Dengue vs viral fever: बरसात का मौसम शुरू होते ही बुखार के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। ज्यादातर लोग इसे सामान्य वायरल बुखार मानकर घरेलू इलाज या सामान्य दवाओं से ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार यही बुखार डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। शुरुआत में वायरल बुखार और डेंगू के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं, लेकिन समय पर पहचान न हो तो डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि वायरल बुखार और डेंगू में क्या अंतर है, जांच कब करानी चाहिए और किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मैक्योर अस्पताल के कंसल्टेंट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक कुमार बताते हैं कि सामान्य वायरल बुखार अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें शरीर को आराम, पर्याप्त पानी और जरूरत पड़ने पर हल्की दवाओं की ही आवश्यकता होती है। ज्यादातर मामलों में किसी विशेष जांच की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं, डेंगू एक खास वायरस से होने वाली बीमारी है, जो शरीर पर गहरा असर डाल सकती है। डॉ. कुमार के मुताबिक, डेंगू में केवल लक्षणों के आधार पर इलाज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए विशेष जांच कराना बेहद जरूरी होता है।

डेंगू की जांच वायरल बुखार से कैसे अलग है?

सामान्य वायरल बुखार में डॉक्टर मरीज की हालत देखकर ही इलाज शुरू कर देते हैं। लेकिन डेंगू की पुष्टि के लिए खून की खास जांच की जाती है। बुखार के शुरुआती दिनों में NS1 एंटीजन टेस्ट किया जाता है, जिससे डेंगू का जल्दी पता चल सकता है। कुछ दिनों बाद IgM और IgG एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं, जिससे यह पता चलता है कि संक्रमण नया है या पहले हो चुका है। डॉ. प्रतीक कुमार बताते हैं कि अगर बुखार 2–3 दिन से ज्यादा बना रहे, प्लेटलेट्स गिरने लगें या हेमाटोक्रिट बढ़ने लगे, तो खासकर बरसात और उसके बाद के मौसम में डेंगू की जांच जरूर करानी चाहिए।

डेंगू क्यों बन जाता है ज्यादा खतरनाक?

डेंगू केवल बुखार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के अंदर गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। डॉ. कुमार के अनुसार, डेंगू वायरस बोन मैरो को प्रभावित करता है, जिससे प्लेटलेट्स बनना कम हो जाते हैं। साथ ही यह नसों को कमजोर कर देता है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ का रिसाव होने लगता है। इसलिए डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकती हैं और शरीर में सूजन, अंदरूनी रक्तस्राव और शॉक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसके विपरीत, सामान्य वायरल बुखार में ऐसी जटिलताएं आमतौर पर नहीं होतीं और मरीज कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

डेंगू के शुरुआती संकेत

डेंगू के कुछ लक्षण इसे सामान्य वायरल बुखार से अलग बनाते हैं। डॉ. प्रतीक कुमार बताते हैं कि तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द डेंगू के आम लक्षण हैं। इसी कारण इसे ब्रेकबोन फीवर भी कहा जाता है। डॉ. प्रतीक के अनुसार, डेंगू होने पर कुछ खतरनाक संकेत सामने आ सकते हैं, जैसे – बार-बार या लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, बिना चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना या फिर काले रंग का मल आना। वहीं, अगर बुखार उतरने के बाद अचानक कमजोरी बढ़ जाए, पेशाब कम हो जाए या बेचैनी महसूस हो, तो यह बेहद गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉ. प्रतीक कुमार कहते हैं, अगर शुरुआत में ही डेंगू का पता चल जाए, तो मरीज की कड़ी निगरानी, सही फ्लूइड मैनेजमेंट और समय पर इलाज से हालात बिगड़ने से रोके जा सकते हैं। बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों में डेंगू का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए इन वर्गों में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।

निष्कर्ष

बुखार को हल्के में लेना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। अगर बुखार लंबा खिंच रहा है, शरीर में असामान्य लक्षण दिख रहे हैं या प्लेटलेट्स गिरने की आशंका है, तो तुरंत जांच कराना बेहद जरूरी है। सही समय पर सही कदम न सिर्फ बीमारी को गंभीर होने से रोकते हैं, बल्कि जान भी बचा सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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