बदलते मौसम के साथ खानपान और जीवनशैली में होने वाले बदलावों का सीधा असर सेहत पर पड़ता है। खराब डाइट पेट से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा देती है। पाचन तंत्र बिगड़ने पर पेट में गैस, एसिडिटी, अपच, सीने में जलन और पेट दर्द जैसी दिक्कतें ज्यादा परेशान करती हैं। आयुर्वेद फार्मा विशेषज्ञ और वेलनेस एक्सपर्ट सौमिता बसु के अनुसार, कुछ सस्ते और आसानी से मिलने वाले फूड्स पेट की गर्मी को शांत करने में बेहद कारगर होते हैं। ये न सिर्फ आंतों को ठंडक पहुंचाते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। सही मात्रा और सही तरीके से इन फूड्स को डाइट में शामिल करने से गर्मी में पेट से जुड़ी कई समस्याओं से राहत मिल सकती है।
एक्सपर्ट सौमिता बसु के मुताबिक लगातार मसालेदार भोजन खाने, कम पानी पीने या तनाव में रहने से शरीर में गर्मी पैदा हो सकती है और इसका सबसे पहले असर पेट पर पड़ता है। पेट गर्म होना, एसिडिटी, जलन, थकान, अधिक प्यास लगना, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण शरीर की गर्मी के लक्षण हैं। इस समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह पाचन तंत्र के साथ-साथ पूरे शरीर के लिए भी हानिकारक हो सकती है।
एक्सपर्ट ने पेट की गर्मी को कंट्रोल करने के लिए कुछ सरल और घरेलू उपाय अपनाने की सलाह दी है। ये उपाय न केवल गर्मी को कम करते हैं, बल्कि शरीर में संतुलन बनाए रखकर पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाते हैं।
छाछ
छाछ का सेवन पाचन के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। छाछ पाचन के लिए अच्छा और ठंडक देने का एक प्राकृतिक स्रोत है। रोज दिल के खाने के बाद एक गिलास छाछ पीने से पेट शांत रहता है। इसमें जीरा, हींग और थोड़ा सा नमक डालने से गैस, एसिडिटी कम होती है और शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है। छाछ (Buttermilk) को आयुर्वेद में ‘धरती का अमृत’ कहा जाता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान और हालिया रिसर्च भी इसके जादुई असर की पुष्टि करते हैं।
Journal of Dairy Science की एक रिपोर्ट के मुताबिक छाछ एक नेचुरल प्रोबायोटिक है, जिसमें Lactobacillus जैसे अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। , ये गुड बैक्टीरिया आंतों में फर्मेंटेशन (सड़न) को रोकते हैं। गैस तभी बनती है जब खाना पेट में ठीक से नहीं पचता और सड़ने लगता है। छाछ पाचन को तेज कर गैस बनने की प्रक्रिया को ही रोक देती है।
धनिया का जूस
Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित शोध के अनुसार, धनिया के बीज और पत्तों में गैस्ट्रो-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। धनिया अपने ठंडक देने वाले गुणों के लिए जाना जाता है और इसका जूस पीने से पेट की जलन कम होती है। एक चम्मच धनिया को पानी में मिलाकर रोज सुबह पिएं। यह गर्मी से होने वाली थकावट, मूत्र मार्ग की जलन और अपच के लिए लाभकारी है। मेडिकल रिसर्च में इसे ‘नेचुरल एंटासिड’ और ‘गैस्ट्रो-प्रोटेक्टिव’ जड़ी-बूटी माना गया है। धनिया का जूस पेट की गर्मी को शांत करने और एसिडिटी को बेअसर करने में असरदार साबित होता है।
गुलकंद
गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकंद शरीर को ठंडक पहुंचाने का कारगर उपाय है। गुलकंद (Gulkand) को आयुर्वेद में सबसे शक्तिशाली ‘पित्तशामक’ यानी गर्मी शांत करने वाला माना गया है। Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry और अन्य फार्माकोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार गुलकंद पेट के पीएच (pH) लेवल को संतुलित करता है, जिससे एसिडिटी की वजह से पेट की दीवारें छिलती नहीं हैं और अल्सर का खतरा कम हो जाता है। रोज सुबह या सोने से पहले एक चम्मच गुलकंद लेने से पेट की गर्मी कम होती है। इससे त्वचा तरोताजा रहती है और नींद भी अच्छी आती है।
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