बॉलीवुड के ‘न्यू एज एक्शन हीरो’ के रूप में मशहूर Vidyut Jammwal ने जनरल शिफ्ट में काम करने वाले डेस्क जॉब वर्कर्स को फिट और फाइन रहने की सलाह दी है। उन्होंने कुछ आसान और व्यावहारिक टिप्स साझा करते हुए बताया कि फिट रहने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी नहीं है। न ही आपको लंबे समय तक एक्सरसाइज करने का कोई मुश्किल लक्ष्य बनाने की जरूरत है। एक्टर के अनुसार, वे खुद जब समय मिलता है तभी वर्कआउट करते हैं, और जब समय नहीं मिलता तो इसे लेकर किसी तरह का गिल्ट महसूस नहीं करते। हालांकि 9 से 6 की नौकरी करने वाले लोगों के लिए उन्होंने एक खास फिटनेस मंत्र दिया है।

जामवाल का कहना है कि वर्किंग लोगों को फिट रहने के लिए एक सिंपल और रियलिस्टिक लक्ष्य तय करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति एक महीने में 5 किलो वजन कम करना चाहता है, तो वह अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना चलने का लक्ष्य तय कर सकता है, चाहे वह 10 किलोमीटर हो या सिर्फ 1 किलोमीटर। उन्होंने Tata Play Fitness के ‘Fit and Famous’ शो में कहा अपनी जरूरत के हिसाब से टाइम टेबल बनाइए और उसे हर हाल में फॉलो कीजिए। अगर आपने तय किया है कि सुबह 1 किलोमीटर चलना है तो जरूर चलें। अगर आप इतना कर लेते हैं, तो आप कभी अनफिट नहीं होंगे। अब सवाल यह है कि एक्टर का यह फिटनेस मंत्र कितना असरदार है, आइए इसे डॉक्टर की नजर से समझते हैं।

 Vidyut Jammwal के फिटनेस मंत्र की सच्चाई

KIMS हॉस्पिटल्स, ठाणे में कंसल्टेंट आर्थ्रोस्कोपी Dr Swapnil Zambare भी इससे सहमत हैं कि फिटनेस कभी-कभार किए गए भारी-भरकम प्रयासों से नहीं बनती, बल्कि रोज किए जाने वाले कामों से बनती है। उन्होंने बताया एक स्ट्रक्चर रूटीन शरीर को धीरे-धीरे और बेहतर तरीके से ढलने में मदद करती है। रोज थोड़ा-बहुत मूवमेंट भी, अगर नियमित रूप से किया जाए तो जोड़ों का लचीलापन, मांसपेशियों की ताकत, दिल की सेहत और स्टेमिना को बेहतर बनाया जा सकता है। असली जोखिम तब होता है जब लोग लंबे समय तक बिल्कुल एक्टिव नहीं रहते और फिर अचानक बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने लगते हैं जिससे थकान या चोट लग सकती है।

9 से 6 वाली तय समय वाली लाइफ में फिटनेस क्यों आसान हो सकती है?

डॉ. जांबरे के अनुसार जिन लोगों का शेड्यूल फिक्स होता है, वे प्लान बनाकर ज्यादा आसानी से फिट रह सकते हैं। अगर आप कोई स्पष्ट और समय-सीमा वाला लक्ष्य तय करते हैं जैसे कुछ किलो वजन कम करना या चलने की क्षमता बढ़ाना तो इससे फोकस और जिम्मेदारी दोनों बढ़ते हैं। आप 1 किमी चलें या 10 किमी, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जरूरी यह है कि आप जो तय करें उसे निभाएं।

क्या सिर्फ वॉकिंग से फिट रहा जा सकता है?

एक्टर ने फिट रहने के लिए वॉकिंग को बेस्ट बताया है लेकिन क्या सिर्फ वॉकिंग से फिट रहा जा सकता है। डॉक्टर ने बताया हां वॉकिंग से फिट रहा जा सकता है, अगर इसे नियमित और सही तरीके से किया जाए। वॉकिंग एक लो-इम्पैक्ट और जोड़ों के लिए सुरक्षित एक्सरसाइज है, जो हर उम्र के लोगों के लिए सही है। रोज चलने से जोड़ों की सेहत बेहतर रहती है, वजन कंट्रोल में रहता है, ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और शरीर में जकड़न कम होती है। समय के साथ आप इसकी स्पीड और दूरी बढ़ा सकते हैं, लेकिन रोज की वॉक ही मजबूत फिटनेस की नींव रखती है।

टाइम टेबल क्यों जरूरी है?

जब आप फिटनेस को एक जरूरी काम की तरह लेते हैं, न कि एक ऑप्शन की तरह तो उसे निभाना आसान हो जाता है। सुबह की वॉक, ऑफिस के बाद स्ट्रेचिंग या शाम की एक्सरसाइज का टाइम को आप अपनी आदत बना सकते हैं। एक बार आदत बन जाए, तो मोटिवेशन की जरूरत कम पड़ती है और डिसिप्लिन काम करता है।

छोटे लक्ष्य ज्यादा असरदार क्यों?

छोटे और हासिल किए जा सकने वाले लक्ष्य, बड़े और मुश्किल लक्ष्यों से ज्यादा प्रभावी होते हैं। रोज 1 किलोमीटर चलना बिना चूके, लंबे समय में ज्यादा फायदा देता है बनिस्बत ऐसे प्लान के जो आप निभा ही न सकें। इससे मांसपेशियां एक्टिव रहती हैं, जोड़ों में लचीलापन बना रहता है और शरीर का पोस्चर भी सही रहता है।

फिटनेस में सबसे बड़ी गलती क्या है?

डॉ. जांबरे के अनुसार बहुत ज्यादा, बहुत जल्दी करने की कोशिश करना सबसे बड़ी गलती है। फिटनेस का मतलब पहले दिन अपनी ताकत साबित करना नहीं, बल्कि हर दिन लगातार प्रयास करना है। ऐसा रूटीन अपनाएं जो आपकी लाइफस्टाइल में फिट बैठे और जिसे आप पूरे साल निभा सकें। एक्सपर्ट के मुताबिक रोजाना दोहराया जाने वाला प्लान ही शरीर को एक्टिव, लचीला और मजबूत बनाए रखने के लिए काफी है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख सार्वजनिक जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी नई फिटनेस रूटीन को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।