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मसूड़ों में दर्द, सूजन और मुंह से बदबू जैसे ये 10 लक्षण हैं पायरिया के, जानिये पायरिया का आयुर्वेदिक इलाज

ब्रश करने के दौरान दांत या मसूड़ों से खून निकलना पायरिया के लक्षण हैं।

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पायरिया की बीमारी का मुख्या कारण बैक्टीरिया है जो दांत और मसूड़ों के बीच में गंदी चीजें छोड़ देते हैं। photo-freepik

दांतों में सड़न और बदबू होना बेहद शर्मनाक परेशानी है जिसे पायरिया कहते हैं। मेडिकल भाषा में इसे पेरियोडोंटाइटिस (Periodontitis) कहते हैं। इसमें मसूड़ों में सड़न पैदा होने लगती है। इसका मुख्य कारण बैक्टीरिया है जो दांत और मसूड़ों के बीच में गंदी चीजें छोड़ देते हैं जिसकी वजह से बदबू निकलती है।

अगर पायरिया की बीमारी का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह दांतों को बेहद नुकसान पहुंचा सकती है। दांतों के अलावा यह बीमारी हड्डियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके कारण दांत में सूजन आने लगती है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि इस बीमारी के लक्षण क्या है और उसका उपचार कैसे करें।

पायरिया के लक्षण

  • ब्रश करने के दौरान दांत या मसूड़ों से खून निकलने लगता है।
  • सांसों से बदबू निकलती है।
  • दांतों की स्थिति को बिगाड़ देता है यानी दांत टेढ़े मेढ़े दिखने लगते हैं।
  • मसूड़े घटने लगते हैं।
  • मसूड़े लाल, चिपचिपा हो जाते हैं और इसमें सूजन लगने लगती है।
  • दांतों के बीच में मैल जमा होने लगता है।
  • खाने के दौरान चबाने पर दांतों में दर्द होता है।
  • दांतों में सड़न पैदा होने लगती है।
  • मुंह से दुर्गंध आने लगती है।
  • पूरे शरीर में झनझनाहट पैदा होने लगती है।
  • मुंह का स्वाद बदलने लगता है।

इसका इलाज क्या है: एलोपैथिक में डॉक्टर सबसे पहले हाइजीन का ख्याल रखने की सलाह देते हैं। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवा देकर इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन भारत में देसी नुस्खों की कमी नहीं है। आयुर्वेद में सदियों से दांत के लिए कई तरह की दवाइयों का इस्तेमाल होता है। आइए जानते हैं कि कैसे घरेलू नुस्खों से दांतों के दर्द को दूर किया जा सकता है।

नींबू: आयुर्वेद में नींबू का विशेष महत्व है। नींबू विटामिन-सी का बड़ा स्रोत है। दर्द वाले हिस्से पर नींबू का टुकड़ा रखने से दर्द में तुरन्त आराम आता है। इसके अलावा नींबू के छिलके पर जरा-सा सरसों का तेल लगाकर दांतों और मसूड़ों पर लगाने से दांत साफ होते हैं और मसूड़ें मजबूत होते हैं, साथ ही दांतों से संबंधित कई रोगों से बचाव भी होता है।

लौंग: दांतों के लिए भारत में हमेशा से लोग लौंग का इस्तेमाल करते हैं। दांतों के दर्द में लौंग को दांत के बीच में रखने से आराम मिलता। पायरिया का मुख्य कारण बैक्टीरिया है। लौंग में काफी मात्रा में एनेस्थेटिक और एनलजेसिक औषधीय गुण होते हैं जो दांतों के सभी बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। लौंग को दांतों में दर्द की जगह रखें दर्द से तुरंत राहत मिलती है।

सरसों का तेल: पायरिया में सरसों का तेल भी बहुत फायदेमंद है। सरसों के तेल से दांतों की मालिश करने पर पायरिया की बीमारी जा सकती है। इसके लिए तीन से चार बूंद सरसों के तेल में एक चुटकी हल्दी और एक चुटकी नमक मिलाकर दांतों पर नियमित मालिश करने से पायरिया खत्म हो जाता है। इस उपाय से हिलते हुए दांत मसूड़ों में फिर से फिट हो जाते हैं। सरसों के तेल की मालिश से दांतों का पीलापन दूर हो जाता है।

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