आमतौर पर माना जाता है कि अंडे, मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने वालों में विटामिन B12 की कमी नहीं होती। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है। कई लोगों में पर्याप्त B12 युक्त खाद्य पदार्थ लेने के बावजूद इस विटामिन की कमी हो सकती है। इसकी वजह केवल डाइट नहीं, बल्कि शरीर में विटामिन B12 के सही तरीके से अवशोषित न हो पाना भी हो सकता है। आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक, शरीर में B12 को अवशोषित होने के लिए पाचन तंत्र के साथ-साथ इंट्रिन्सिक फैक्टर (Intrinsic Factor) नामक प्रोटीन की भी जरूरत होती है। यह प्रोटीन पेट में बनता है और B12 को छोटी आंत में अवशोषित होने में मदद करता है। अगर शरीर पर्याप्त इंट्रिन्सिक फैक्टर नहीं बना रहा है या पाचन तंत्र में किसी तरह की समस्या है, तो भोजन या सप्लीमेंट से मिलने वाला B12 शरीर में पर्याप्त मात्रा में अवशोषित नहीं हो पाता।
इसके अलावा, पेट में एसिड का कम होना, पेट या आंतों से जुड़ी कुछ बीमारियां और कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी B12 के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में केवल B12 से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने या सप्लीमेंट लेने से समस्या पूरी तरह दूर नहीं होती। अगर बार-बार B12 की कमी सामने आ रही है, तो डॉक्टर से इसकी वजह की जांच कराना और उनकी सलाह के अनुसार उपचार लेना जरूरी है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी होने पर कौन कौन से लक्षण दिखते हैं और इसका उपचार कैसे किया जा सकता है।
विटामिन B12 क्यों है बॉडी के लिए जरूरी
विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं बनाने, नसों के सामान्य कामकाज और DNA निर्माण के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर शुरुआत में थकान, कमजोरी या हाथ-पैर में झुनझुनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। लंबे समय तक गंभीर कमी रहने पर नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं और कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल नुकसान पूरी तरह ठीक न भी हो पाए। इसलिए लगातार लक्षण रहने पर जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
विटामिन बी 12 की कमी के बॉडी में लक्षण
हाथ-पैर में झुनझुनी और सुन्नपन
B12 की कमी का एक महत्वपूर्ण लक्षण हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन या चींटी चलने जैसा एहसास हो सकता है। कुछ लोगों को पैरों या हाथों में जलन या गर्मी महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि B12 की गंभीर कमी नसों के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ रहे हों तो B12 की जांच के साथ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
हर समय थकान और कमजोरी
विटामिन B12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से कुछ लोगों में megaloblastic anemia हो सकता है, जिसमें शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके कारण लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।
याददाश्त और एकाग्रता पर असर
B12 की कमी कुछ लोगों में ध्यान लगाने में परेशानी, मानसिक सुस्ती या याददाश्त से जुड़ी दिक्कतों से भी जुड़ी हो सकती है। हालांकि, भूलने की समस्या के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल याददाश्त कमजोर होने को B12 की कमी का संकेत मानना सही नहीं है। लगातार समस्या रहने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
जीभ में सूजन और मुंह के छाले
B12 की कमी में ग्लोसाइटिस यानी जीभ में सूजन, लालिमा या दर्द हो सकता है। कुछ लोगों में मुंह में छाले भी हो सकते हैं। हालांकि, मुंह के छाले कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर B12 की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मूड में बदलाव भी हो सकता है संकेत
विटामिन B12 की कमी को कुछ मानसिक और न्यूरोलॉजिकल लक्षणों से भी जोड़ा गया है। कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव या अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लेकिन एंग्जायटी या डिप्रेशन का केवल B12 की कमी से होना जरूरी नहीं है। ऐसे लक्षणों में डॉक्टर से उचित मूल्यांकन कराना बेहतर है।
बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी कैसे करें पूरी
दूध B12 का अच्छा स्रोत है
दूध और अन्य डेयरी उत्पाद विटामिन B12 के नेचुरल स्रोत हैं। एक गिलास दूध से मिलने वाला B12 उसकी मात्रा और ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए दूध को B12 का स्रोत माना जा सकता है, लेकिन केवल दूध पीने से गंभीर B12 की कमी का इलाज नहीं किया जा सकता।
खजूर B12 का स्रोत नहीं है
खजूर में विटामिन B12 नहीं पाया जाता। इसमें प्राकृतिक शुगर के साथ कुछ फाइबर, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं। इसलिए खजूर को B12 की कमी पूरी करने वाला खाद्य पदार्थ बताना सही नहीं है। यह सामान्य संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन B12 के लिए दूध, अंडे, मांस, मछली या फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ ज्यादा बेहतरीन स्रोत हैं।
बादाम से मिलते हैं कई पोषक तत्व
बादाम में विटामिन E, मैग्नीशियम, कुछ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि बादाम B12 का महत्वपूर्ण स्रोत नहीं है। इसलिए दूध, खजूर और बादाम से बने ड्रिंक को B12 की कमी का इलाज या B12 बूस्टर कहना सही नहीं होगा।
दूध-खजूर-बादाम ड्रिंक से करें बी 12 की कमी पूरी?
इस ड्रिंक के लिए करीब 200–250 ml हल्का गर्म दूध, 2 भीगे हुए खजूर और 5 भीगे हुए बादाम लिए जा सकते हैं। खजूर की गुठली निकालकर और बादाम का छिलका उतारकर सभी चीजों को ब्लेंड करके ड्रिंक तैयार किया जा सकता है। यह एक पौष्टिक ड्रिंक हो सकता है, लेकिन इसे B12 की कमी के उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लेना चाहिए।
क्या इसे खाली पेट लेना जरूरी है?
इस ड्रिंक को सुबह लेना जरूरी नहीं है और न ही इसे खाली पेट लेने से B12 का अवशोषण बढ़ने का कोई विशेष प्रमाण है। इसे अपनी सुविधानुसार नाश्ते के साथ या दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को दूध से गैस, पेट फूलना या लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या है, तो उसे खास सावधानी रखनी चाहिए।
गंभीर B12 कमी में केवल डाइट पर्याप्त नहीं
अगर B12 का स्तर बहुत कम है या व्यक्ति को हाथ-पैर में लगातार सुन्नपन, चलने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण हैं, तो केवल घरेलू ड्रिंक पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है। कुछ मामलों में B12 इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है, खासकर जब शरीर B12 को ठीक से अवशोषित नहीं कर पा रहा हो।
B12 की कमी का पता लगाने के लिए जरूरी जांच
B12 की कमी का पता लगाने के लिए डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के साथ serum vitamin B12 की जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर CBC, methylmalonic acid (MMA) और homocysteine जैसी जांचें भी कराई जा सकती हैं। रिपोर्ट की व्याख्या हमेशा व्यक्ति के लक्षणों और अन्य जांचों के साथ की जानी चाहिए।
किन लोगों को B12 की कमी का ज्यादा खतरा?
शाकाहारी और खासकर वीगन डाइट लेने वाले लोगों में B12 की कमी का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने पर B12 का अवशोषण कम होना, पेट या आंतों की कुछ बीमारियां, गैस्ट्रिक/बैरिएट्रिक सर्जरी और लंबे समय तक कुछ दवाओं का इस्तेमाल भी जोखिम बढ़ा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सा सिद्धांतों और विशेषज्ञों के सुझावों पर आधारित है। शरीर में किसी भी विटामिन की कमी, थकावट या नसों से जुड़ी समस्या महसूस होने पर खुद दवा या सप्लीमेंट लेने के बजाय किसी योग्य डॉक्टर से ब्लड टेस्ट और परामर्श जरूर लें।
