योग और फिटनेस की दुनिया में ‘सूर्य नमस्कार’ (Sun Salutation) को एक संपूर्ण व्यायाम माना जाता है। 12 अलग-अलग योगासनों का यह मिश्रण न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मानसिक शांति भी देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आपके दिल (Cardiovascular System) और मांसपेशियों (Muscular System) पर इसका क्या और कितना असर पड़ता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, सही तरीके से किया गया सूर्य नमस्कार ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने, कार्डियोवैस्कुलर सहनशक्ति बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूती देने में बेहद मददगार साबित होता है। हालांकि, दिल के मरीजों या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए इसे करने का तरीका और सीमा अलग हो सकती है। कार्डियो वर्कआउट शरीर की कार्डियोवैस्कुलर एंड्योरेंस, स्टैमिना और ओवरऑल फिटनेस को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, सूर्य नमस्कार योगासनों का एक ऐसा क्रम है, जिसमें कई आसनों को लगातार और एक प्रवाह में किया जाता है। इसे अगर मध्यम से तेज गति से लगातार किया जाए तो यह शरीर को एक अच्छा कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट दे सकता है।

शारदा केयर-हेल्थ सिटी के फिजियो रिहैब विभाग के प्रमुख डॉ. रविकांत बताते हैं कि जब सूर्य नमस्कार लगातार किया जाता है तो इससे हार्ट रेट बढ़ता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर की कई प्रमुख मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इस दौरान पैर, कंधे, हाथ, पीठ और कोर मसल्स पर काम होता है। अलग-अलग आसनों के बीच बार-बार होने वाले बदलाव मांसपेशियों की सहनशक्ति, कोआर्डिनेशन और शरीर के लचीलेपन को भी चुनौती देते हैं। जो लोग एक्सरसाइज की शुरुआत कर रहे हैं या जिनके पास ज्यादा समय नहीं है, उनके लिए सूर्य नमस्कार के कई राउंड शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और सामान्य फिटनेस सुधारने का एक बेहतरीन तरीका हो सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि सूर्य नमस्कार करने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

सूर्य नमस्कार करने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

सूर्य नमस्कार में लगातार मूवमेंट, सांसों का तालमेल, बैलेंस, कोआर्डिनेशन और शरीर के प्रति जागरूकता शामिल होती है। सूर्य नमस्कार की एक खास बात यह है कि इसमें मूवमेंट और सांस को एक साथ जोड़ा जाता है। योग गुरु और अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, हर आसन और अगले आसन में जाने की प्रक्रिया को सांस के साथ जोड़ने से शरीर की मोबिलिटी, स्ट्रेंथ, फ्लेक्सिबिलिटी, कोआर्डिनेशन और ब्रीदिंग अवेयरनेस पर एक साथ काम होता है। अगर इसे व्यक्ति की क्षमता के अनुसार सही गति और उचित संख्या में किया जाए, तो यह एक्टिव फिटनेस रूटीन का उपयोगी हिस्सा हो सकता है।

सूर्य नमस्कार और सूर्य का क्या संबंध है?

सूर्य नमस्कार का पारंपरिक रूप से सूर्य से संबंध माना जाता है। सूर्य को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन देने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हिमालयन सिद्धा अक्षर के मुताबिक यह सोच सूर्य नमस्कार को केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसमें एकाग्रता और माइंडफुलनेस भी जोड़ती है। इससे हर मूवमेंट को ध्यान और उद्देश्य के साथ करने पर जोर दिया जाता है।

क्या सूर्य नमस्कार कार्डियो की जगह ले सकता है?

सूर्य नमस्कार के सेहत को कई फायदे हो सकते हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग या एरोबिक एक्सरसाइज का पूरा विकल्प नहीं माना जा सकता। डॉ. रविकांत के अनुसार, पारंपरिक कार्डियो एक्सरसाइज में व्यक्ति लंबे समय तक हार्ट रेट को बढ़ा हुआ बनाए रख सकता है। इसके अलावा, इन्हें किसी खास एंड्योरेंस या कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस गोल के हिसाब से प्लान करना भी आसान होता है। वहीं, सूर्य नमस्कार की तीव्रता इस बात पर काफी निर्भर करती है कि इसे कितनी तेज गति और किस तकनीक से किया जा रहा है।

कार्डियो और सूर्य नमस्कार को एक साथ करना ठीक है क्या?

बॉडी को हेल्दी रखने और फिटनेस के लिए सूर्य नमस्कार को पूरी तरह कार्डियो से बदलने के बजाय दोनों को एक्सरसाइज रूटीन में शामिल किया जा सकता है। डॉ. रविकांत के अनुसार, सूर्य नमस्कार को एरोबिक एक्टिविटी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ साप्ताहिक एक्सरसाइज रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे शरीर को अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों का फायदा मिल सकता है। अगर कोई व्यक्ति पहली बार सूर्य नमस्कार शुरू कर रहा है तो उसे शुरुआत में बहुत तेज गति या ज्यादा राउंड करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। एक्सपर्ट की सलाह है कि शुरुआती लोग कुछ धीमे और नियंत्रित राउंड से शुरुआत करें। फिटनेस बेहतर होने के साथ धीरे-धीरे इसकी गति और राउंड की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सिर्फ राउंड की संख्या बढ़ाना जरूरी नहीं है, जरूरी यह है कि सूर्य नमस्कार सही तकनीक, सुरक्षित तरीके और व्यक्ति की अपनी क्षमता के अनुसार उचित तीव्रता से किया जाए।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी है, ब्लड प्रेशर हाई रहता है, जोड़ों की समस्या या कोई दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम है, उन्हें तेज या कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। सूर्य नमस्कार के मामले में भी केवल यह देखना जरूरी नहीं है कि आपने कितने राउंड किए। यह भी देखना जरूरी है कि आप इसे सुरक्षित तरीके से और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुरूप कर रहे हैं या नहीं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी नई एक्सरसाइज या फिटनेस रूटीन को शुरू करने से पहले, खासकर अगर आपको कोई बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।