अक्सर लोग विटामिन सप्लीमेंट्स को पूरी तरह सुरक्षित मानकर बिना डॉक्टर की सलाह के महीनों और सालों तक लेते रहते हैं। विटामिन डी सप्लीमेंट का सेवन हड्डियों से लेकर ब्रेन और बॉडी के बाकी हिस्सों के लिए बहुत जरूरी है। बॉडी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लोग विटामिन डी सप्लीमेंट का सेवन लगातार करते रहते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि विटामिन डी सप्लीमेंट का लगातार सेवन करने से बॉडी पर उसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। हाल ही में Quora पर एक यूजर ने सवाल पूछा कि लंबे समय तक हाई-डोज़ विटामिन D सप्लीमेंट लेने के क्या कोई साइड इफेक्ट हो सकते हैं? कितने समय तक इस सप्लीमेंट का सेवन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है?
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों या विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है। कोई भी नई दवा या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
आपको बता दें कि हम भारतीयों के लिए ये सवाल पूछा जाना काफी अहम हैं क्योंकि हमारे यहां विटामिन D की कमी आम है और लोग इसकी भरपाई अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट के रूप में करना शुरू कर देते हैं। इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए हमने जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डायबेटोलॉजिस्ट और मेटाबोलिक फिजिशियन डॉ. व्यंकटेश शिवाने और हिरानंदानी हॉस्पिटल, पवई के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. एलएच, इंटरनल मेडिसिन और मेटाबोलिक फिजिशियन डॉ. विमल पाहुजा से बात की। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि विटामिन डी का हाई डोज क्या है और ये कब सेहत के लिए खतरा बन जाता है।
विटामिन डी का हाई डोज़ क्या है और कब यह टॉक्सिक बन जाता है?
डॉ. पाहुजा ने बताया विटामिन D को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है क्योंकि यह सूर्य की रोशनी से भरपूर मात्रा में मिलता है। भारत जैसे धूप वाले देश में भी अधिकांश लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट ने बताया आमतौर पर 30 ng/mL से अधिक विटामिन D के स्तर को पर्याप्त माना जाता है। इस स्तर पर पैराथाइरॉइड हार्मोन स्थिर रहता है और हड्डियों को नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर विटामिन डी का सेवन 100–150 ng/mL से अधिक किया जाए तो ये हाई डोज होता है जिसके बॉडी में कई तरह के साइड इफेक्ट होते हैं। इससे यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है और किडनी स्टोन का खतरा बढ़ जाता है। एक्सपर्ट ने बताया 50,000 IU/दिन से अधिक विटामिन D कई हफ्तों तक लेना टॉक्सिक माना जाता है।
डॉ. शिवाने के अनुसार भारत में विटामिन D की कमी बहुत आम है, लेकिन अब जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना भी एक नई समस्या बन रही है। एक्सपर्ट ने बताया एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया (ESI) और ICMR-NIN के अनुसार वयस्कों के लिए विटामिन डी का 600–800 IU/ दिन सेवन पर्याप्त माना जाता है। विटामिन डी की अधिकतम सुरक्षित सीमा 4,000 IU/दिन है जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए आदर्श स्तर है। एक्सपर्ट ने बताया 40 ng/mL से ज्यादा विटामिन डी का सेवन करने से बॉडी को किसी तरह का कोई फायदा नहीं होता। बल्कि कैल्शियम बढ़ने का खतरा हो सकता है।
लंबे समय तक विटामिन डी की हाई-डोज़ लेने से बॉडी में कौन-कौन से हो सकते हैं साइड इफेक्ट?
डॉ. शिवाने चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक हाई-डोज लेने से बॉडी में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं जैसे
हाइपरकैल्सीमिया जिसमें खून में ज्यादा कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है।
- किडनी स्टोन
- ब्लड वेसल्स में कैल्शियम जमा होना
- दिल की धड़कन में गड़बड़ी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
विटामिन डी का अधिक सेवन करने पर बॉडी में कौन-कौन से दिखते हैं लक्षण
विटामिन D फैट-सॉल्युबल है, इसलिए इसकी टॉक्सिसिटी धीरे-धीरे विकसित होती है। इसका डोज अधिक लेने से
- मतली
- ज्यादा प्यास
- मांसपेशियों में कमजोरी और
- भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
डॉ. पाहुजा बताते हैं कि कई बार लोग विटामिन डी को बॉडी के लिए बेहद जरूरी मानकर डेली सप्लीमेंट लेते रहते हैं, जबकि उन्हें वीकली लेना चाहिए था। डॉक्टर ने बताया कि डॉक्टर द्वारा बताए गए समय से ज्यादा समय तक विटामिन डी का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
कितने समय तक विटामिन डी का सेवन सुरक्षित माना जाता है ?
डॉ. पाहुजा के अनुसार विटामिन D सप्लीमेंट सिर्फ डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें। डॉक्टर के द्वारा बताए गए समय से ज्यादा इसका सेवन करना सुरक्षित नहीं है। डॉक्टर से मेंटेनेंस डोज़ के बारे में पूछना बेहद जरूरी है। भारत में आमतौर पर 1000–1500 IU/दिन मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त होता है।
विटामिन D टॉक्सिसिटी के शुरुआती संकेत क्या हैं?
डॉ. पाहुजा बताते हैं कि विटामिन डी का सेवन कब आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगता है उसे बॉडी में दिखने वाले लक्षणों के मुताबिक समझना जरूरी है। विटामिन डी सप्लीमेंट का हाई डोज लेने के बॉडी में कुछ साइड इफेक्ट दिखते हैं जैसे
- बार-बार पेशाब आना
- ज्यादा प्यास लगना
- पेट में दर्द
- हड्डियों और शरीर में दर्द
- ऐसे लक्षण दिखने पर आपको तुरंत जांच करानी चाहिए। कुछ मामलों में ब्लड कैल्शियम और फास्फोरस टेस्ट भी जरूरी होता है।
विटामिन D की जांच कितनी बार करानी चाहिए?
डॉ. शिवाने के अनुसार विटामिन डी की जांच सप्लीमेंट शुरू करने से पहले कराएं। फिर 8–12 हफ्तों बाद दोबारा टेस्ट करें। जब विटामिन डी का स्तर स्थिर हो जाए, तो साल में एक बार जांच काफी है शुरुआत में 10–12 हफ्तों तक 60,000 IU/सप्ताह लेने के बाद मेंटेनेंस डोज़ पर आ सकते हैं। साल में एक बार जांच करके सुनिश्चित करें कि स्तर सामान्य बना हुआ है या नहीं।
विटामिन डी के लिए रोज कितनी देर धूप में बैठें
डॉ. पाहुजा के अनुसार बॉडी में विटामिन डी के स्तर को बनाएं रखने के लिए रोजाना 45–60 मिनट धूप लेना फायदेमंद है। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच धूप लेना ज्यादा फायदेमंद है। धूप लेते समय ध्यान दें कि धूप शरीर के ज्यादा हिस्से पर पड़नी चाहिए। कोहनी के नीचे दोनों हाथ, घुटने के नीचे दोनों पैरों पर, गर्दन और चेहरा पूरी तरह धूप के संपर्क में रहे। इन हिस्सों पर सनस्क्रीन या लोशन न लगाएं, ताकि धूप का पूरा फायदा मिल सके
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई दिनचर्या या इलाज को शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
