और तनाव का कारण बन सकती है। ये सभी कारक व्यक्ति की शांत और संतुलित बने रहने की क्षमता को कम कर सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कुछ लोग बाकी दिनों की तुलना में गर्मी में ज्यादा अधीर,गुस्सैल और आवेगी महसूस करते हैं। छोटी-छोटी परेशानियां, जिन्हें आमतौर पर नजरअंदाज किया जा सकता है, गर्मी के दिनों में ज्यादा परेशान करने लगती हैं। यही वजह है कि हीटवेव या अत्यधिक गर्म दिनों में लोग भावनात्मक रूप से अधिक प्रतिक्रिया दे सकते हैं, खासकर अगर वे पहले से तनावग्रस्त, थके हुए या नींद की कमी से जूझ रहे हों। अत्यधिक गर्मी के दौरान लोग अधिक असहज, तनावग्रस्त और भावनात्मक रूप से संवेदनशील महसूस कर सकते हैं, जिससे बहस, विवाद और आक्रामक व्यवहार की संभावना बढ़ सकती है।
हीटवेव और दिमाग का क्या है कनेक्शन, रिसर्च
चिलचिलाती गर्मी और हीट वेव का हमारे दिमाग की कार्यप्रणाली के साथ सीधा और खतरनाक कनेक्शन है। The Lancet Psychiatry और Nature Climate Change में प्रकाशित एक विस्तृत न्यूरोलॉजिकल शोध के अनुसार हमारे दिमाग का एक हिस्सा ऐसा होता है जिसे हाइपोथैलेमस कहते हैं। यह हमारे शरीर का ‘इंटरनल थर्मोस्टेट’ (AC) है, जो शरीर के तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रखता है।
जब बाहर हीटवेव चलती है, तो हाइपोथैलेमस को शरीर को ठंडा रखने के लिए (पसीना निकलने और ब्लड वेसल्स को फैलाने के लिए) दोगुनी ताकत से काम करना पड़ता है। इस अत्यधिक दबाव के कारण दिमाग के अन्य महत्वपूर्ण काम जैसे सोचने की क्षमता, निर्णय लेना और याददाश्त (Cognitive Functions) सुस्त पड़ जाते हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर असंतुलित हो जाता है। रिसर्च साबित करती है कि यही कारण है कि हीटवेव के दिनों में लोगों में घरेलू हिंसा, रोडवेज, चिड़चिड़ापन और बिना बात के गुस्सा आने के मामले 4% से 6% तक बढ़ जाते हैं।
गर्मी में गुस्से को कैसे रखें कंट्रोल?
हालांकि मौसम को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन उसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है। डॉ. कुमार सलाह देते हैं कि गर्मी में बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए और गुस्से को कंट्रोल करने के लिए आप गर्मी में पानी का सेवन ज्यादा करें। गर्मी में 7-8 घंटे की भरपूर और अच्छी नींद लें। लंबे समय तक तेज धूप या अत्यधिक गर्मी में रहने से बचें। तनाव कम करने के लिए योगा और एक्सरसाइज करें। एक्सपर्ट ने सुझाव दिया कि गुस्से में प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ पल रुकें, खुद को शारीरिक रूप से ठंडा रखें और किसी बहस को बढ़ाने से पहले अपने आसपास के वातावरण को आरामदायक बनाने की कोशिश करें।
विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी रिश्तों की समस्याओं की अकेली वजह नहीं होती, लेकिन यह तनाव, असहजता और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को जरूर बढ़ा सकती है। इसलिए अगर हीटवेव के दौरान आप खुद को सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ा महसूस कर रहे हैं, तो बहस शुरू करने से पहले कमरे का तापमान और अपनी पानी की बोतल दोनों जरूर चेक कर लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या नई दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
