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गले में सूजन और लगातार खांसी हो सकती है थायराइड कैंसर का लक्षण, एक्सपर्ट से जानिये इसका इलाज

सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. मनदीप मल्होत्रा बता रहे हैं थायराइड कैंसर के लक्षण और इससे बचाव के उपाय।

गले में सूजन और लगातार खांसी हो सकती है थायराइड कैंसर का लक्षण, एक्सपर्ट से जानिये इसका इलाज
जब जब गले में पाई जाने वाली थॉयराइड ग्रंथि सामान्य कार्य करना बंद कर देती है, तब थायराइड की समस्या आती है। photo-freepik

डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा

थायराइड से संबंधित बीमारियां आम हैं, लेकिन कभी-कभी ये कैंसर का रूप भी ले सकते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड कैंसर के मामले ज्यादा पाए जाते हैं। मुख्यतः थायराइड कैंसर चार प्रकार का होता है- पैपिलरी, फॉलिक्युलर, मेडुलरी और एनाप्लास्टिक। यह चार तरह के थायराइड कैंसर इस बात पर निर्भर होते हैं कि कैंसर की कोशिका किस तरह की दिखती हैं। थायराइड कैंसर, थायराइड ग्लैंड के अंदर विकसित होता है। थायराइड ग्लैंड दिखने में तितली की संरचना जैसी होती है। इस ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं। इसके अलावा, थायराइड हार्मोन एक स्वस्थ ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट तथा शरीर के सही तापमान को बनाए रखने में मदद करता है।

जब थायराइड ग्लैंड के अंदर की कोशिकाएं कई गुना बढ़ने लगती है तब एक ट्यूमर विकसित हो जाता है। थायराइड कैंसर जोकि एंडोक्राइन कैंसर का ही एक रूप है, आमतौर पर यदि इसका निदान समय पर हो जाए तो व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

थायराइड कैंसर के सामान्य लक्षण

  • गले में सूजन या गर्दन में गांठ होना
  • गर्दन में तेज दर्द जो कभी-कभी कानों तक पहुंच जाता है
  • लगातार आवाज में बदलाव होना
  • निगलने और सांस लेने में समस्या का अनुभव होना
  • लगातार खांसी आना
  • गर्दन में पाए जाने वाले नोड का बढ़ जाना
  • वजन बढ़ना, भूख में कमी, शरीर से निकलने वाले पसीने में कमी आ जाती है
  • ज्यादा ठंड लगने लगती है तथा हाइपोथायरायडिज्म से संबंधित अन्य लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं

थायराइड कैंसर का ज्यादा जोखिम किन्हें है?

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड कैंसर के मामले तीन गुना अधिक पाए जाते हैं। महिलाएं जब 40 से 50 की उम्र के बीच होती हैं तथा पुरुष 60 से 70 की उम्र के बीच होते हैं, तब थायराइड कैंसर के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। थायराइड कैंसर का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे घाव का आकार कितना बड़ा है। बढ़ रहा कैंसर किस प्रकार का है तथा लिम्फ नोड्स की क्या स्थिति है। भले ही थायराइड कैंसर एडवांस स्टेज में आ चुका है परंतु फिर भी इसका इलाज करना संभव है।

सर्जरी: थायराइड कैंसर का सबसे आम इलाज सर्जरी है। सर्जन ट्यूमर के आकार और स्थान के आधार पर हेमीथायरॉइडेक्टॉमी करते हैं (थायराइड ग्लैंड के एक भाग या एक लोब को हटाना) या दूसरी स्थिति में थायरॉयडेक्टॉमी करना अर्थात पूरे थायराइड ग्लैंड को हटा देने का निर्णय ले सकता है। थायरॉयड ग्लैंड के अलावा, गर्दन के लिम्फ नोड्स को भी हटाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

रेडियोआयोडीन थेरेपी: इस थेरेपी में रोगी को एक टेबलेट या फिर लिक्विड को निगलना होता है जिसके अंदर रेडियोएक्टिव आयोडीन की उचित मात्रा मौजूद होती है। आमतौर पर यह मात्रा रेडियोआयोडीन स्कैन में उपयोग की जाने वाले रेडियोएक्टिव आयोडीन की मात्रा से अधिक होती है। यह रेडियोआयोडीन खराब हो चुके थायराइड ग्लैंड के साथ-साथ कैंसर की कोशिकाओं को भी खत्म कर देता है।

नियर-इन्फ्रारेड इमेजिंग (नीफी) तथा नर्व मॉनीटरिंग: यह तकनीक थायराइड कैंसर सर्जरी के लिए भारत में आने वाली नवीनतम तकनीक है जिसके परिणाम काफी आशाजनक हैं। थायराइड ग्लैंड के अंदर पैराथायराइड ग्लैंड भी होती है और यह तकनीक कैंसर को हटाने के दौरान पैराथायराइड ग्लैंड को संरक्षित करने में सहायता करती है।

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