भारतीय रसोई में सदियों से देसी घी का इस्तेमाल भोजन, पारंपरिक व्यंजनों, आयुर्वेद और धार्मिक कार्यों में होता रहा है। वहीं पिछले कुछ दशकों में कम कीमत और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण वनस्पति घी जैसे डालडा का चलन भी बढ़ा है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या देसी घी और वनस्पति घी सेहत के लिए एक जैसे फायदेमंद हैं, या फिर दोनों में से कौन-सा विकल्प स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर माना जाता है।

गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर, कानपुर के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक देसी घी गाय या भैंस के दूध से तैयार किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रूप से सैचुरेटेड फैट, वसा में घुलनशील विटामिन A, D, E और K मौजूद होता है। इसके अलावा घी में दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। सेहत के लिए फायदेमंद है फिर भी डॉक्टर इसका सीमित सेवन करने की सलाह देते हैं। दूसरी तरफ वनस्पति घी की बात करें तो इसे वनस्पति तेलों जैसे सोयाबीन, पाम (ताड़), कपास के बीज या दूसरे वनस्पति ऑयल से बनाया जाता है। इन तेलों को प्रोसेस करके घी जैसी बनावट दी जाती है। इसे कई जगह वेजिटेबल घी या डालडा भी कहा जाता है।

देसी घी और वनस्पति घी में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

देसी घी में मुख्य रूप से सैचुरेटेड फैट होता है, जबकि वनस्पति घी में ट्रांस फैट हो सकता है, अगर ये घी खासतौर पर हाइड्रोजेनेटेड तेल (Partially Hydrogenated Oil) से बना हो तो। दोनों घी के बीच यहीं सबसे बड़ा अंतर है। डॉक्टर ट्रांस फैट को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते है। ये दिल की सेहत के लिए खतरा है। इस घी का सेवन करने से  खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर कम हो सकता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में ट्रांस फैट का सेवन करने से दिल के रोग, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

क्या देसी घी पूरी तरह सुरक्षित है?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को घी से एलर्जी या कोई विशेष चिकित्सा समस्या नहीं है, तो रोजाना सीमित मात्रा में लगभग 1 चम्मच गाय के घी का सेवन सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। देसी घी में ट्रांस फैट न के बराबर होता है, लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है। इसलिए इसका अत्यधिक सेवन भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है। डॉक्टर देसी घी का सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं। देसी घी और पारंपरिक हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति घी के बीच देसी घी को बेहतर विकल्प माना जाता हैं।

डॉ. मिश्रा के अनुसार घी आंतों की कोशिकाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और पाचन प्रक्रिया को सुचारू रखने में मदद कर सकता है। इसका सेवन करने से बॉडी को एनर्जी मिलती है और बॉडी गर्म रहती है। सर्दी में घी का सेवन खासतौर पर करने की सलाह दी जाती है। घी में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जिनमें सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। अक्सर लोगों को सर्दी में जोड़ों के दर्द और अकड़न की शिकायत होती है ऐसे में घी का सेवन जोड़ों और हड्डियों की सेहत को सहारा दे सकता है। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों ही घी को सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं। घी में मौजूद हेल्दी फैटी एसिड मस्तिष्क के कामों को सपोर्ट देते हैं। ये मानसिक स्पष्टता, याददाश्त और एकाग्रता के लिए लाभकारी माना गया है।

क्या कहती है गाइड लाइन

ICMR-NIN के अनुसार डाइट में किसी एक तरह के फैट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से संतुलित मात्रा में फैट लेना चाहिए। सैचुरेटेड फैट का सेवन सीमित रखें और ट्रांस फैट से जितना हो सके बचें। WHO के मुताबिक ट्रांस फैट का सेवन कुल दैनिक ऊर्जा का 1% से कम होना चाहिए। ट्रांस फैट हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है, इसलिए इससे बचना चाहिए। FSSAI ने भी खाद्य उद्योग में ट्रांस फैट की मात्रा कम करने के लिए नियम बनाए हैं और उपभोक्ताओं को पैकेट पर Partially Hydrogenated Vegetable Oil या ट्रांस फैट की जानकारी पढ़कर उत्पाद चुनने की सलाह दी जाती है।

दिल के लिए क्यों वनस्पति घी से दूरी जरूरी है?

डॉक्टरों के मुताबिक, हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति घी में मौजूद ट्रांस फैट हमारी धमनियों (arteries) को ब्लॉक कर सकता है। इससे न केवल दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ता है, बल्कि यह शरीर में सूजन (inflammation) को भी बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, देसी घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड (Butyric Acid) हमारी आंतों और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। देसी घी का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और पाचन दुरुस्त रहता है। वनस्पति घी में मौजूद ट्रांस फैट से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। ट्रांस फैट आपको दूसरे फूड्स के मुकाबले ज़्यादा मोटा करता है बेशक दोनों में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो। वनस्पति घी का सेवन कमर और पेट के आसपास अधिक फैट बढ़ता है।

देसी घी और वनस्पति घी दोनों का कितना सेवन करें?

देसी घी और वनस्पति घी में, सीमित मात्रा में देसी घी को आमतौर पर बेहतर विकल्प माना जाता है। देसी घी प्राकृतिक रूप से दूध से बनाया जाता है और इसमें वसा में घुलनशील विटामिन तथा लाभकारी फैटी एसिड पाए जाते हैं। वहीं पारंपरिक वनस्पति घी हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल ऑयल में ट्रांस फैट हो सकता है, जो दिल के रोग, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम को बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में देसी घी का सेवन अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार के घी का सेवन आपकी उम्र, स्वास्थ्य, कोलेस्ट्रॉल स्तर और अन्य चिकित्सा स्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। यदि आपको हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या डायबिटीज है, तो अपने डॉक्टर या क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के अनुसार ही घी का सेवन करें।