क्या आप भी मीठा खाने के शौकीन हैं, लेकिन अक्सर इस डर से रुक जाते हैं कि कहीं चीनी खाने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी न हो जाए? पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ‘शुगर और कैंसर’ के संबंध को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिसने आम लोगों के मन में भारी भ्रम और घबराहट पैदा कर दी है। लेकिन इस दावे में कितनी सच्चाई है और मेडिकल साइंस इस पर क्या कहता है?

MOC कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली की ऑन्कोलॉजी डाइटिशियन Dt. मानसी यादव ने जनसत्ता को बताया चीनी सीधे तौर पर कैंसर कोशिकाओं (Cancer Cells) को जन्म नहीं देती, लेकिन अधिक मात्रा में चीनी का सेवन मोटापे (Obesity) और इंफ्लेमेशन का कारण बनता है, जो कैंसर के जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ा सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी हो जाता है कि अपनी दैनिक खुराक में चीनी को किस सीमा तक शामिल करें और कैंसर के खतरे को दूर रखने के लिए आपकी रोज़ाना की थाली कैसी होनी चाहिए? आइए ऑन्कोलॉजिस्ट न्यूट्रिशनिस्ट से समझते हैं कि कैंसर से बचाव के लिए कैसी डाइट होनी चाहिए।

कैंसर से बचाव में डाइट की क्या भूमिका है?

कैंसर की रोकथाम में सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक, संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट को रोजमर्रा के लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, कोई भी एक डाइट या फूड कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं देता।

डाइट में फल और सब्जियों को दें जगह

डायटीशियन मानसी ने बताया कैंसर से बचाव के लिए डाइट में पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां शामिल करना जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक, रोजाना करीब 5 से 6 सर्विंग फल और सब्जियां लेने का लक्ष्य रखा जा सकता है। अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां खाने से डाइट में विभिन्न प्रकार के विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और अन्य प्लांट कंपाउंड्स शामिल होते हैं।

फाइबर वाली चीजें जरूर खाएं

फलों और सब्जियों के अलावा दालों और साबुत अनाज से भी फाइबर मिलता है। इसलिए डाइट में दालें, फल, सब्जियां और होल ग्रेंस शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। पर्याप्त फाइबर वाली संतुलित डाइट खासतौर पर पाचन और आंतों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

रिफाइंड अनाज की जगह होल ग्रेंस चुनें

डाइट में रिफाइंड आटे और मैदा से बने खाद्य पदार्थों की जगह साबुत अनाज और मोटे अनाज को प्राथमिकता दी जा सकती है। रागी, ज्वार, बाजरा, मक्का, क्विनोआ और होल व्हीट जैसे विकल्प डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

पर्याप्त प्रोटीन लेना भी जरूरी

संतुलित डाइट में पर्याप्त प्रोटीन का होना भी जरूरी है। दालें, अन्य लेग्यूम्स, अंडे, मछली और चिकन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति नॉन-वेज खाता है तो रेड मीट की तुलना में मछली और चिकन जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट को करें सीमित

एक्सपर्ट के मुताबिक, रेड मीट जैसे मटन का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। खासतौर पर प्रोसेस्ड मीट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को डाइट में सीमित रखना बेहतर है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें खाने से सीधे कैंसर हो जाएगा, बल्कि इनके अधिक या नियमित सेवन को कुछ कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

जंक और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बचें

आजकल स्ट्रीट फूड, जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ डाइट का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का बार-बार सेवन कम करना चाहिए। इनकी जगह घर का ताजा और कम प्रोसेस्ड खाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

ज्यादा नमक और प्रिजर्व्ड फूड से रहें सावधान

डाइट में बहुत अधिक नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड या प्रिजर्व्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए। खासतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाने से बचना बेहतर है।

मीठे और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स कम करें

बहुत अधिक शुगर वाले खाद्य पदार्थ और मीठे या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को सीमित करना चाहिए। ज्यादा शुगर का सेवन सीधे कैंसर का कारण माना नहीं जाता, लेकिन यह अतिरिक्त कैलोरी, वजन बढ़ने और मोटापे में योगदान कर सकता है, जबकि अधिक वजन कई कैंसर के जोखिम से जुड़ा है।

बिना जरूरत सप्लीमेंट न लें

बिना डॉक्टर या योग्य हेल्थ प्रोफेशनल की सलाह के अनावश्यक सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए। खासतौर पर किसी विटामिन, मिनरल या अन्य सप्लीमेंट की जरूरत और उसकी सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

शाकाहारी डाइट कैंसर का कारण नहीं

सिर्फ शाकाहारी या नॉन-वेजिटेरियन होने से कैंसर नहीं होता। महत्वपूर्ण यह है कि पूरी डाइट कितनी संतुलित और पौष्टिक है। अगर कोई व्यक्ति नॉन-वेज खाता है तो रेड और प्रोसेस्ड मीट को सीमित रखते हुए दाल, अंडे, मछली और चिकन जैसे प्रोटीन स्रोतों को शामिल किया जा सकता है।

पानी और फ्लूइड इनटेक का रखें ध्यान

पर्याप्त पानी पीना भी हेल्दी डाइट का जरूरी हिस्सा है। एक्सपर्ट ने करीब 2 से 2.5 लीटर पानी लेने की बात कही, लेकिन वास्तविक जरूरत व्यक्ति की उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। पानी के अलावा छाछ, नारियल पानी और घर में बने सूप जैसे विकल्प भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

खाना पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण

खाना पकाते समय स्टीमिंग, उबालना, प्रेशर कुकिंग और हल्का सॉटे करना जैसे तरीकों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ग्रिल करते समय भोजन को बहुत ज्यादा जलाने से बचना चाहिए। डीप फ्राइंग और बहुत ज्यादा जला हुआ भोजन नियमित रूप से खाने से बचना बेहतर है।

डाइट में हेल्दी फैट्स शामिल करें

नट्स और सीड्स तथा कुछ खाना पकाने वाले तेलों से मिलने वाले अनसैचुरेटेड फैट्स संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। सरसों और जैतून के तेल जैसे विकल्पों का इस्तेमाल उचित मात्रा में किया जा सकता है। किसी भी तेल या घी को जरूरत से ज्यादा लेने के बजाय कुल फैट और कैलोरी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

कैंसर से बचाव में लाइफस्टाइल भी उतनी ही जरूरी

सिर्फ डाइट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। एक्सपर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक बैठे रहने वाली यानी सेडेंटरी लाइफस्टाइल से बचना और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है। इसके अलावा तंबाकू और शराब से दूरी कैंसर के जोखिम को कम करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

कैंसर से बचाव के लिए कैसी हो आपकी थाली?

कैंसर प्रिवेंशन के लिहाज से डाइट का आसान फॉर्मूला यह हो सकता है प्लेट में अलग-अलग रंगों की सब्जियां और फल, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करें। वहीं प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, प्रोसेस्ड मीट, ज्यादा नमक, मीठे पेय और अत्यधिक तला-भुना भोजन सीमित करें। साथ में नियमित एक्सरसाइज, स्वस्थ वजन और तंबाकू से दूरी जैसी आदतों पर भी ध्यान दें।

डिस्क्लेमर :यह सामग्री केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। कैंसर के इलाज या किसी भी आहार परिवर्तन के लिए अपने डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लें।