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कोविड से युद्ध में मिलेगी कामयाबी

17 जनवरी को देश को विस्तृत परामर्श दे दिया था। प्रवेश बिंदुओं पर सब जगह सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी। हवाई अड्डों पर, बंदरगाहों पर, सीमाओं पर सामुदायिक निगरानी शुरू कर दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो 30 जनवरी को इसको अंतरराष्ट्रीय आपात स्थिति घोषित किया था। मैं यहां यह कह रहा हूं कि हम पहले दिन से ही सक्रिय हो गए थे। भविष्य की कल्पना करके।

vaccineकेंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन (बाएं) अनंत गोयनका कार्यकारी निदेशक इंडियन एक्‍सप्रेस समूह(दाएं)।

अनंत गोयनका : आप स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ बेहद सम्मानित डॉक्टर भी हैं। आप खुद और तमाम डॉक्टर जो संकट की घड़ी में लोगों की सेवा के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं, वे मनोबल कैसे ऊंचा बनाए रख रहे हैं?

हर्षवर्धन : देखिए, हम सब बहुत भाग्यशाली हैं कि हम सबका मनोबल बनाए रखने के लिए और लगातार हमें प्रेरणा देने के लिए, हमारे पास इतने बड़े एक आदर्श नायक हैं, जिन्हें मैं देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहता हूं और नरेंद्र मोदी जी लगातार पहले दिन से हम सबका मनोबल बढ़ाते रहे हैं। उन्होंने न जाने कितने राष्ट्र के नाम संदेश दिए हैं, कितनी तरह की बैठक की हैं, कितनी तरह की योजनाएं बनाई हैं।

हम समझते हैं कि जब डॉक्टर इलाज करके अपने घर जाता था, समाज के बीच जाता था तो वहां पर लोग स्वागत करने के बजाय उसकी बेइज्जती करते थे और बहुत से स्थानों पर जब डॉक्टर लोग परीक्षण के लिए मोहल्लों में जाते तो ऐसे दृश्य हमने देखे कि उन्हें लोग मारने के लिए दौड़ते थे। ऐसे समय में मुझे खयाल है कि प्रधानमंत्री जी ने जो मनोबल बढ़ाने के लिए किया वह तो अपनी जगह है, लेकिन जो भारतीय महामारी अधिनियम था, उसमें परिवर्तन कराया। इसके मुताबिक अगर कोई भी कोरोना योद्धा, डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी के साथ दुर्व्यवहार करेगा तो उसको कितनी बड़ी सजा होगी, यह उनकी सोच का परिचायक था।

अनंत जी मैं समझता हूं कि जो संतोष दूसरे की सेवा से मिलता है और जो कोविड योद्धा लगातार अस्पतालों में काम कर रहे हैं और जब तकलीफ वाला कोविड का मरीज ठीक होकर घर जाता है, इससे उनको आत्मतृप्ति मिलती है। आज शायद इनके योगदान के क ारण दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर में से हमारी मृत्य दर है 1.46 फीसद।

इसमें हमारे इन डॉक्टरों का बहुत बड़ा योगदान है, इससे जो संतोष मिलता है उसका शब्दों में वर्णन करना संभव नहीं है, न उसकी जरूरत है। और…लगातार प्रधानमंत्री जी हम लोगों क ो जिस तरह प्रेरित करते हैं, वह हम लोगों की असली ताकत है। हम सब शुक्रगुजार हैं कि भारत के लोगों ने बहुत सम्मान दिया है। बहुत श्रद्धा का और सात्विक भाव दिया है और उसी के कारण, उसी जज्बे के साथ बिना थके सब लोग लगातार प्रधानमंत्री जी से प्रेरणा लेकर आज भी देश में कोविड के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने के लिए जुटे हुए हैं।

अनंत गोयनका : ऐसा सुनने में आता है कि भारत की स्थिति बाकी देशों से बेहतर है क्योंकि यहां कोविड मृत्यु दर दूसरे देशों से काफी कम है। क्या वाकई यहां मृत्यु दर कम है और अगर है तो आप इसकी क्या वजह मानते हैं?

हर्षवर्धन : देखिए पहले तो आपका सवाल मुझे बड़ा अजीब लग रहा है क्योंकि शायद जितने पारदर्शी तरीके से डैशबोर्ड के ऊपर हम सारे आंकड़ों को देश के समक्ष और दुनिया के साथ साझा करते हैं, शायद कोई नहीं करता होगा। यह तो मैं नहीं कहता कि कोई करता होगा कि नहीं करता होगा, लेकिन हम यह कह सकते हैं कि भारत सौ फीसद ईमानदारी और प्रामाणिकता से अपने सारे आंकड़ों को साझा करता है।

पहले दिन से जो परीक्षण की रणनीति है, उसमें शुरुआत में ही रोग पता करके, शुरुआत में ही उपचार और उपचार की सारी सुविधाएं देते हैं। और याद करिए कि आप, आपके अखबार, आपके टेलीविजन चैनल ही हम लोगों को रोज उलाहना देते थे कि परीक्षण-परीक्षण-परीक्षण। यह सब हम मार्च और अप्रैल के महीने में सुनते थे। आज एक प्रयोगशाला से शुरू हुई यात्रा 1130 प्रयोगशालाओं के ऊपर चली गई है।

