watching more TV cuts the sperm counts by 35 percent - 5 घंटे से ज्यादा टीवी देखने पर पिता बनने में दिक्‍कत, 35 पर्सेंट तक घट जाता है स्पर्मकाउंट! - Jansatta
ताज़ा खबर
 

5 घंटे से ज्यादा टीवी देखने पर पिता बनने में दिक्‍कत, 35 पर्सेंट तक घट जाता है स्पर्मकाउंट!

शोध में टीवी एडिक्ट लोगों के स्पर्म काउंट्स में उन लोगों के मुकाबले 38 प्रतिशत की कमी देखी गई जो लोग कम आरामदेह जीवनशैली के आदती होते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र

छुट्टियों के दिन ज्यादातर लोगों का पसंदीदा काम टीवी देखना होता है। टीवी देखने से आंखों पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में तो सभी जानते हैं। इसके अलावा एक शोध में ज्यादा टीवी देखने से मोटापा बढ़ने का भी दावा किया जा चुका है। एक ताजा शोध की मानें तो ज्यादा टीवी देखना पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर डालता है। शोध में कहा गया है कि एक दिन में 5 घंटे से ज्यादा टीवी देखना पुरुषों में स्पर्म काउंट को तकरीबन 35 प्रतिशत तक कम कर देता है। शोधकर्ताओं का इस बाबत कहना है कि टीवी देखने के दौरान ज्यादातर लोग हाई कैलोरी जंक फूड्स का सेवन करते हैं और उन्हें आलस की समस्या भी होती है।

शोध में टीवी एडिक्ट लोगों के स्पर्म काउंट्स में उन लोगों के मुकाबले 38 प्रतिशत की कमी देखी गई जो लोग कम आरामदेह जीवनशैली के आदती होते हैं। मतलब कि कम शारीरिक श्रम करना और लगातार बैठे रहना स्पर्म काउंट में कमी की वजह बनता है। दिल्ली के इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल की विशेषज्ञ सागरिका अग्रवाल बताती हैं कि आरामदेह जीवनशैली या तो स्पर्म सेल्स की आकृति और गतिशीलता को प्रभावित करती है या फिर उन्हें खत्म कर देती है। उन्होंने बताया कि टीवी देखते हुए ज्यादा मात्रा में खाना स्पर्म काउंट्स कम होने का खतरा बढ़ाता ही है साथ ही उनकी गतिशीलता और सांद्रता प्रभावित होने का खतरा भी चार गुना ज्यादा होता है।

शोध में 18 – 22 साल की उम्र के तकरीबन 200 छात्रों को लैब एनालिसिस के लिए शामिल किया था। शोध में टीवी देखते हुए खाने वालों में स्पर्म काउंट्स 37 Mn per mL पाया गया जबकि ऐसे लोग जो टीवी के सामने कम समय बिताते थे उनमें स्पर्म काउंट 52 Mn per mL था। हैदराबाद की आईवीएफ एक्सपर्ट स्वाती मोठे बताती हैं कि लगातार 15 घंटे तक शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाले लोगों में उन लोगों के मुकाबले स्पर्म काउंट तीन चौथाई ज्यादा पाया गया था जो शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं थे। शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित किया गया था।


Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App