नहाने से पहले पेशाब कर लेना बेसिक हाइजीन बनाए रखने की एक सामान्य आदत मानी जाती है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो नहाने से पहले पेशाब कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही शॉवर के नीचे जाते हैं, उन्हें दोबारा पेशाब का एहसास होने लगता है। पेशाब आना नॉर्मल है जो कभी भी किसी को भी आ सकता है लेकिन सवाल ये उठता है कि हर बार नहाते समय पेशाब आना क्या कोई बीमारी है। एक्सपर्ट के मुताबिक ज्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के बीच बनने वाली एक नॉर्मल एक्टिविटी है। बाल एवं किशोर मनोचिकित्सा में एसोसिऐट कंसल्टेंट  डॉ. पवित्रा शंकर ने बताया पानी का स्पर्श, खासकर ठंडे या गुनगुने पानी का स्पर्श शरीर के नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है। इससे ब्लैडर (मूत्राशय) की मांसपेशियां प्रतिक्रिया देने लगती हैं और पेशाब का दबाव महसूस हो सकता है।

साइकेट्रिस्ट बताती हैं नहाते समय पेशाब आने की समस्या कई बार कंडीशन्ड रिस्पॉन्स के कारण होती है। यदि कोई व्यक्ति हमेशा से ही बाथरूम में जाते ही पेशाब करता रहा है, तो दिमाग उस वातावरण को पेशाब से जोड़ लेता है। जैसे ही व्यक्ति शॉवर ऑन करता है या पानी की आवाज सुनता है तो दिमाग ब्लैडर को सिग्नल भेज देता है।

मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

डॉ.के अनुसार ये समस्या केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक पैटर्न से भी जुड़ी हो सकती है। इसे व्यवहारिक आदत कहा जाता है। जिस तरह कुछ लोगों को सोने से पहले मोबाइल देखने की आदत होती है, उसी तरह कुछ लोगों में बाथरूम का माहौल पेशाब की इच्छा को ट्रिगर कर देता है। यह स्थिति आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर व्यक्ति को हर बार अचानक और तेज दबाव महसूस हो या पेशाब कंट्रोल करने में कठिनाई हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मशहूर मनोवैज्ञानिक इवान पावलोव की थ्योरी के अनुसार हमारा दिमाग “ट्रिगर” पर काम करता है। रिसर्च बताती है कि पानी के गिरने की आवाज़ (Running Water) और पेशाब करने के बीच एक गहरा न्यूरोलॉजिकल संबंध है। दिमाग इस आवाज़ को ब्लैडर खाली करने के सिग्नल के रूप में रजिस्टर कर लेता है। इसे पावलोवियन रिस्पॉन्स कहा जाता है।

नहाते समय पेशाब आने के लिए शरीर से जुड़े कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार जैसे

  • ओवरएक्टिव ब्लैडर
  • यूरिन इन्फेक्शन (UTI)
  • ज्यादा पानी पीना
  • ठंड के कारण ब्लैडर पर दबाव
  • पेल्विक मसल्स की कमजोरी
  • अगर बार-बार पेशाब आना, पेशाब में जलन होना, दर्द या बार-बार बाथरूम जाने की समस्या हो तो ऐसी स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ब्लैडर और UTI से जुड़ी परेशानी में यूरोलॉजिस्ट (Urologist) की सलाह लें।

नहाते समय पेशाब करने की आदत क्या बदली जा सकती है?

  • विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह केवल आदत या मानसिक पैटर्न की वजह से हो रहा है, तो कुछ आसान उपायों से इस आदत को कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ टिप्स अपनाकर आप अपनी इस आदत को बदल सकते हैं। अगर आप  
  • नहाने से पहले एक बार पेशाब करें तो आपको नहाते समय पेशाब नहीं आएगा।
  • ब्लैडर ट्रेनिंग एक्सरसाइज अपनाएं पानी की आवाज या शॉवर ट्रिगर को धीरे-धीरे कंट्रोल करें
  • पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (कीगल एक्सरसाइज) करें। ये एक्सरसाइज पुरुष और महिलाएं दोनों कर सकते हैं। 
  • जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ लेने से बचें

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी?

यदि पेशाब पर कंट्रोल कम हो रहा हो, बार-बार लीकेज हो रहा हो या दर्द और जलन महसूस हो रही हो, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। यह किसी संक्रमण या ब्लैडर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक नहाते समय पेशाब आना ज्यादातर मामलों में सामान्य व्यावहारिक प्रक्रिया है, लेकिन यदि इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखें तो समय पर जांच कराना जरूरी है।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। लेख में दी गई सलाह पेशेवर चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी शारीरिक या मानसिक समस्या के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।