क्या दोपहर होते-होते आपकी बॉडी की एनर्जी भी फोन की बैटरी की तरह 1% पर आ जाती है? अगर भरपूर नींद और अच्छे खान-पान के बाद भी आपको हर वक्त ‘लो’ महसूस होता है, तो इसे सिर्फ काम का बोझ समझकर नजरअंदाज न करें। यह ‘थैलेसीमिया माइनर'(Thalassemia Minor) का एक साइलेंट संकेत हो सकता है। भारत में लाखों लोग इस स्थिति के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका पता तब चलता है जब शरीर पूरी तरह टूटने लगता है। घबराइए नहीं, सही समय पर सिर्फ 2 टेस्ट आपका पूरा लाइफस्टाइल बदल सकते हैं। थैलेसीमिया माइनर एक हल्की आनुवांशिक (genetic) खून की बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन सामान्य से थोड़ा कम बनता है, लेकिन आमतौर पर इसके लक्षण बहुत गंभीर नहीं होते।

Lok Nayak Hospital में चिकित्सा सलाहकार डॉ. Naresh Gupta ने बताया कि थैलेसीमिया एक खून का रोग है जो पैदाइश से होता है और माता-पिता से बच्चे में आता है। इस बीमारी का कारण हीमोग्लोबिन में मौजूद खास तरह का प्रोटीन है, जिसे बनाने के लिए हमारी बॉडी को लगातार काम करना पड़ता है। अगर इसे बनाने की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा आ जाए तो हीमोग्लोबिन सही मात्रा में नहीं बन पाता। ऐसी स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता कम हो जाती है, क्योंकि हीमोग्लोबिन का मुख्य काम शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाना होता है। जब ये प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो व्यक्ति में खून की कमी (एनीमिया), कमजोरी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि थैलेसीमिया के प्रकार कितने है? बॉडी में इसके कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं और इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।

थैलेसीमिया के प्रकार

डॉक्टर के अनुसार थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है एक माइनर और दूसरा थैलेसीमिया मेजर होता है। थैलेसीमिया माइनर में लक्षण बहुत हल्के होते हैं और कई बार व्यक्ति को पता भी नहीं चलते, जबकि थैलेसीमिया मेजर एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मरीज को नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

थैलेसीमिया का पता कैसे लगाएं

डॉक्टर ने बताया आप थैलेसीमिया की बीमारी का पता लगाना चाहते हैं तो
CBC (Complete Blood Count)
Hb Electrophoresis (हीमोग्लोबिन की जांच) कराएं।

एक्सपर्ट ने बताया ये एक आनुवांशिक बीमारी है, इसलिए इसकी रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका समय पर जांच और जागरूकता है। अगर शादी से पहले दोनों पार्टनर की स्क्रीनिंग कराई जाए, तो आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। हालांकि नियमित जांच, संतुलित आहार और सही मेडिकल सलाह से इस बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

थैलेसीमिया माइनर और मेजर में अंतर

पहलूथैलिसीमिया माइनरथैलिसीमिया मेजर
कारणएक पैरेंट से खराब जीनदोनों पैरेंट से खराब जीन
गंभीरताहल्कीबहुत गंभीर
लक्षणअक्सर नहीं के बराबरबचपन से गंभीर लक्षण
कमजोरीहल्की या नहींबहुत ज्यादा
एनीमियाहल्कागंभीर एनीमिया
ब्लड ट्रांसफ्यूजनजरूरत नहींबार-बार जरूरी
इलाजसामान्य देखभालरेगुलर इलाज और ट्रांसफ्यूजन
जीवन पर असरलगभग सामान्य जीवनबिना इलाज जीवन जोखिम में

थैलेसीमिया माइनर और मेजर में कौन है ज्यादा खतरनाक

डॉक्टर गुप्ता ने बताया थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर में में सबसे ज्यादा खतरनाक थैलेसीमिया मेजर है। इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन बहुत कम बनता है और मरीज को गंभीर एनीमिया हो जाता है। बच्चे में जन्म के कुछ महीनों बाद ही लक्षण दिखने लगते हैं, ऐसी स्थिति में बच्चे को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। बिना इलाज के जान का खतरा हो सकता है। बात करें माइनर की जिसमें व्यक्ति में कोई खास लक्षण नहीं दिखते और वो नॉर्मल लाइफ जीता है। कई लोगों को तो इस बीमारी का पता तक नहीं होता।

थैलेसीमिया से बचाव कैसे करें

  • जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव है। शादी से पहले या गर्भधारण से पहले लड़का-लड़की थैलेसीमिया की जांच कराएं।
  • अगर इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो गर्भावस्था में CVS जांच जरूर कराएं, ताकि होने वाले बच्चे का इस बीमारी से बचाव किया जा सके।
  • अगर बच्चा थैलेसीमिक है तो आप डॉक्टर से पूरा इलाज कराएं।
  • बिना सलाह आयरन सप्लीमेंट न लें। थैलेसीमिया में कई बार शरीर में आयरन ज्यादा भी हो सकता है।
  • थैलेसीमिया से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है समय पर जांच, सही जानकारी और जिम्मेदार निर्णय।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है और यह पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक स्थिति है, जिसके लक्षण एनीमिया से मिलते-जुलते हो सकते हैं। थकान या कमजोरी महसूस होने पर स्वयं उपचार (Self-treatment) करने के बजाय तुरंत किसी योग्य हेमेटोलॉजिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें।