मौसम बदलते ही स्वाइन फ्लू यानी H1N1 का खतरा बढ़ने लगता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है क्या H1N1 की वैक्सीन हर साल लगवाना जरूरी है? क्या एक बार टीका लगवाने के बाद जिंदगीभर सुरक्षा मिलती है या हर साल वैक्सीनेशन दोहराना पड़ता है? वैक्सीनेशन को लेकर कई सवाल अब भी लोगों के मन में हैं कि अगर H1N1 वायरस म्यूटेट हो जाए तो क्या वैक्सीन काम करेगी? अक्टूबर वैक्सीन लगवाने का सही समय है या नहीं? वैक्सीन लगवाने के कितने दिन बाद सुरक्षा मिलती है? और टीका लगवाने के बावजूद क्या फ्लू हो सकता है? इन सभी सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है, ताकि फ्लू से बचाव की तैयारी अधूरी न रहे। H1N1, जिसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है, अब मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का हिस्सा है, जो लोगों के बीच फैलता रहता है। यह ऐसा वायरस नहीं है जो 2009 की महामारी के बाद खत्म हो गया हो। इसके बजाय H1N1 उन मौसमी फ्लू वायरस में शामिल है, जिनसे बचाव के लिए मौसमी फ्लू वैक्सीन तैयार की जाती है।
दिल्ली स्थित मैक्स हेल्थकेयर के सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, डॉ. रोमल टिकू ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आमतौर पर ऐसी वैक्सीन तलाशने की जरूरत नहीं होती जिस पर सिर्फ H1N1 या स्वाइन फ्लू लिखा हो। आमतौर पर लोगों को सिजनल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन दी जाती है, जिसे उस मौसम में फैलने की आशंका वाले इन्फ्लूएंजा वायरस से बचाव के लिए तैयार किया जाता है। H1N1 इन्फ्लूएंजा A के उन स्ट्रेन में से एक है, जिन्हें वैक्सीन तैयार करते समय ध्यान में रखा जाता है। दरअसल, फ्लू वायरस लगातार बदलते रहते हैं और वैक्सीन से मिली सुरक्षा भी समय के साथ कम हो सकती है, इसलिए मौसमी फ्लू वैक्सीन हर साल अपडेट की जाती है और सालाना वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है।
क्या मौजूदा फ्लू स्ट्रेन की वैक्सीन उपलब्ध है?
2026-27 के नॉर्दर्न हेमिस्फीयर सीजन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने H1N1 के अपडेट कंपोनेंट की सिफारिश की है। इसमें A/Missouri/11/2025 (H1N1)pdm09-like virus को आधार बनाया गया है। भारत में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) भी देश में इस्तेमाल होने वाली मौसमी इन्फ्लूएंजा वैक्सीन की संरचना से जुड़ी मौजूदा जानकारी उपलब्ध कराता है। इन्फ्लुएंजा वायरस लगातार बदलते रहते हैं। वायरस में होने वाले बदलावों के कारण लोगों के बीच फैलने वाले स्ट्रेन पिछले साल की तुलना में कुछ अलग हो सकते हैं।
अगर H1N1 वायरस म्यूटेट हो जाए तो क्या होगा?
H1N1 में म्यूटेशन होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वायरस अधिक खतरनाक हो जाएगा या मौजूदा वैक्सीन पूरी तरह काम करना बंद कर देगी। इन्फ्लूएंजा वायरस में प्राकृतिक रूप से जेनेटिक बदलाव होते रहते हैं। कुछ बदलावों का वायरस पर बहुत कम असर पड़ता है, जबकि कुछ बदलाव वायरस को इतना अलग बना सकते हैं कि मौजूदा वैक्सीन से संक्रमण के खिलाफ मिलने वाली सुरक्षा कम हो सकती है। हालांकि, वैक्सीनेशन गंभीर बीमारी और जटिलताओं से बचाव में फिर भी मदद कर सकता है। यही वजह है कि हर साल वैक्सीन जरूरत के अनुसार अपडेट किया जाता है।
फ्लू की वैक्सीन हर साल क्यों लगवानी पड़ती है?
फ्लू की वैक्सीन आमतौर पर हर साल लगवाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि वायरस और शरीर की इम्यूनिटी दोनों समय के साथ बदल सकते हैं। इस साल लगाई जाने वाली वैक्सीन में पिछले साल की वैक्सीन के बिल्कुल वही इन्फ्लुएंजा स्ट्रेन शामिल हों, यह जरूरी नहीं है। इसके अलावा समय के साथ वैक्सीन से मिली इम्यूनिटी भी कम हो सकती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति ने पिछले साल फ्लू की वैक्सीन लगवाई थी, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह मौजूदा फ्लू सीजन के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
क्या अक्टूबर में फ्लू वैक्सीन लगवाना सही है?
नॉर्दर्न हेमिस्फीयर में सितंबर और अक्टूबर मौसमी इन्फ्लूएंजा वैक्सीनेशन के लिए आमतौर पर अच्छे महीने माने जाते हैं। भारत में वैक्सीन लगवाने का समय स्थानीय स्तर पर फ्लू के प्रसार, वैक्सीन की उपलब्धता और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। अगर अक्टूबर में वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब वैक्सीन लगवाने में देर हो गई है। इन्फ्लुएंजा का प्रसार जारी रहने के दौरान भी वैक्सीनेशन फायदेमंद हो सकता है। फ्लू की वैक्सीन तुरंत सुरक्षा नहीं देती। वैक्सीनेशन के बाद शरीर को सुरक्षात्मक इम्यून रिस्पांस विकसित करने में आमतौर पर करीब दो सप्ताह लगते हैं।
क्या वैक्सीन लगवाने के बाद भी H1N1 हो सकता है?
डॉक्टर मल्होत्रा ने बताया कोई भी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन हर तरह के संक्रमण से 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं देती। अगर फैल रहा वायरस, वैक्सीन में मौजूद स्ट्रेन से अलग है या समय के साथ इम्यूनिटी कम हो गई है तो वैक्सीन लगवाने वाला व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। हालांकि, वैक्सीनेशन से संक्रमण और खासकर गंभीर बीमारी तथा जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। अगर किसी व्यक्ति को पहले H1N1 हो चुका है, तो उसे यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि अब वह भविष्य में फैलने वाले सभी इन्फ्लूएंजा वायरस से सुरक्षित है। इसलिए पहले H1N1 संक्रमण होने के बावजूद फ्लू वैक्सीनेशन की जरूरत हो सकती है।
किन लोगों को फ्लू वैक्सीन को लेकर खास सावधानी बरतनी चाहिए?
- बुजुर्ग
- बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- कुछ क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोग
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
- हेल्थकेयर वर्कर्स नियमित रूप से ज्यादा जोखिम वाले लोगों के संपर्क में रहते हैं, इन लोगों को फ्लू वैक्सीनेशन को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। फ्लू वैक्सीन लगवाने का सही समय, जरूरत और उपयुक्तता व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और स्थानीय संक्रमण की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। वैक्सीनेशन से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
