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राजधानी के श्मशानों में अपनों का इंतजार कर रहीं लाशें

तमाम इंतजामों के बाद भी दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों और मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 20, 2021 6:38 AM
corona vaccine, corona virusनई दिल्ली के एक कोविड सेंटर पर मरीज के हालचाल लेता कर्मचारी। फोटो- पीटीआई

तमाम इंतजामों के बाद भी दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों और मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि राजधानी के सभी कब्रिस्तानों-श्मशानों, मुर्दाघरों में अंतिम संस्कार के इंतजार में लाशों की लंबी लाइन और ढेर लगते जा रहे हैं। बढ़ते मौत के मामलों से श्मशान घाटों व शवदाह गृहों पर दवाब बढ़ गया है।

दिल्ली में प्रतिदिन 200 तक अंतिम संस्कार केवल कोरोना से मृतकों के हो रहे हैं जबकि सामान्य तौर पर भी करीब 100 अंतिम संस्कार हो रहे हैं। मौत के बढ़ते मामलों से लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए निगम बोध घाट में 20 नए प्लेटफार्म बनाने का कार्य शुरू हो गया है। इससे यहां पर कुल 140 प्लेटफार्म हो जाएंगे। इससे मौत के मामले बढ़ने पर लोगों शवदाह के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

दिल्ली में शवों के दाह संस्कार की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम के अधीन आती हैं। दिल्ली नगर निगम के इन तीन अलग-अलग हिस्सों के अंदर नौ जोन हैं। इन तीनों निगमों के कार्यक्षेत्र में अलग-अलग 21 श्मशान घाट और कब्रिस्तान मौजूद हैं। दिल्ली में सबसे बड़े श्मशान घाटों में निगमबोध (उत्तरी जोन), पंचकुईंया रोड, नगर निगम दक्षिणी क्षेत्र में पंजाबी बाग, लोधी रोड श्मशान घाट और आईटीओ स्थित कब्रिस्तान, पूर्वी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में सीमापुरी श्मशान घाट और बुलंद मस्जिद कब्रिस्तान को सबसे बड़ा माना जाता है। कोरोना काल में इन सभी स्थानों पर कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार का विशेष इंतजाम किया गया है। इसके बाद भी कोरोना संक्रमितों की मौत में घंटों के हिसाब से हो रही वृद्धि ने तमाम इंतजामों को बदहाली में ला खड़ा किया है।

रविवार को दिल्ली के तीनो निगमों के घाटों, कब्रिस्तानों और क्रिश्चियन घात पर करीब 290 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। यह एक दिन में अधिकतम संख्या है। हालात यहां तक पहुंच चुके है कि मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर जगह नहीं मिल रही। ऐसे में अनेक कोरोना पीड़ितों के शवों का संस्कार पार्किंग के लिए खाली पड़ी जमीन पर कराया जा रहा है। दिल्ली के सीमापुरी श्मशान घाट पर पार्किंग की जमीन पर अब तक 15 से अधिक शवों का संस्कार किया जा चुका है। पूर्वी दिल्ली के पांच कोविड श्मशान और कब्रिस्तान में सबसे ज्यादा विकट हालात सीमापुरी श्मशान घाट पर देखने को मिल रहे है। कोविड के 12 प्लेटफॉर्म भी यहां कम नजर आ रहे हैं।

जबकि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के निगम बोध संचालन समिति के अध्यक्ष सुमन गुप्ता के मुताबिक शुरूआत में हमने 20 प्लेटफार्म आरक्षित किए थे, लेकिन जिस तेजी से लोगों की कोरोना से मौत हो रही उससे कोरोना के मृतकों के अंतिम संस्कार की संख्या भी बढ़ रही है। इसको देखते हुए अभी 120 में 55 प्लेटफार्म कोरोना से मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए आरक्षित किए गए हैं।

चूंकि यह संख्या और आगे बढ़ सकती है इसलिए 20 नए प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पतालों से समन्वय के जरिए कोरोना से मृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए आ रहे हैं। कोरोना से मृतकों के अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ते देख अब लोगों को अगले दिन ही अस्थियां उठानी होगी। निगम बोध संचालन समिति का कहना है कि पहले सामान्य लोगों के अंतिम संस्कार में दो से तीन दिन का समय दे दिया जाता था। लेकिन चूंकि कोरोना का समय है इसलिए बढ़ते दवाब को देखते हुए 24 घंटे के भीतर लोगों को अस्थियां उठानी होंगी।

उधर दक्षिणी निगम ने सोमवार को कोरोना संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए ग्रीन पार्क गैस संचालित (सीएनजी) शवदाह-गृह में विशेष प्रबंध किए। एम्स अस्पताल से आए कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क सीएनजी शवदाह-गृह में किया जाएगा। ग्रीन पार्क सीएनजी शवदाह-गृह को एम्स अस्पताल से विशेष रूप से जोड़ा गया है और इस अस्पताल से आए कोरोना मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार किया जायेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शवों के दाह-संस्कार में देरी न हो और इसके लिए विशेष रूप से दक्षिणी जोन के स्वास्थ्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये गए है कि अस्पताल से शवों के आने से पूर्व ही संपूर्ण व्यवस्था कर ली जाए ताकि अंतिम संस्कार में किसी भी प्रकार
का विलंब न हो।

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