खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण आजकल पेट में गैस, अपच, कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। इन समस्याओं से राहत पाने के लिए कई लोग प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) या घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक तरीका है पेट पर ठंडे पानी की पट्टी बांधना, जिसे ‘हाइड्रोथेरेपी’ का हिस्सा माना जाता है। लेकिन क्या यह तरीका वाकई हमारी आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, या इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? हेल्थ और नेचुरोपैथी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही तरीके से की गई यह थेरेपी पाचन तंत्र को एक्टिव कर सकती है, लेकिन इसके नियम जानना बेहद जरूरी है। आइए एक्सपर्ट से विस्तार से समझते हैं पेट पर पट्टी बांधने का सही वैज्ञानिक तरीका और इसके फायदे क्या है।
पेट पर ठंडे पानी की पट्टी बांधने से क्या होता है?
Satvic Movement में हेल्थ और नेचुरोपैथी एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब पेट पर ठंडे पानी की पट्टी रखी जाती है, तो शरीर का तापमान संतुलित करने के लिए उस हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया को मजबूती मिलती है। एक्सपर्ट ने बताया ठंडे पानी में भिगोए हुए सूती कपड़े (वेट पैक) को पेट पर बांधने से पाचन तंत्र और आंतों की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है।
पेट पर ठंडे पानी की पट्टी बांधने से बॉडी में कौन-कौन से होते हैं बदलाव
एक्सपर्ट ने बताया पेट पर ठंडे पानी की पट्टी लगाने से उस हिस्से में रक्त संचार (Blood Circulation) बढ़ने लगता है। इससे पेट, लिवर,पैंक्रियाज, गॉल ब्लैडर और आंतों तक रक्त प्रवाह बेहतर होता है। कॉटन की गीले पानी की पट्टी पेट पर कुछ देर बांधने से पेट की गैस,एसिडिटी और अपच से राहत मिलती है। इस प्रक्रिया में जब पट्टी को पेट पर बांधा जाता है तो वो बेहद गर्म हो जाती है। सात्विक मूवमेंट की एक वीडियो में बताया गया है कि ये पट्टी आंतों में जमा पुराना मल बाहर निकालने में मदद करती है। पेट के टॉक्सिन बाहर निकलने से पाचन तंत्र बेहतर होता है। माना जाता है कि इस पट्टी के बांधने से पेट के अंदरूनी अंग बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं जिससे पाचन को सपोर्ट मिलती है।
हाइड्रोथेरेपी का विज्ञान
पेट पर ठंडी या गर्म पट्टी बांधना यानी हाइड्रोथेरेपी के प्रभावों पर कुछ छोटे अध्ययनों में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि कोल्ड एब्डॉमिनल पैक (Cold Abdominal Pack) शरीर के मेटाबॉलिज्म और हृदय संबंधी कार्यों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि इसके फायदों की पुष्टि के लिए अभी रिसर्च पर्याप्त नहीं है। लाभों की पुष्टि के लिए और बड़े अध्ययनों की जरूरत बताई गई।
वहीं, 2011 में प्रकाशित एक जापानी अध्ययन में पाया गया कि पेट पर गर्म सेक या कंप्रेस लगाने से उस हिस्से में रक्त प्रवाह बढ़ता है और गैस्ट्रिक मूवमेंट यानी पाचन क्रिया में सुधार होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे पाचन तंत्र को बेहतर ढंग से काम करने में मदद मिल सकती है। ठंडी पट्टी, वेट पैक या दूसरे प्राकृतिक उपचार कुछ लोगों में आराम पहुंचा सकते हैं, लेकिन इसे कब्ज, डायबिटीज, मोटापा या दूसरी बीमारियों के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इनके प्रभावों को लेकर अभी और बड़े वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
पेट पर ठंडी पट्टी लगाने का तरीका
पेट पर सफेद पट्टी बांधने के लिए कोई जादुई कपड़ा नहीं है बल्कि सफेद कॉटन के कपड़े को ही पट्टी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे बांधने के लिए सबसे पहले सफेद सूती कपड़ा लें। कपड़े को मोड़कर लगभग 10 इंच चौड़ी पट्टी बना लें। इसे ठंडे पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें। याद रखें कि पानी इतना ठंडा हो कि आप आराम से सहन कर सकें। अब इस गीली पट्टी को पेट के चारों ओर लपेटें। ध्यान रखें कि नाभि (Belly Button) पट्टी के बीच में रहे। पट्टी को इस तरह बांधें कि वह ढीली न हो और लगभग 3 परतें बन जाएं। इसे करीब 30 से 40 मिनट तक लगाए रखें। इस दौरान कुछ भी खाने से बचने की सलाह दी गई है।
जरूरी सावधानी
- सात्विक मूवमेंट की एक्सपर्ट ने बताया अगर आप पेट पर ठंडे पानी की पट्टी बांध रहे हैं तो ऐसे में पानी ठंडा लगें या शरीर कांपने लगे तो पट्टी तुरंत हटा दें।
- सर्दी के दिनों में आप हाइड्रोथेरेपी नहीं करें।
- कब्ज, गैस या पाचन संबंधी गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी, प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) के बुनियादी सिद्धांतों और इंटरनेट पर उपलब्ध शोधों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर, विशेषज्ञ या चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। पेट, आंतों, लिवर या पाचन तंत्र से जुड़ी किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में इस उपाय को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड मेडिकल थेरेपिस्ट से परामर्श जरूर करें।
