विदेशी टीके बनेंगे संकटमोचक जल्द आपात इस्तेमाल की मंजूरी

कोरोना विषाणु संक्रमण रोधी टीकों की उपलब्धता बढ़ाने और देश में टीकाकरण की गति तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने अन्य देशों में आपात इस्तेमाल के लिए अधिकृत विदेश निर्मित कोरोना टीकों को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 14, 2021 5:02 AM
covid, coronaदेश में कोरोना के मामलों में उछाल देखा गया है। (AP)।

कोरोना विषाणु संक्रमण रोधी टीकों की उपलब्धता बढ़ाने और देश में टीकाकरण की गति तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने अन्य देशों में आपात इस्तेमाल के लिए अधिकृत विदेश निर्मित कोरोना टीकों को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सरकार ने कोरोना टीके के विदेशी निमार्ताओं को भारत आने का आमंत्रण दिया है।

एक विशेषज्ञ पैनल ने सिफारिश की थी कि उन टीकों को भारत में आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जा सकती है, जो विदेशों में विकसित किए गए या तैयार किए गए हैं और जिन्हें अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन या जापान में प्राधिकारियों ने सीमित आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी है या जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की आपात इस्तेमाल सूची में शामिल हैं। विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि इस फैसले से इस प्रकार के विदेशी टीकों तक भारत की शीघ्र पहुंच सुनिश्चित होगी और इससे बड़ी मात्रा में दवा सामग्री समेत विभिन्न सामग्रियों के आयात, दवा की शीशियां में खुराक भरने एवं उनकी पैकिंग करने की घरेलू क्षमता के उपयुक्त इस्तेमाल आदि को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे टीका निर्माण क्षमता और घरेलू इस्तेमाल के लिए टीकों की कुल उपलब्धता बढ़ेगी।

रूसी ह्यस्पूतनिक वीह्ण टीके से मिलेगी ताकत, आपात इस्तेमाल की मंजूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि देश के औषधि नियामक ने रूस के कोरोना विषाणु संक्रमण रोधी टीके ह्यस्पूतनिक वीह्ण के सीमित आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। इस टीके को डॉक्टर रेड्डीज लैबोरोट्रीज देश में आयात करेगी। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआइ) की मंजूरी मिलने के बाद देश में तीसरे टीके की उपलब्धता का रास्ता साफ हो गया है।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस मंजूरी के बाद हमारे देश में आपात उपयोग के लिए तीसरा टीका भी उपलब्ध हो गया है। इसके अच्छी तरह से परीक्षण हुए। भारत और अन्य देशों के परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी गई है। इन परीक्षणों में 28 से 30 हजार लोग शामिल हुए थे।

केंद्रीय सचिव राजेश भूषण ने कहा कि आज सुबह ही इस टीकों के आपात उपयोग की मंजूरी का आधिकारिक आदेश जारी हुआ है। रूस की कंपनी के साथ भारत में एक कंपनी की साझेदारी है। भारत में इस कंपनी की पांच अन्य कंपनियों के साथ साझेदारी है। भारत सरकार इन सभी कंपनियों से बातचीत कर रही है। जैसे ही हम टीकों की कीमत, टीकों के उत्पादन और इन्हें भारतीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने को लेकर ठोस नतीजों पर पहुंचेंगे। इसकी सूचना दी जाएगी।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोरोना पर विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने सोमवार को कुछ नियामकीय शर्तों के साथ ह्यस्पूतनिक वीह्ण के सीमित आपात इस्तेमाल की सिफारिश की थी। डीसीजीआइ ने भारत बायोटेक के ह्यकोवैक्सीनह्ण और सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया द्वारा निर्मित आॅक्सफोर्ड-एस्ट्रोजेनेका के ह्यकोविशील्डह्ण टीके को पहले ही आपात इस्तेमाल की मंजूरी जनवरी में दे दी थी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि डॉक्टर रेड्डीज लैबोरोट्रीज लिमिटेड (डीआरएल) ने ह्यस्पूतनिक-वीह्ण टीके के आयात और विपणन की अनुमति के लिए आवेदन किया था। डीआरएल ने भारत में टीके के आयात और विपणन को लेकर रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय महामारी एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान अनुसंधान केंद्र के साथ समझौता किया है। डीआरएल ने पिछले साल सितंबर में इस टीके के चिकित्सकीय परीक्षण और भारत में इसके वितरण अधिकार के लिए ह्यरशियन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंडह्ण (आरडीआइएफ) के साथ भागीदारी शुरू की थी। ह्यस्पूतनिक वीह्ण के तीसरे चरण के परीक्षण के अंतरिम विश्लेषण में इसके 91.6 फीसद प्रभावी होने की बात सामने आई जिसमें रूस के 19,866 स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षण के आंकड़े शामिल किया गया।

ह्यस्पूतनिक वीह्ण की 85 करोड़ खुराक हर साल होंगी तैयार

कोरोना पर वार करने के लिए तीसरा टीका भी तैयार है। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआइएफ) ने कहा कि भारत में हर साल स्पूतनिक वी टीके की 85 करोड़ से अधिक खुराक तैयार होंगी। भारत ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए स्पूतनिक वी के सीमित आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी भी दे दी है। भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआइ) ने आपातकालीन उपयोग के लिए इस टीके को पंजीकृत किया है। यह टीका रूस में नैदानिक परीक्षणों को पूरा कर चुका है और भारत में तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षणों में इसके परिणाम सकारात्मक हैं। भारत में ये परीक्षण डॉ. रेड्डीज के साथ मिल कर किए गए।

रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष ने एक बयान में कहा कि करीब तीन देशों में टीके के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है और भारत स्पुतनिक वी को मंजूरी देने वाला 60वां देश है। बयान में कहा गया कि आबादी के लिहाज से भारत इस टीके को अपनाने वाला सबसे बड़ा देश है और वह स्पुतनिक वी के उत्पादन में भी अग्रणी है। डीसीजीआइ ने कुछ शर्तों के साथ स्पुतनिक वी के सीमित आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी है।

स्पुतनिक वी भारत में कोरोना विषाणु के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला तीसरा टीका है। इससे पहले डीसीजीआइ ने जनवरी में पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया द्वारा निर्मित आॅक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका टीका कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी।
आरडीआइएफ के मुक्य कार्यकारी अधिकारी किरिल दिमित्रिव ने कहा कि टीके को मंजूरी मील का पत्थर है, क्योंकि दोनों देशों के बीच स्पुतनिक वी के नैदानिक परीक्षणों और इसके स्थानीय उत्पादन को लेकर व्यापक सहयोग विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा, ह्यरूसी टीके का असर 91.6 फीसद तक है और ये कोविड-19 के गंभीर मामलों के प्रति पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराता है, जैसा कि प्रमुख चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है।

विदेश में निर्मित कोरोना टीकों को अब तेजी से आपात उपयोग की मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत टीके के निर्माता को अब आपात उपयोग की मंजूरी से पहले नैदानिक परीक्षण की जरूरत नहीं होगी। इससे देश में अधिक संख्या में टीके उपलब्ध हो सकेंगे। पॉल ने फाइजर और मॉडर्ना जैसी कंपनियों को भारत आने का न्योता भी दिया है।
वीके पॉल, विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य)

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