35 साल की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है और हार्मोनल बदलाव तेजी से आते हैं। अक्सर देखा जाता है कि इस उम्र में वजन उतना नहीं बढ़ता, लेकिन पेट के आसपास जिद्दी चर्बी (Belly Fat) जमा होने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट पर जमने वाली हर चर्बी एक जैसी होती है? पेट में दिखने वाला ये फैट केवल आम मोटापा नहीं, बल्कि ‘स्ट्रेस बेली’ या ‘हार्मोनल बेली’ का संकेत हो सकता है। 35 के बाद शरीर में कॉर्टिसोल, एस्ट्रोजन और इंसुलिन जैसे हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है, जिसका सीधा असर हमारे पेट के आकार पर पड़ता है। पेट के पास जमा चर्बी स्ट्रेस बेली हो या हार्मोनल बेली दोनों में ही स्थितियों में पेट के पास चर्बी जमा लगती है।

एलीट केयर क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी (MBBS, MD, FAIG) बताते हैं कि पेट की चर्बी बढ़ने के पीछे अलग-अलग जैविक प्रक्रियाएं काम करती हैं। हालांकि खानपान, नींद और शारीरिक गतिविधि जैसी जीवनशैली की आदतें पेट की चर्बी बढ़ने में भूमिका निभाती हैं, लेकिन 35 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में होने वाले जैविक बदलाव भी फैट के वितरण को प्रभावित करते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि Stress Belly और Hormonal Belly में क्या अंतर है, दोनों तरह का फैट अलग-अलग तरीके से क्यों जमा होता है?

Stress Belly कैसे बनती है?

डॉ. रेड्डी के अनुसार, स्ट्रेस बेली का मुख्य कारण लंबे समय तक कोर्टिसोल (Cortisol) का बढ़ा हुआ स्तर होता है। कॉर्टिसोल शरीर का प्रमुख स्ट्रेस हार्मोन है। जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कॉर्टिसोल पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा चर्बी जिसे विसरल फैट कहा जाता है, उसके पास जमा होने को बढ़ावा देता है। ये फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है। अधिक कैलोरी और मीठी चीजें खाने की इच्छा बढ़ा सकती है।

पेट के आसपास फैट सेल्स का जमाव बढ़ा सकता है। स्ट्रेस बैली फैट में इंसान को नींद की समस्या हो सकती है, लगातार थकान, मीठा खाने की तीव्र इच्छा, शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में कमर के आसपास तेजी से वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

Hormonal Belly क्यों होती है?

वहीं हार्मोनल बेली मुख्य रूप से महिलाओं में पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों से जुड़ी होती है। डॉ. रेड्डी बताते हैं कि इस दौरान एस्ट्रोजन (Oestrogen) का स्तर कम होने लगता है, जिससे शरीर में चर्बी जमा होने का पैटर्न बदल जाता है। पहले जो फैट कूल्हों और जांघों में जमा होता था, वह धीरे-धीरे पेट के आसपास जमा होने लगता है। हार्मोनल बेली के साथ महिलाओं में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जैसे पीरियड का अनियमित होना, हॉट फ्लैशेज यानी अचानक गर्मी महसूस होना, मांसपेशियों का कम होना, मेटाबॉलिज्म का धीमा पड़ना, धीरे-धीरे लगातार पेट की चर्बी बढ़ना शामिल है। डॉक्टर के मुताबिक 35 साल के बाद कई लोगों में तनाव और हार्मोनल बदलाव दोनों एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में लक्षणों और लाइफस्टाइल को देखकर कारण का पता लगाया जा सकता है।

Stress Belly और Hormonal Belly को कैसे कम करें?

डॉ. रेड्डी का कहना है कि सिर्फ वजन कम करने पर ध्यान देने के बजाय इसकी मूल वजह को समझना जरूरी है। अगर Stress Belly है तो उसके लिए कॉर्टिसोल को कंट्रोल करना सबसे जरूरी है। इसके लिए रोजाना पर्याप्त नींद लें। नियमित रूप से मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज करें, जैसे तेज चलना या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग। मेडिटेशन, योग या माइंडफुलनेस जैसी तनाव कम करने वाली तकनीकों को अपनाएं। डाइट में कुछ जरूरी बदलाव करना जरूरी है जैसे डाइट में प्रोटीन और फाइबर से भरपूर फूड का सेवन करें ताकि ब्लड शुगर नॉर्मल रहे।  जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन करने से बचें।

अगर Hormonal Belly है तो क्या करें?

डॉ. रेड्डी के अनुसार, हार्मोनल बदलाव के कारण बढ़ी पेट की चर्बी में रेजिस्टेंस ट्रेनिंग बेहद फायदेमंद होती है। इससे मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर बना रहता है। इसके अलावा डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं। विटामिन D और कैल्शियम का पर्याप्त सेवन करें। अगर पेरिमेनोपॉज के लक्षण ज्यादा है तो आप तुरंत डॉक्टर से हार्मोनल जांच कराएं। डॉ. रेड्डी के अनुसार, चाहे पेट की चर्बी तनाव के कारण बढ़ी हो या हार्मोनल बदलाव के कारण किसी भी स्थिति में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। 35 साल के बाद पेट की चर्बी को कंट्रोल रखने की सबसे मजबूत नींव नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना, तनाव को कंट्रोल रखना, संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करना, पर्याप्त और अच्छी नींद लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। किसी भी नई डाइट, व्यायाम या उपचार को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।