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इन नेचुरल एंटीबायोटिक्स के नहीं होते हैं साइड इफेक्ट्स, हर तरह के संक्रमण से करते हैं सुरक्षा

ज्यादा मात्रा में एंटी बायोटिक्स का सेवन करने से शरीर में इनका असर धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में ये संक्रमण से लड़ने में बेअसर हो जाते हैं।

एंटीबायोटिक्स (प्रतीकात्मक चित्र)

जब भी कभी हम बीमार होकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो ज्यादातर डॉक्टर्स हमें एंटी बायोटिक्स ही खाने को देते हैं। शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है। इसका फायदा यह होता है कि इसकी वजह से शरीर में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया डेवलप नहीं हो पाते और धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं। बाजार में तमाम तरह के एंटीबायोटिक मौजूद हैं। इनका साइड इफेक्ट भी खूब होता है। ज्यादा मात्रा में इनका सेवन करने से शरीर में इनका असर धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में ये संक्रमण से लड़ने में बेअसर हो जाते हैं। ऐसे में आपको उस तरह के एंटीबायोटिक की जरूरत होती है जिनका साइड इफेक्ट न होता हो। घरेलू नुस्खों के भंडार में ऐसे एंटीबायोटिक भी मौजूद हैं। आज हम आपको ऐसे ही प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

अदरक – अदरक एक ऐसा प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो हर तरह के संक्रमण को सबेस तेज सही करने की क्षमता रखता है। इसे किसी भी संक्रमण से लड़ने और उसे खत्म करने में केवल एक से आधे घंटे लगते हैं। इसके अलावा सांस संबंधी समस्या होने पर भी अदरक का प्रयोग किया जाता है।

लहसुन – लहसुन एक पावरफुल नेचुरल एंटीबायोटिक है। इसमें एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीमाइक्रोबियल गुणों का खजाना होता है। हमारे शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में यह बेहद लाभकारी औषधि है। शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है।

हल्दी – हल्दी का प्रयोग हमारे रसोईघरों में दाल, सब्जी इत्यादि बनाने में किया जाता है। यह बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने के लिए जानी जाती है। साथ ही शरीर के तमाम क्रियाओं की फंक्शनिंग में इसका भरपूर योगदान होता है। इसके इस्तेमाल से घाव बहुत जल्दी भर जाते हैं।

नीम – बैक्टीरिया से लड़ने में सबसे ज्यादा असरदार नीम होता है। तमाम रोगों के लिए यह उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। संक्रमणजनित रोगों में इस्तेमाल की जाने वाली यह सबसे लाभकारी औषधि है।

शहद – शहद एंटीबायोटिक होने के साथ-साथ एंटीसेप्टिक भी होता है। पाचन, गला, त्वचा, चेहरे की किसी भी समस्या के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।यह शरीर को अंदर से संक्रमणमुक्त रखता है।

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