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जन्म के समय 2.5 किलो से ज्यादा वजन, व्यस्कों में बढ़ाता है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा – जानें

Diabetes Research: टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनना कम हो जाता है। मध्यम आयु वर्ग या बूढ़े लोगों में इस तरह के डायबिटीज होने की सबसे अधिक संभावना होती है

Diabetes Type, Type 2 Diabetes, Diabetes symptoms, diabetes remedyटाइप-2 डायबिटीज में शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं हो पाता है (फोटो क्रेडिट – जनसत्ता)

What is Diabetes Disease: डायबिटीज यानी मधुमेह बीमारी के कारण बॉडी में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। इससे मरीजों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 1.6 मिलियन लोगों की जान डायबिटीज के कारण जाती है। वहीं, साल 2030 तक भारत में 9.8 करोड़ लोग टाइप 2 डायबिटीज के घेरे में होंगे। बता दें कि इस तरह के मधुमेह में शरीर में इंसुलिन बनना कम हो जाता है। जो लोग मध्यम आयु वर्ग या बूढ़े होते हैं, उन्हें इस तरह के डायबिटीज होने की सबसे अधिक संभावना होती है, इसलिए इसे एडल्ट-ऑनसेट डायबिटीज कहा जाता है।

हाल में हुए एक शोध के मुताबिक जन्म के समय शिशु का वजन ज्यादा होने पर व्यस्क होने पर डायबिटीज टाइप 2 का खतरा अधिक हो जाता है। आइए जानते हैं विस्तार से –

पुरुषों को ज्यादा होता है खतरा: शोधकर्ताओं के अनुसार जन्म के समय जिन शिशुओं का वजन 2.5 किलो से अधिक होता है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा अधिक होता है। हालांकि, पुरुषों में इसका खतरा ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआत में वजन इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर – 1 की कमी का भी संकेत हो सकता है। इससे बच्चे की विकास व बड़े होने पर ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होती है।

क्या हैं डायबिटीज टाइप 2 के लक्षण: मोटापा, हाइपरटेंशन और खराब जीवन शैली के कारण लोग टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर टाइप-2 डायबिटीज में शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं हो पाता है।  ऐसे में बॉडी सेल्स तक ग्लूकोज पहुंचने में असमर्थ हो जाता है। बार-बार पेशाब आना, लगातार प्यास लगना, थकान, आंखों की रोशनी कमजोर होना और घावों को भरने में अधिक समय लगना इस बीमारी के आम लक्षण हैं।

किन बातों का रखें ध्यान: डायबिटीज के मरीजों को अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाने को अपने डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। जंक फूड, पैकेज्ड फूड के सेवन से भी बचना चाहिए। मीठे फल, चावल, आलू, पास्ता और व्हाइट ब्रेड से भी परहेज करें। उच्च फाइबर वाले फूड्स को खाना फायदेमंद होगा, स्वस्थ जीवन शैली से भी इस पर काबू पाया जा सकता है। एक्सरसाइज करें, सोने-जगने का समय फिक्स करें।

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