Vijaysar Wood Benefits for Diabetes: विजयसार, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Pterocarpus marsupium कहा जाता है। ये एक औषधीय पौधा है जिसका सेवन कई तरह की बीमारियों का इलाज करने में किया जाता रहा है।आयुर्वेद में विजयसार का उपयोग प्राचीन समय से डायबिटीज, पाचन से जुड़ी परेशानियों और स्किन की समस्याओं का इलाज करने में किया जाता रहा है। इसकी लकड़ी, छाल और हार्टवुड औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। इसमें फ्लेवोनॉइड्स, टैनिन्स, अल्कलॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स जैसे बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव रखते हैं। विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में पानी पीने की परंपरा सदियों पुरानी है। आयुर्वेद के मुताबिक इस लकड़ी का पानी पीने से ब्लड में शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है।

परंपरागत रूप से इसकी लकड़ी से बने गिलास में रात भर पानी रखकर सुबह खाली पेट पिया जाता है। माना जाता है कि इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है। कुछ प्रायोगिक (एनिमल) अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि विजयसार पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं के कार्य को सपोर्ट कर सकता है और इंसुलिन स्राव को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसे डायबिटीज का पूर्ण उपचार नहीं माना जाता और दवाइयों की जगह इस पानी का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

इंफेक्शियस डिज़ीज़ेस और इम्यूनोलॉजी के एक्सपर्ट, मेडिकल एजुकेटर और क्लिनिकल प्रैक्टिशनर डॉ. प्रोफेसर मृदुल मेहरोत्रा ने बताया आयुर्वेद में इस लकड़ी को लिवर के लिए टॉनिक, घाव भरने और शरीर की सूजन कंट्रोल करनी की दवा के रूप में सेवन किया जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कैसे इस लकड़ी का पानी डायबिटीज कंट्रोल करता है और इससे कौन कौन से फायदे होते हैं, मेडिकल साइंस इस पर क्या कहती है वो भी जान लेते हैं।

विजयसार कैसे डायबिटीज कंट्रोल करती है?

ब्लड शुगर कंट्रोल करने में विजयसार की लकड़ी बेहद मददगार साबित होती है। विजयसार की लकड़ी में फ्लेवोनॉइड्स, अल्कलॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं। जानवरों पर की गई कुछ रिसर्च में पाया गया है कि ये तत्व इंसुलिन सिक्रेशन को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक ये पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को मरने से बचाने और उनके कामों को सपोर्ट करने में मददगार हो सकता है। इसका सेवन करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है। नियमित सेवन से शरीर की इंसुलिन उपयोग करने की क्षमता बेहतर हो सकती है, जिससे ब्लड ग्लूकोज लेवल संतुलित रखने में मदद मिलती है।

Indian Journal of Medical Research (ICMR) और कई दूसरे अध्ययनों के अनुसार विजयसार में मौजूद एपिकेटचिन (Epicatechin) नामक तत्व पैंक्रियाज की बीटा-कोशिकाओं को फिर से सक्रिय या पुनर्जीवित करने में मदद कर सकती है। ये कोशिकाएं इंसुलिन बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये हेल्दी होती हैं, तो शरीर प्राकृतिक रूप से बेहतर इंसुलिन का उत्पादन कर पाता है।

विजयसार की लकड़ी में अगर रात को पानी डाल दें तो सुबह तक इस पानी का रंग नारंगी हो जाता है। इस पानी में लकड़ी में मौजूद एल्कोलाइड,फ्लोवोनाइड और ग्लाकोसाइड घुल जाते हैं । सुबह के समय इस पानी का सेवन करने से इंसुलिन सिक्रेशन बढ़ता है। एक्सपर्ट ने बताया ये पानी डायबिटीज का ट्रीटमेंट नहीं है बल्कि सपोर्टिव उपाय है। मरीजों को अपनी दवाइयां डॉक्टर की सलाह के बिना बंद नहीं करनी चाहिए।

लिवर के लिए भी है असरदार

आयुर्वेद के अनुसार कड़वे तत्व लिवर और पैंक्रियाज को सक्रिय करने में मदद करते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर हो सकता है। विजयसार की लकड़ी के गिलास में रात भर पानी भरकर रखें और सुबह खाली पेट पिएं। चाहें तो डिनर से पहले भी सेवन कर सकते हैं। कड़वे फाइटोकेमिकल्स लिवर एंज़ाइम्स और बाइल यानी पित्त स्राव को सपोर्ट कर सकते हैं। बाइल बेहतर फैट डाइजेशन में मदद करता है। विजयसार में फ्लेवोनॉइड्स व टैनिन्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मददगार होते हैं। इससे लिवर कोशिकाओं को संरक्षण मिलता है। इस लकड़ी के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण लिवर की सूजन कम करने में मददगार होते हैं।

पाचन क्रिया को करता है टोन

इस लकड़ी के कड़वे तत्व गैस्ट्रिक जूस और पाचक एंजाइम के स्राव को उत्तेजित कर सकते हैं, जिससे भूख और पाचन बेहतर हो सकता है। इसका सेवन करने से मोशन कंट्रोल हो सकते हैं। बेहतर पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण से समग्र मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है।

इन बातों का रखें ध्यान

ये उपाय डॉक्टर की सलाह के साथ ही अपनाएं।
गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।

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डिस्क्लेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।