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बची हुई या बेकार दवाओं को सही तरीके से नहीं निपटाया तो बना सकती हैं बीमार

हमारे साथ अक्सर ऐसा होता है कि हम जरूरत से ज्यादा दवाएं ले लेते हैं और फिर संबंधित बीमारी के ठीक होने के बाद दवाओं को फेंक देते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र

हमारे साथ अक्सर ऐसा होता है कि हम जरूरत से ज्यादा दवाएं ले लेते हैं और फिर संबंधित बीमारी के ठीक होने के बाद दवाओं को फेंक देते हैं। इसे हम डस्टबिन में फेंक देते हैं या फिर फ्लश कर देते हैं। सवाल ये है कि रसायनों का इस्तेमाल कर बनाई जाने वाली इन अतिरिक्त या बेकार दवाओं का इस तरीके से निपटारा करना क्या सही है? एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसी दवाओं को डस्टबीन इत्यादि में फेंकने की बजाय उनका सही तरीके से निपटारा बहुत जरूरी है। ताकि इससे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

विशेषज्ञों की मानें तो बेकार या अनयूज्ड दवाओं को फ्लश कर डिस्पोज किया जा सकता है। खासकर ऐसी दवाओं को जिनके लिए ऐसा करने का खासतौर पर निर्देश दिया गया हो। यूएस फूड एंड ड्रग एसोसिएशन ने भी यही सलाह दी है। लेकिन पर्यावरण से संबंधित संगठनों ने इस बात का समर्थन नहीं किया है। उनका कहना है कि इन दवाओं की वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। फ्लश की गई दवाएं पानी में मिलती हैं और फिर जानवरों तथा पेड़-पौधों को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। हाल ही में एम्स द्वारा कराए गए एक सर्वे में यमुना नदी के पानी के सैंपल्स में एंटी-बायोटिक्स के नमूने पाए गए। डॉक्टरों के मुताबिक यह स्थिति बेहद खतरनाक है।

कैसे करें बेकार दवाओं का निपटारा – अनयूज्ड दवाओं के निपटारे को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे – दवाओं को सीधे डस्टबिन में फेंकने की बजाए उसे कचरा या कॉफी ग्राउंड के साथ मिक्स किया जा सकता है। ध्यान रहे कि इन दवाओं को गलती से भी चूर-चूर न करें। इसके बाद कचरे के साथ मिक्स्ड दवाओं को सिल्ड बैग या कंटेनर में डाल लें। इसके अलावा दवाओं और दवा की शीशी को फेंकने से पहले उस पर मौजूद सभी जानकारियों को हटा दें।

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