अक्सर माना जाता है कि पसीना ज्यादा बहाने और तेज दौड़ने से ही फिटनेस मिलती है, जबकि धीमी गति की वॉक को सिर्फ बुजुर्गों की एक्सरसाइज समझा जाता है। पर क्या ये वास्तव में सच है? कैलोरी बर्न करने से लेकर दिल की सेहत तक, वॉकिंग और रनिंग के अपने-अपने फायदे और जोखिम हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि बॉडी को पूरा फायदा वॉक से मिलता है या फिर रनिंग से मिलता है। कई लोग दौड़ने को ज्यादा असरदार मानते हैं, तो कुछ लोग पैदल चलने को जोड़ों के लिए सुरक्षित मानते हैं। लेकिन विज्ञान और फिटनेस एक्सपर्ट्स इस बारे में क्या कहते हैं उनकी राय इसके बारे में जानना जरूरी है।
मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. गज़नफर बी. पटेल बताते हैं कि ये पूरी तरह आपके फिटनेस गोल्स पर निर्भर करता है। डॉ. पटेल के अनुसार रनिंग एक हाई-इंटेंसिटी एक्टिविटी है, जिससे कम समय में ज्यादा कैलोरी बर्न होती है और दिल, फेफड़ों व मांसपेशियों पर ज्यादा असर पड़ता है। वहीं वॉकिंग एक लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, जो जोड़ों के लिए आसान होती है और लंबे समय तक लगातार की जा सकती है।
क्या रनिंग हमेशा वॉकिंग से बेहतर है?
डॉ. पटेल कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है कि रनिंग हमेशा वॉकिंग से ज्यादा बेहतर है। रनिंग वजन घटाने और जल्दी स्टैमिना बूस्ट करने के लिए ज्यादा प्रभावी हो सकती है। Medicine & Science in Sports & Exercise में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार रनिंग करने वाले लोग समान समय में वॉक करने वालों की तुलना में 2.5 गुना अधिक एनर्जी बर्न करते हैं। रनिंग एक हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट है। अगर आप 1 घंटे दौड़ते हैं, तो आप लगभग 600-800 कैलोरी बर्न कर सकते हैं।
Journal of the American College of Cardiology के अनुसार रोजाना केवल 5 से 10 मिनट धीमी गति से दौड़ना भी मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है, लेकिन इसमें चोट या स्ट्रेन का खतरा भी ज्यादा होता है। रनिंग करने से खासकर जॉइंट समस्याओं वाले लोगों को और रनिंग की शुरुआत करने वाले लोगों को ज्यादा खतरा होता है। एक्सपर्ट ने बताया वॉकिंग में समान कैलोरी बर्न करने में ज्यादा समय लगता है, लेकिन ये ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है।
वॉकिंग का जॉइंट हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. पटेल के अनुसार वॉकिंग घुटनों, कूल्हों और कमर पर कम दबाव डालती है, इसलिए यह जॉइंट्स के लिए बेहतर मानी जाती है। American Heart Association (AHA) द्वारा 33,000 रनिंग करने वालों और 15,000 पैदल चलने वालों पर की गई एक बड़ी रिसर्च के अनुसार रनिंग ने हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को 4.2% कम किया जबकि वॉकिंग ने इसे 7.2% कम किया। एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ड सतह पर या गलत तरीके से की गई रनिंग जॉइंट्स पर ज्यादा दबाव डाल सकती है। जिन लोगों को घुटनों या पीठ की समस्या है या वजन ज्यादा है, उनके लिए तेज चाल से चलना बेहतर विकल्प है।
रोज़ कितने किमी वॉक करना फायदेमंद है?
डॉ. पटेल बताते हैं कि अगर आप रोज़ाना तेज़ चाल से 5 किलोमीटर चलते हैं, तो इससे हार्ट हेल्थ सुधरती है, वजन कंट्रोल में रहता है और स्टैमिना बढ़ता है।
कैसे करें सही चुनाव?
वॉकिंग और रनिंग के बीच चुनाव करते समय अपनी फिटनेस लेवल, मेडिकल हिस्ट्री और लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर आपका लक्ष्य सामान्य फिटनेस और लंबे समय तक बॉडी को फिट रखना है तो आपके लिए वॉकिंग बेहतर है। अगर आपको जल्दी वजन कम करना है और स्टैमिना बूस्ट करना है तो रनिंग फायदेमंद है। एक्सपर्ट ने बताया कई मामलों में वॉक और रनिंग का कॉम्बिनेशन अच्छा विकल्प माना जाता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख पब्लिक डोमेन और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। कोई भी नया फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
