Beat Summer Bloating & Acidity: गर्मियों में बढ़ते तापमान का असर सिर्फ शरीर की ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। इस मौसम में लोग अक्सर गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। इसकी मुख्य वजह कम पानी पीना, अनियमित खानपान और ज्यादा तला-भुना खाना है। हालांकि, सही डाइट अपनाकर इन परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है। वेट लॉस, PCOD, Thyroid, Diabetes, Cholesterol और गट हेल्थ एक्सपर्ट सिमरत कथूरिया के मुताबिक, गर्मी में अगर डाइट का सही ध्यान रखा जाए तो इस मौसम में होने वाली पाचन संबंधी परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। तेज धूप और गर्म हवाएं हमारे पाचन तंत्र को ज्यादा संवेदनशील बना देती हैं, जिसके कारण ब्लोटिंग, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या या डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। ये सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं, ये कोई दवा या उपचार नहीं है।
एक्सपर्ट के अनुसार, इन समस्याओं के पीछे सबसे बड़ी वजह शरीर में पानी की कमी, अनियमित खाने की आदतें और ज्यादा ऑयली व भारी भोजन का सेवन है। ऐसे में अगर आप इस तपिश भरी गर्मी में स्मार्ट तरीके से डाइट प्लान करें, तो न सिर्फ पाचन बेहतर रहेगा बल्कि शरीर हाइड्रेट भी बना रहेगा। आइए जानते हैं एक्सपर्ट से कि गर्मियों में कैसी होनी चाहिए आपकी स्मार्ट डाइट और किन फूड्स को शामिल करने से पाचन मजबूत रहेगा और गर्मी का असर भी कम होगा।
सुबह की शुरुआत हल्के और हाइड्रेटिंग नाश्ता से करें
दिन की शुरुआत ऐसे नाश्ते से करें जो हल्का हो और शरीर को ठंडक दे। गर्मी में नाश्ते में तरबूज, पपीता और खरबूजा जैसे मौसमी फल बेहतरीन विकल्प हैं। इसके साथ 4-6 भीगे हुए बादाम खाएं, जो हेल्दी फैट और ऊर्जा देते हैं। आप सुबह के नाश्ते में दही के साथ पोहा या वेजिटेबल दलिया भी ले सकते हैं। पपीता पाचन एंजाइम से भरपूर होता है, जो ब्लोटिंग को कम करता है, जबकि दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स गैस और एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं।
मिड-मॉर्निंग स्नैक्स जो पेट को रखेंगे ठंडा
लंबे समय तक खाली पेट रहने से एसिडिटी बढ़ सकती है, इसलिए बीच-बीच में हल्का स्नैक लेना जरूरी है। छाछ में भुना जीरा और पुदीना मिलाकर पिएं, या खीरा और तरबूज खाएं। नींबू पानी में काला नमक मिलाकर पीना भी फायदेमंद होता है। छाछ को गर्मियों का सुपरफूड माना जाता है क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाती है।
दोपहर का भोजन संतुलित और हल्का लें
लंच ऐसा होना चाहिए जिसमें फाइबर, पानी और हल्का प्रोटीन शामिल हो। फाइबर स्पंज की तरह काम करता है, पाचन तंत्र में पानी सोखकर एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है जो पाचन में सहायता करता है और अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। । गर्मियों के दोपहर के भोजन में 1-2 रोटी या थोड़े चावल के साथ मूंग दाल या मसूर दाल लें, जो आसानी से पच जाती है।
दोपहर के खाने में आप लौकी, तोरी और कद्दू जैसी सब्जियों का सेवन करें। इन सब्जियों का सेवन इस मौसम में सबसे बेहतर होता हैं क्योंकि इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है। फाइबर से भरपूर ये सब्जियां बॉडी की पानी की डिमांड को पूरा करेंगी साथ ही पाचन से जुड़ी परेशानियों को भी दूर करेंगी। आप इसके साथ ही दही या रायता और खीरा-गाजर का सलाद जरूर शामिल करें।
शाम के स्नैक्स में हेल्दी विकल्प चुनें
शाम को भूख लगने पर तले-भुने स्नैक्स से बचें क्योंकि ये गैस और एसिडिटी बढ़ाते हैं। इसके बजाय भुने मखाना या चना खाएं। दही से बना फ्रूट स्मूदी लें। याद रखें कि दूध से बने शेक से बचें। पुदीना या सौंफ की हर्बल चाय भी ब्लोटिंग कम करने में मदद करती है।
रात का खाना हल्का और समय पर लें
रात का खाना दिन का सबसे हल्का भोजन होना चाहिए। वेजिटेबल खिचड़ी, मूंग दाल चीला या हल्का वेज सूप बेहतर विकल्प हैं। सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खाना खा लें, क्योंकि देर रात खाना खाने से एसिडिटी बढ़ सकती है।
सोने से पहले पेट को दें आराम
रात में सोने से पहले गुनगुना पानी पिएं या थोड़ी सौंफ चबाएं। यह पाचन को शांत करता है और गैस की समस्या कम करता है।
गैस और एसिडिटी से बचने के टिप्स
- पेट की गैस और एसिडिटी से बचाव करना चाहते हैं तो रोजाना 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं। पानी बॉडी को हाइड्रेट करने के साथ ही पाचन को भी दुरुस्त करेगा।
- खाना धीरे-धीरे और अच्छे से चबाकर खाएं। खाना चबाकर खाएंगे तो आंतों को ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ेगी और पाचन दुरुस्त रहेगा।
ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड से बचें
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या या डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। ये सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं, ये कोई दवा या उपचार नहीं है।
