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लगातार बढ़ रही टीनेजर्स में डिप्रेशन की समस्या, इन बातों का माता-पिता को रखना चाहिए ख्याल

Depression, Symptoms, Cause, Test, Treatment, Mental Health: दोस्ती, प्यार, पढ़ाई की टेंशन, रिजल्ट का तनाव, अकेलापन जैसी स्थितियों में बच्चे खुद को नहीं संभाल पाते हैं। ऐसे में माता-पिता का सहयोग और सपोर्ट बेहद आवश्यक है।

mental health, mental health in india, depression in india, children suffering from depression, depression Cause, depression treatment, depression symptoms, depression's effects on children, parenting tips, parenting tips for children who are suffering from depression, how to save children from depression, teenage depression, depression in teenagersइन बातों को माता-पिता रखेंगे ध्यान में तो बच्चे नहीं होंगे डिप्रेशन का शिकार

Depression, Symptoms, Cause, Test, Mental Health: विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की लगभग 4.4 प्रतिशत जनसंख्या डिप्रेशन से जूझ रही है। भारत में भी यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बड़ों के साथ ही टीनेजर्स भी मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ओनली माय हेल्थ की एक खबर के मुताबिक, आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2016 के बीच 75 हजार से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्या की। पिछले दस सालों में छात्रों में आत्महत्या के मामले 52% तक बढ़े हैं। ऐसे में माता-पिता का अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के तरफ ध्यान देना बेहद जरूरी है।

बच्चों की हरकतों पर दें ध्यान: अपने काम में व्यस्त ज्यादातर मां-बाप को इस बात की खबर ही नहीं होती है कि उनके बच्चे डिप्रेशन में जी रहे हैं। 2012 की लैंसेंट रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 साल से 29 साल के बच्चों में आत्महत्या की दर दुनियाभर में सबसे ज्यादा है। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को समय देना चाहिए। अगर उनकी हरकतें कुछ अस्वभाविक लगें तो इस बारे में अपने बच्चों से बात करनी चाहिए। इमोशनल सपोर्ट के साथ ही उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना भी सिखाना चाहिए।

बच्चों को लगवाएं लिखने की आदत: रिसर्चर और एजुकेशनल कंसल्टेंट लिंडा स्टेड के अनुसार लिखने से बच्चों को अपनी दबी भावनाओं को बाहर निकालने में मदद मिलती है। रोज तकरीबन 20 मिनट्स लिखने से भी काफी फायदे होते हैं। इससे एक तो आप हल्का महसूस करेंगे, साथ ही आपको शब्दों से सकारात्मकता मिलेगी। इसके अलावा लिखने से हमारी हार्ट रेट भी बेहतर होती है।

फैमिली टाईम है जरूरी: समय-समय पर बच्चों से बातें करते रहना चाहिए। पसंद-नापसंद से लेकर पूरे दिन में किए गए काम, आप इन सभी चीजों पर चर्चा कर सकते हैं। बच्चे बेहद सौम्य और सेंसिटिव होते हैं, वो कितने खास हैं ये महसूस करवाते रहना चाहिए। छुट्टी के दिन में घूमने के प्लान हो या घर पर ही कोई गेट-टुगेदर, कोशिश हमेशा बच्चों के साथ रहने की करनी चाहिए ताकि बच्चे खुद को माता-पिता से करीब महसूस कर पाएं।

दोस्तों से करें बात: बच्चों के रवैये में अगर कुछ अलग दिखे तो कारण जानने की कोशिश जरूर करें। इसके लिए आप उनके दोस्तों से मदद ले सकते हैं, साथ ही टीचर्स से भी बच्चों के ग्रोथ के बारे में पता कर सकते हैं। कोई समस्या होने पर डांटने की बजाय प्यार से बच्चों की मदद करें, इससे उनमें हीन भावना भी नहीं आएगी और न ही वो आगे से आपको कुछ बताने में झिझकेंगे।

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