आज दस से 15 लाख के बीच में हम लोग भारत के अंदर परीक्षण करते हैं, देश के 97 फीसद हिस्से में परीक्षण क ी सुविधा उपलब्ध हो गई है। कोविड केंद्रित अस्पताल और कोविड केंद्रित देखभाल केंद्र में 20 लाख बिस्तर मरीजों के लिए तैयार कर दिए हैं। किसी में आॅक्सीजन की सुविधा है, किसी में आइसीयू सुविधा है। साथ ही 12-13 हजार एकांतवास केंद्र हैं जिनमें हजारों बिस्तर हैं। यह सभी तैयार कर दिए गए हैं और फिर यह वही देश है जहां पीपीई किट की शुरू में कमी थी। एन 95 मास्क के बारे में रोज खबरें आती थीं। वेंटिलेटर के बारे में खबरें आती थीं।

आज ये सारी चीजें भारत बड़ी मात्रा मेें उपलब्ध करा रहा है। महंगी टेस्टिंग किट भारत बाहर से मंगाता था। आज रोज दस लाख से ज्यादा टेस्टिंग किट हम देश में तैयार कर रहे हैं। एक हजार से ज्यादा टेस्टिंग किट को हम वेलिडेट कर चुके हैं। अब सब चीजें हम निर्यात करने की स्थिति में आ गए हैं। अभी जब एन 95 मास्क और पीपीई किट को राज्यों में भेजते हैं तो राज्य हमसे हाथ जोड़ कर कहते हैं कि अभी हमारे पास भंडार गृह में रखने के लिए जगह नहीं है। आप कृपया भेजना बंद करें।

यह सारा कुछ भारत ने अपनी जो योग्यता है, क्षमता है, अपना डीएनए है, अपना जो आत्मविश्वास है, उसकी बदौलत विकसित किया है। प्रधानमंत्री जी भी आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं और उसी के कारण हमारी यह जो रणनीति पहले दिन से है, उसे गहराई से अपनाया गया है। इसी कारण आज शायद दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में से हम हैं, जो सचाई है। आपने पूछा क्या यह सही है, क्यों यह सही है, वह मैंने आपको समझाने की कोशिश की है।

आज शायद ठीक होने की दर भी 94 फीसद है। 90 लाख से ज्यादा लोगों में 85-86 लाख लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं और केवल चार लाख के करीब सक्रिय मामले हैं। ये सक्रिय मामले जो हैं, ये भी ठीक होने की ओर अग्रसर हैं। यह सब कुछ होने से ही आज यह भी एक दुविधा और समस्या है कि लोगों को लगता है कि ठीक तो हो ही जाएंगे इसलिए कोविड को लेकर तय नियमों का पालन नहीं कर रहे। कई स्थानों पर दिल्ली शहर में भी विशेष रूप से लापरवाही लोग बरत रहे हैं और उस लापरवाही का ही परिणाम है कि कुछ स्थानों पर मामले बीच-बीच में बढ़ जाते हैं। लेकिन मैं यह समझता हूं कि भारत ने असाधारण तरीके से कोविड के खिलाफ जंग में सारी दुनिया से बढ़ कर बड़े से बड़े विकसित देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।

अनंत गोयनका : स्पेनिश फ्लू की दूसरी लहर पहले से कहीं ज्यादा घातक साबित हुई थी, क्या यह तथ्य आपकी भी चिंता बढ़ा रहा है?

हर्षवर्धन : देखिए अनंत जी मैंने स्पेनिश फ्लू तो देखा नहीं लेकिन उसके बारे में पढ़ा जरूर है। हम तो जब पहला केस आया था, तभी बुरी स्थिति की कल्पना करके काम कर रहे थे। पहला केस भारत में 30 जनवरी को आया था। छह जनवरी को चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचना दी कि उनके यहां नया कोरोना विषाणु जो कि न्यूमोनिया जैसा है, आया है। छह तारीख को यह रिपोर्टिंग हुई थी और आठ तारीख को 24 से 48 घंटे के बीच में हमने स्वास्थ्य मंत्रालय में विशेषज्ञों की पहली बैठक की थी।

17 जनवरी को देश को विस्तृत परामर्श दे दिया था। प्रवेश बिंदुओं पर सब जगह सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी। हवाई अड्डों पर, बंदरगाहों पर, सीमाओं पर सामुदायिक निगरानी शुरू कर दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो 30 जनवरी को इसको अंतरराष्ट्रीय आपात स्थिति घोषित किया था। मैं यहां यह कह रहा हूं कि हम पहले दिन से ही सक्रिय हो गए थे। भविष्य की कल्पना करके।

निश्चित रूप से इतनी बड़ी महामारी में चिंता इसलिए होती है कि अगर एक भी व्यक्ति की मौत होती है तो उसके कारण दुख होता है, कष्ट होता है और जब लापरवाही होती है और उसमें दिखता है कि शायद इस लापरवाही के कारण किसी के प्राण को खतरा भी हो सकता है तो और ज्यादा तकलीफ होती है लेकिन अब यह पहली लहर या दूसरी लहर है, उसका वैज्ञानिक तरीके से सारी दुनिया में अध्ययन हो रहा है। विज्ञान मंत्रालय में हमारे सारे वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं।

एक तरफ शोध और एक तरफ उपचार के पैमाने को सब चीजों को मजबूत करना लक्ष्य है। यह अपना काम हम कर रहे हैं और कोशिश यह है कि भगवान उसका फल ठीक ही देंगे। आने वाले समय में जितना जल्दी से जल्दी हो सकेगा, कोविड के खिलाफ जंग में भारत को सफलता मिलेगी। यही हमारी इच्छा है, यही हमारी कामना है, यही हमारी भगवान से प्रार्थना भी है।

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