ताज़ा खबर
 

सावधान! तीन घंटे से अधिक टीवी देखा तो हो सकती है यह बिमारी

एक नये अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि दिन में तीन घंटे से अधिक समय तक टीवी, स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल करने वाले बच्चों को मधुमेह का खतरा अधिक हो सकता है।

Author March 14, 2017 17:17 pm
ब्रिटेन के 200 प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले नौ-10 साल के करीब 4,500 बच्चों के नमूने एकत्रित किये।

एक नये अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि दिन में तीन घंटे से अधिक समय तक टीवी, स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल करने वाले बच्चों को मधुमेह का खतरा अधिक हो सकता है। अध्ययन के शोधार्थियों का कहना है कि तीन अथवा तीन घंटे से अधिक समय तक टीवी या फोन की स्क्रीन देखने का संबंध ऐसे कारकों से हैं, जो बच्चों में मधुमेह के विकास से जुड़े हुये हैं। अधिक देर तक टीवी या मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से शरीर में वसा एवं इंसुलिन की प्रतिरोध क्षमता का संतुलन बिगड़ जाता है। अग्नाशय द्वारा तैयार किए जाने वाले हार्मोन इन्सुलिन का कार्य रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना होता है।

शोधार्थियों ने चयापचय एवं कार्डियोवैस्कुलर जोखिम की श्रंखला के अध्ययन के लिये ब्रिटेन के 200 प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले नौ-10 साल के करीब 4,500 बच्चों के नमूने एकत्रित किये। जिन कारकों का अध्ययन किया गया उनमें रक्त वसा, इंसुलिन प्रतिरोध, भूखे रहने पर रक्त शर्करा का स्तर, जलन पैदा करने वाले रसायन, रक्तचाप और शरीर की वसा आदि थे। बच्चों से प्रतिदिन टीवी अथवा कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर बिताने वाले समय के बारे में पूछा गया था।

वहीं अगर भारत की बात करें तो भारत में 24.5 फीसद मधुमेह पीड़ितों के साथ चेन्नई पांचवें स्थान है। वहीं हैदराबाद की 22.6 फीसद आबादी और कोलकाता की 19 फीसद से अधिक आबादी इस बीमारी से पीड़ित है। अध्ययन में पाया गया है कि शहर ही नहीं गावों के लोग भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, मधुमेह के मामले में भारत दुनिया के सबसे गंभीर रूप से प्रभावित तीन देशों में से एक है। इसके कारण देश पर अर्थिक भार पड़ रहा है। देश की उत्पादकता पर भी असर हो रहा है क्योंकि मधुमेह के कारण 1.7 मिलियन लोगों के गुर्दे खराब हो गए। अभी करीब 6.8 करोड़ लोग मधुमेह की चपेट में हैं।

यह बीमारी किस कदर पैर पसार रही है इसका अंदाजा तो इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यह युवा व बच्चों को तेजी से चपेट में ले रहा है। हर छह में से एक किशोर को यह बीमारी है। यह भी पाया गया कि मधुमेह के 85 फीसद मामले मोटापे से संबंधित हैं। लंबे समय तक अगर शुगर नियंत्रित न हो तो वह आंखों व तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचाता है।

केबल सर्विस को कहें गुड बाय! YouTube लॉन्च करेगा टीवी सर्विस

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App