डायबिटीज एक ऐसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी बन गई है, जिसे केवल दवाइयों के भरोसे नहीं, बल्कि सही अनुशासन और प्राकृतिक तरीकों से भी मैनेज करना जरूरी है। योग और आयुर्वेद में कई ऐसी मुद्राएं और क्रियाएं बताई गई हैं जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को नॉर्मल रखने में मददगार हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है सूर्य मुद्रा। माना जाता है कि ये मुद्रा शरीर में अग्नि तत्व को सक्रिय कर पाचन और ऊर्जा के स्तर को सुधारती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से शुगर कंट्रोल करने में मददगार हो सकती है।
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक योग या मुद्राएं आधुनिक चिकित्सा (Medical Treatment) का विकल्प नहीं, बल्कि उसके पूरक (Supportive) हैं। डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए डाइट कंट्रोल करना,नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग और बॉडी की एक्टिविटी बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक दवाइयों के साथ-साथ कुछ यौगिक तकनीकें भी ब्लड शुगर कंट्रोल में सहायक हो सकती हैं। ऐसी ही एक प्रभावी योगिक तकनीक है सूर्य मुद्रा। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि सूर्य मुद्रा कैसे डायबिटीज मैनेजमेंट में असरदार है।
क्या होती हैं मुद्राएं?
- मुद्राएं हैंड जेस्चर हैं यानी हाथों के इशारे है जो शरीर में प्राण ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने में मदद करती हैं। योग शास्त्र के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल से मिलकर बना है। हर उंगली एक तत्व का प्रतिनिधित्व करती है जैसे
- अंगूठा – अग्नि तत्व
- तर्जनी – वायु तत्व
- मध्यमा – आकाश तत्व
- अनामिका – पृथ्वी तत्व
- कनिष्ठा – जल तत्व, मुद्राओं के माध्यम से इन तत्वों को संतुलित किया जा सकता है।
सूर्य मुद्रा कैसे करें?
किसी शांत और साफ जगह पर आराम से बैठ जाएं। आप पद्मासन, सुखासन या कुर्सी पर सीधे बैठ सकते हैं। अपनी पीठ सीधी रखें और दोनों हाथ घुटनों पर रखें। हथेलियां ऊपर की ओर हों। अब अनामिका (रिंग फिंगर) को मोड़कर उसे अंगूठे के नीचे वाले हिस्से से लगाएं। अंगूठे से अनामिका पर हल्का सा दबाव दें। बाकी तीनों उंगलियां सीधी रखें। आंखें बंद कर लें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। इस मुद्रा में रोज 10 से 15 मिनट तक बैठें। नियमित अभ्यास से बेहतर फायदा मिल सकता है।
डायबिटीज में कैसे फायदेमंद है सूर्य मुद्रा?
एक्सपर्ट के मुताबिक सूर्य मुद्रा शरीर में अग्नि तत्व को सक्रिय करती है, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से इंसुलिन उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है और ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। International Journal of Yoga में छपे लेखों के मुताबिक जब शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है तो शरीर ग्लूकोज (Sugar) का इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में बेहतर तरीके से कर पाता है। ये इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करता है। ये मुद्रा न सिर्फ डायबिटीज कंट्रोल करती है बल्कि यूरिक एसिड को नॉर्मल रखने में भी असरदार है। डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। कोलेस्ट्रॉल कम करके यह मुद्रा डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं (Complications) को रोकती है।
डायबिटीज कंट्रोल के लिए जरूरी लाइफस्टाइल टिप्स
नियमित व्यायाम है जरूरी
रोजाना योगासन और हल्का व्यायाम करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। पवनमुक्तासन जैसे आसन फायदेमंद माने जाते हैं।
रोजाना वॉक
सुबह और शाम तेज चाल से टहलना ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है। नेचुरल वातावरण में वॉक करना और भी फायदेमंद हो सकता है।
रिलैक्सेशन तकनीक
शवासन जैसे अभ्यास तनाव को कम करते हैं। तनाव कम होना डायबिटीज कंट्रोल में अहम भूमिका निभाता है।
समय पर भोजन करें
दिन में चार बार संतुलित भोजन करें और कोशिश करें कि रोज एक ही समय पर खाएं। कोई भी मील स्किप न करें।
सकारात्मक सोच
डायबिटीज मैनेजमेंट में मानसिक संतुलन भी जरूरी है। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं और तनाव कंट्रोल करें ।
निष्कर्ष
डायबिटीज एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है, जिसे सही दिनचर्या, नियमित व्यायाम, योग और सकारात्मक सोच के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सूर्य मुद्रा इसका एक सहायक अभ्यास हो सकता है, लेकिन बेहतर कंट्रोल के लिए डॉक्टर की सलाह और नियमित जांच जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। सूर्य मुद्रा या किसी भी योग अभ्यास को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें, खासकर यदि आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं। यह अभ्यास चिकित्सा उपचार या दवाओं का विकल्प नहीं है।
