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महिलाओं में बेहद आम हो चुकी हैं ये 5 बीमारियां, इस तरह रहें सावधान

Common Diseases in Women: महिलाओं में सबसे आम बीमारियों में से एक है यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI

शरीर में मौजूद वो ट्यूमर जो कैंसरकारक नहीं होते हैं उन्हें फाइब्रोइड्स कहा जाता है

Women Health: आज मदर्स डे है। हर कोई सोशल मीडिया पर अपनी मांओं के साथ तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कहीं खास पकवान बन रहे हैं तो कोई उन्हें गिफ्ट्स देने में लगा हुआ है। हालांकि, वर्तमान समय में जो सबसे जरूरी है वो है स्वास्थ्य का ख्याल रखना। महिलाएं परिवार के दूसरे जनों का ख्याल रखने में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि खुद पर उनका ध्यान ही नहीं जाता है। ऐसे में बच्चों का ये कर्तव्य बनता है कि वो अपनी मां का ख्याल रखें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के टाइम में ये 5 बीमारियां महिलाओं में बेहद आम हो चुकी हैं। आइए जानते हैं –

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन: महिलाओं में ये सबसे आम बीमारी है। यूरिन कल्चर टेस्ट के जरिये इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। UTI के आम लक्षणों में बार-बार पेशाब करने की इच्छा, यूरिनेशन के दौरान जलन महसूस होना, अधिक मात्रा में यूरिन होने जैसी परेशानी शामिल है। वहीं, इस समस्या के बढ़ने से महिलाओं को यूरिन में ब्लीडिंग, पेट के निचले हिस्से में दर्द और बुखार की शिकायत भी होती है।

PCOS: महिलाओं में विटामिन-डी की कमी देखने को मिलती है। इसके कारण उन्हें PCOS की शिकायत हो सकती है। पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम के मुख्य लक्षण मोटापा, चेहरे और छाती पर असामान्य हेयर ग्रोथ, अनियमित माहवारी, पीरियड्स के दौरान फ्लो कम होना हैं।

हो सकती है फोलेट की कमी: हीमोग्लोबिन और DNA के फॉर्मेशन में फोलेट यानी फॉलिक एसिड महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अनियमित होने से भ्रूण में रीढ़ संबंधी विकार, मिसकैरेज और समय से पहले प्रसव की समस्या हो सकती है।

वजाइनल इंफेक्शन: बैक्टीरिया, पैरेसाइट और वायरस के संपर्क में आने से महिलाओं में ये समस्या देखने को मिलती है। अधिकतर संक्रमणों का डॉक्टर के सामान्य जांच के जरिये इस बीमारी का पता लगा सकते हैं। इससे बचाव के लिए महिलाओं को निजी अंगों की साफ-सफाई जरूरी है।

फाइब्रोइड्स: शरीर में मौजूद वो ट्यूमर जो कैंसरकारक नहीं होते हैं उन्हें फाइब्रोइड्स कहा जाता है। इनके बढ़ने की गति बेहद धीमी होती है। लेकिन शरीर पर इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। इसके कारण महिलाओं में हैवी पीरियड्स, बांझपन, माहवारी के दौरान दर्द, गर्भावस्था की जटिलताएं जैसे कि मिसकैरेज और जल्दी प्रसव की दिक्कतें हो सकती हैं।

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